चढ़ावा विवाद: मिश्रा ने कहा ट्रस्ट में सरकारी हस्तक्षेप नहीं, केजरीवाल ने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया
नरेश
- 12 Jul 2026, 09:48 PM
- Updated: 09:48 PM
नयी दिल्ली/अयोध्या, 12 जुलाई (भाषा) अयोध्या में राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि मंदिर न्यास या इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के कामकाज में ''सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा''।
उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद की पृष्ठभूमि में पादर्शिता सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की विपक्षी दलों की मांग के बीच रविवार को कहा कि सीईओ की भूमिका और अधिकारों का निर्धारण श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही करेगा।
कांग्रेस और शिवसेना (उबाठ) के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने भी राम मंदिर के चढ़ावे में कथित धांधली के मुद्दे पर अभियान शुरू किया है।
आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने लोगों से चढ़ावा चोरी के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संबोधित एक पत्र पर हस्ताक्षर करने की अपील की।
केजरीवाल ने संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि दोषियों को जवाबदेही से बचाया जा रहा है। उन्होंने कहा, 'जब तक दोषियों को फांसी की सजा नहीं मिल जाती, हम चैन से नहीं बैठेंगे।''
दिल्ली के रोहिणी में केजरीवाल की मौजूदगी में 'सुंदरकांड' पाठ के साथ आप के राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत हुई, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आप प्रमुख को 'चुनावी हिंदू' बताया जिन्हें चुनाव आने पर भगवान राम याद आते हैं।
इस बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने इस चढ़ावा चोरी के मामले पर 'दुख' व्यक्त किया तथा भरोसा जताया कि विशेष जांच दल (एसआईटी) की मौजूदा जांच और पुलिस कार्रवाई 'निर्णायक मोड़' पर पहुंचेगी।
यह मुद्दा कर्नाटक के बेलगावी में आरएसएस की वार्षिक अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के समापन दिवस के दौरान उठा।
संघ ने कहा कि उसे 'तीर्थ क्षेत्र न्यास' से यह अपेक्षा भी है कि 'वह यह सुनिश्चित करेगा कि भविष्य में ऐसी कोई घटना न हो, जिससे राम मंदिर के प्रति सभी राम भक्तों की श्रद्धा और गहरी आस्था को ठेस पहुंचे।''
विपक्षी दलों ने इस मामले में पुलिस और एसआईटी की जांच पर सवाल खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि 'बड़ी मछलियों' को बचाया जा रहा है।
उनका कहना था कि वे संसद के आगामी मानसून सत्र में इस मुद्दे को उठाएंगे और प्रधानमंत्री से जवाब देने की मांग करेंगे।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने उच्चतम न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच, फॉरेंसिक ऑडिट, जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पार्टी की मांगों को दोहराया।
रमेश ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "चंदा चोरी: आस्था से धोखा। भगवान श्रीराम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण का खुलासा हुए आज एक माह बीत चुका है, पर हर चीज का श्रेय लेने वाले प्रधानमंत्री मोदी जवाबदेही के नाम पर मौन मोदी बने हुए हैं।"
कांग्रेस महासचिव ने कहा कि मामले को दबाने की सरकारी कोशिशों से स्पष्ट हो गया है कि चंपत राय और अन्य मंदिर न्यासियों के पास कुछ गहरे राज हैं, जिसके कारण मोदी सरकार उनपर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और उनका दबदबा आज भी क़ायम है।
शिवसेना (उबाठा) प्रमुख ने भी इस मुद्दे पर पांच जुलाई को मुंबई के दादर स्थित एक हनुमान मंदिर से 'राम रक्षा' आंदोलन शुरू किया था।
राम मंदिर ट्रस्ट ने छह जुलाई को आयोजित बैठक में सीईओ पद के लिए उम्मीदवारों की जांच-पड़ताल के वास्ते तीन सदस्यीय समिति बनाने की घोषणा की थी। इस समिति में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व अध्यक्ष सुरेश हवारे शामिल हैं।
इस संदर्भ में नृपेंद्र मिश्रा ने रविवार को अयोध्या में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि उनकी पहली जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगा कि ट्रस्ट में श्रद्धालुओं का भरोसा बना रहे।
उन्होंने कहा, "नया सीईओ वित्तीय व्यवस्थाओं की देखरेख भी करेगा। ट्रस्ट या उसके सीईओ के कामकाज में सरकार का कोई 'दखल' नहीं होगा।"
मिश्रा ने कहा कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं को सभी सुविधाएं मिलें और ट्रस्ट में उनका भरोसा बना रहे, यह सुनिश्चित करना नये सीईओ की प्रमुख जिम्मेदारियों में से एक होगा।
उन्होंने कहा, "एक तरह से सीईओ बिना किसी सरकारी दखल के ट्रस्ट के सहायक के तौर पर काम करेगा।"
मिश्रा ने बताया कि सीईओ के चयन के लिए ट्रस्ट ने तीन सदस्यों की समिति बनाई है। उन्होंने कहा कि सीईओ को कितने अधिकार देने हैं, यह ट्रस्ट तय करेगा।
मिश्रा के मुताबिक, सीईओ अपने स्टाफकर्मियों का चुनाव खुद करेगा, लेकिन सब कुछ ट्रस्ट के ही अधिकार क्षेत्र में रहेगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह सीईओ पद के लिए नामों की सिफारिश करने वाली समिति की बैठकों में शामिल होंगे, मिश्रा ने इससे साफ इनकार कर दिया।
राम मंदिर ट्रस्ट में संभावित बदलाव के सवाल पर मिश्राा ने कहा, "मेरी उपस्थिति में कोई निर्णय नहीं लिया गया।" उन्होंने साफ किया कि वह राम मंदिर ट्रस्ट की छह जुलाई को आयोजित बैठक में शामिल नहीं हुए थे।
यह पूछे जाने पर कि क्या वह राम मंदिर ट्रस्ट की 22 जुलाई की बैठक में हिस्सा लेंगे, मिश्राा ने कहा, "बैठक 22 जुलाई को है, लेकिन मुझे बैठक का एजेंडा नहीं पता। अगर मामला निर्माण से जुड़ा है, तो मुझे इसमें शामिल होने के लिए आना होगा।"
उन्होंने कहा, " कृपया समझने की कोशिश करें। हम पदेन सदस्य हैं, जिन्हें वोट देने का कोई अधिकार नहीं है। अब 22 जुलाई की बैठक का एजेंडा जानने के बाद ही मैं तय करूंगा कि उसमें शामिल होना है या नहीं।"
राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच मिश्रा ने रविवार को दावा किया कि मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को कोई शिकायत नहीं है और उन्हें यहां दर्शन करके अच्छा लग रहा है।
केजरीवाल ने 'सुंदरकांड' पाठ के मौके पर कहा, "हम भगवान हनुमान से प्रार्थना करेंगे कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी करने वालों को कड़ी सजा मिले और उनके आशीर्वाद से हम पूरे देश में हस्ताक्षर अभियान शुरू करेंगे।"
'आप' प्रमुख ने कहा कि इस अभियान के जरिये दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर लोगों का समर्थन जुटाया जाएगा।
भाषा वैभव नरेश
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