'आईएनएस 'सुदर्शनी' भारतीय समुद्री विरासत की बेहतरीन परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है'
पवनेश
- 08 Jul 2026, 05:23 PM
- Updated: 05:23 PM
(योषिता सिंह)
(फोटो के साथ)
न्यूयॉर्क, आठ जुलाई (भाषा) न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने कहा कि भारतीय नौसेना के प्रशिक्षण पोत 'आईएनएस सुदर्शनी' की अमेरिका यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रक्षा और आपसी संबंधों को प्रदर्शित करती है।
अमेरिका की आजादी की 250वीं सालगिरह के मौके पर आयोजित हो रहे 'यूनाइटेड स्टेट्स इंटरनेशनल नेवल रिव्यू 250' और 'सेल फोर्थ 250' समारोहों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए 'आईएनएस सुदर्शनी' गर्व के साथ तिरंगा लहराते हुए चार जुलाई को न्यूयॉर्क पोर्ट पहुंची।
प्रधान ने मंगलवार को 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''आईएनएस सुदर्शनी भारतीय समुद्री विरासत की शानदार परंपरा का प्रतिनिधित्व करती है और भारतीय नौसेना की ताकत और कौशल को दिखाती है। यह भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते रक्षा और दोनों देशों के लोगों के बीच मजबूत होते आपसी संबंधों का भी प्रतीक है।''
आईएनएस सुदर्शनी का यह दौरा पोत के 10 महीने लंबे समुद्री अभियान 'लोकायन 2026' का हिस्सा है। भारत सरकार के एक बयान के अनुसार यह अभियान ''समुद्री सहयोग को मजबूत करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सद्भावना बढ़ाने और सहयोगी नौसेनाओं के साथ संबंधों को प्रगाढ़ करने के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।''
कमांडिंग अफसर एन. रविकांत ने महावाणिज्य दूत को 'लोकायन 2026' के बारे में जानकारी दी। यह 10 महीने और 22,000 समुद्री मील का एक वैश्विक समुद्री अभियान है जिसके तहत वैश्विक समुद्री साझेदारी को मजबूत करने के लिए 13 देशों के 18 बंदरगाहों का दौरा किया जाएगा।
प्रधान ने रविकांत और पूरी टीम को बधाई दी। प्रधान ने कहा कि उन्होंने ''भारत की समृद्ध समुद्री विरासत, भारतीय नौसेना की पेशेवर कुशलता और उत्कृष्टता तथा भारत एवं अमेरिका के बीच दोस्ती की अटूट भावना को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है।''
आईएनएस सुदर्शनी भारतीय नौसेना के दो विशाल पोत में से एक है।
रविकांत ने बताया कि पोत ने इस साल जनवरी में भारत से अपनी 10 महीने लंबी यात्रा शुरू की और लगभग साढ़े पांच महीनों में 13,000 समुद्री मील का सफर तय करके अमेरिका पहुंचा।
रविकांत ने कहा, ''यह लोकायन अभियान के तहत 10 महीने की तैनाती है जो हर चार साल में एक बार होती है। यह अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के अवसर पर हुई है।''
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बंदरगाह पर रुकने से दोनों देशों के बीच गहरे सांस्कृतिक और कूटनीतिक आदान-प्रदान का मौका मिलता है।
नॉरफॉक और बाल्टीमोर में 'सेल 250' कार्यक्रमों में सफलतापूर्वक हिस्सा लेने के बाद आईएनएस सुदर्शिनी अमेरिका की आजादी की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर होने वाले 'सेल फोर्थ 250' समारोह के लिए ब्रुकलिन में रुकी।
भाषा सुरभि पवनेश
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0807 1723 न्यूयॉर्क