दिल्ली पुलिस ने बच्चों की तस्करी मामले में 10 और लोगों को गिरफ्तार किया
संतोष
- 10 Jul 2026, 08:26 PM
- Updated: 08:26 PM
नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह के खिलाफ जांच के तहत बच्चों के जैविक माता-पिता, तस्करों, बिचौलियों, खरीदारों और एक अस्पताल के मालिक सहित 10 और लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि चार और बच्चों को बरामद किया जिससे मामले में बरामद शिशुओं की कुल संख्या नौ हो गई है। पुलिस ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने पिछले महीने मध्य दिल्ली में जाल बिछाकर किए गए एक अभियान में गिरोह का भंडाफोड़ किया और तीन लोगों को कथित तौर पर एक नवजात शिशु को बेचने की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। इसी सिलसिले में ताजा गिरफ्तारियां की गई हैं।
पुलिस ने कहा कि नई गिरफ्तारियों से एक संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है जो कथित तौर पर जैविक माता-पिता से नवजात शिशुओं को खरीदता था और उन्हें कई राज्यों में निसंतान जोड़ों को कई लाख रुपये में बेचता था।
पुलिस ने एक बयान में कहा कि पुलिस ने कई लाख रुपये के वित्तीय लेन-देन का भी पता लगाया है और बैंक खातों के माध्यम से धन के लेन-देन की जांच कर रही है।
पुलिस के अनुसार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में चलाए गए समन्वित अभियानों के दौरान चार और बच्चों को बरामद किया गया। इनमें दिल्ली के रोहिणी से बरामद 16 दिन का एक नवजात लड़का, ऋषिकेश से एक महीने का नवजात लड़का, मथुरा से एक साल का लड़का और हरिद्वार से आठ महीने का एक नवजात लड़का शामिल है।
अधिकारी ने बताया कि इस मामले में अब तक बरामद किए गए बच्चों की कुल संख्या नौ है।
यह मामला पांच जून को तब प्रकाश में आया जब मध्य जिला पुलिस की एक टीम ने विशिष्ट सूचना पर कार्रवाई करते हुए पहाड़गंज इलाके में आरके आश्रम मेट्रो स्टेशन के पास एक अभियान चलाया। अभियान के दौरान, पुलिस ने तीन आरोपियों - ज्योति उर्फ कमलेश, शालू और ललित - को तब पकड़ा जब वे कथित तौर पर पुलिस द्वारा भेजे गए फर्जी खरीदारों को चार से पांच दिन के नवजात शिशु को बेचने का प्रयास कर रहे थे।
पुलिस ने बयान में कहा, "इस बाबत पहाड़गंज थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त प्रशांत चौधरी के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया। टीम में कई पुलिस इकाइयों के अधिकारी शामिल थे, जबकि जांच में जटिलताओं के कारण कानूनी सहायता भी ली गई थी।"
आरोपियों से गहन पूछताछ और तकनीकी जांच के माध्यम से, टीम ने "जरूरत और आपूर्ति" (नीड एंड सप्लाई) मॉडल पर काम करने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय बाल तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया।
पुलिस के अनुसार, निसंतान जोड़े नवजात शिशुओं की तलाश में गिरोह के सदस्यों से संपर्क करते थे। इसके बाद यह गिरोह उन जैविक माता-पिता की पहचान करता था जो अपने बच्चों को त्यागने के इच्छुक होते और उनसे शिशुओं को खरीदता था और फिर उन्हें संभावित खरीदारों को मोटी रकम पर बेच देता था।
पुलिस ने बताया कि तस्करी किए गए एक नवजात शिशु के जैविक माता-पिता को तकनीकी निगरानी के आधार पर गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी पहचान गुजरात के साबरकांठा जिले के कांतिभाई गामर और सुगनाबेन गामर के रूप में हुई है।
पुलिस के एक अधिकारी ने कहा, "जैविक माता पिता ने अपने नवजात शिशु को गिरोह के सदस्यों को बेच दिया था, जिन्होंने बाद में बच्चे को एक अन्य जोड़े को बहुत अधिक कीमत पर बेच दिया। एक अन्य आरोपी शंकर गामर, साहिबा उर्फ कालिया गामर नाम की एक महिला के साथ मिलकर गिरोह के लिए जैविक माता पिता से नवजात शिशुओं को खरीदता था।"
पुलिस ने बताया कि अन्य गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली की गरिमा जैन शामिल हैं, जिसने कथित तौर पर अस्पताल के जरिए एक नवजात शिशु खरीदा था। इसमें उसके ससुर सतीश जैन को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसपर शिशु खरीदने के लिए आठ लाख रुपये का भुगतान करने का आरोप है।
पुलिस के मुताबिक, ऋषिकेश की निसंतान केतकी गुप्ता को भी गिरफ्तार किया गया है, जिसने लगभग चार लाख रुपये में एक नवजात बालक खरीदा था।
पुलिस ने सेवानिवृत्त शिक्षक राम प्रकाश निषाद को भी गिरफ्तार किया, जिसने 2025 में एक नवजात लड़का खरीदा था। इसी के साथ पुलिस ने हरिद्वार के एक दंपति आभा सिंह और अमित प्रताप सिंह को भी गिरफ्तार किया। उनपर पांच लाख रुपये में बच्चा खरीदने का आरोप है। हालांकि उनकी पहले से एक बेटी है।
पुलिस ने बयान में कहा कि एक अन्य महिला आशिमा उर्फ आशी ने अस्पताल के मालिक को नवजात शिशु सौंप दिया था। पुलिस ने दावा किया कि महिला को कोई भुगतान किए बिना गिरोह ने बच्चे को अपने पास रख लिया था।
जांच के दौरान, पुलिस को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह संकेत मिले कि नवजात शिशुओं को अवैध आईवीएफ या सरोगेसी प्रक्रियाओं के माध्यम से खरीदा गया था।
बरामद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया, जिसने उनकी देखभाल, संरक्षण और पुनर्वास के संबंध में निर्देश जारी किए हैं।
पुलिस ने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने समेत अन्य पहलुओं को लेकर आगे की जांच जारी है।
भाषा नोमान नोमान संतोष
संतोष
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