अमायरा आत्महत्या मामला : नीरजा मोदी स्कूल में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग
पृथ्वी रवि कांत
- 10 Jul 2026, 05:28 PM
- Updated: 05:28 PM
जयपुर, 10 जुलाई (भाषा) संयुक्त अभिभावक संघ ने नीरजा मोदी स्कूल में शिक्षकों की नियुक्ति, योग्यता और नियामकीय अनुपालन में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसी स्कूल में पिछले साल नौ वर्षीय छात्रा अमायरा ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
संगठन ने शुक्रवार को कहा कि यदि अनिवार्य नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
कक्षा चार की छात्रा अमायरा ने पिछले साल एक नवंबर को स्कूल भवन की चौथी मंजिल से कथित तौर पर छलांग लगा दी थी। उसे पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था।
अमायरा के पिता विजय मीणा ने भी कहा कि बेटी की मौत के बाद लगातार सामने आ रहे तथ्य बेहद पीड़ादायक हैं और यदि स्कूल ने शिक्षकों की नियुक्ति, योग्यता, स्टाफ व्यवस्था और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े अनिवार्य मानकों का पालन नहीं किया है तो निष्पक्ष जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनका परिवार सिर्फ अमायरा के लिए न्याय की लड़ाई नहीं लड़ रहा है, बल्कि स्कूलों में पढ़ने वाले हर बच्चे की सुरक्षा, जवाबदेही और अधिकारों के लिए भी संघर्ष कर रहा है।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने शुक्रवार को राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष कुछ समय पहले पेश किए गए दस्तावेजों का हवाला देते हुए स्कूल में शिक्षकों की भर्ती और उनकी योग्यता से जुड़ी बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया।
उन्होंने रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा, ''सीबीएसई निरीक्षण रिकॉर्ड में शैक्षणिक सत्र 2024-25 और 2025-26 के बीच शिक्षकों की संख्या में बड़ा बदलाव दिखाई दिया और निरीक्षण के दौरान कई नियुक्ति पत्र तथा योग्यता संबंधी रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए।''
उन्होंने शिक्षकों की योग्यता, स्टाफ व्यवस्था, बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और स्कूल में नियमों के पालन की स्थिति की स्वतंत्र, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग की।
दूसरी ओर, अमायरा के पिता ने आरोप लगाया कि हाल में सामने आए सीसीटीवी फुटेज में उनकी बेटी स्पष्ट रूप से परेशान दिखाई दे रही थी और उसकी स्थिति के बावजूद कक्षा अध्यापिका पुनीता शर्मा ने कोई कार्रवाई नहीं की।
मीणा ने कहा कि पुलिस ने हाल ही में मामले में अदालत के समक्ष आरोप पत्र दाखिल किया है।
उन्होंने कहा, ''आरोप पत्र अधूरा प्रतीत होता है। इसमें कक्षा अध्यापिका के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा भी जोड़ी जा सकती है। साथ ही स्कूल मालिक और प्रधानाचार्य के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 लगाई जानी चाहिए, जबकि आरोप पत्र में यह धारा केवल अध्यापिका के खिलाफ लगाई गई है।''
मीणा ने कहा कि स्कूल परिसर में बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण की जिम्मेदारी स्कूल प्रबंधन की होती है।
उन्होंने बताया कि पिछले आठ महीनों में मामले की जांच के लिए तीन जांच अधिकारी बदले जा चुके हैं।
मीणा ने अदालत से अपील की कि वह आरोप पत्र में मौजूद कमियों का संज्ञान ले, प्रधानाचार्य और स्कूल मालिक के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की संबंधित धाराएं जोड़े और आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित करे।
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पृथ्वी रवि कांत
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