दिल्ली पुलिस ने फर्जी सरकारी पहचान पत्र बनाने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया
वैभव
- 06 Jul 2026, 03:56 PM
- Updated: 03:56 PM
नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने एक वेबसाइट के ज़रिए फर्जी सरकारी पहचान पत्र बनाने और बेचने में शामिल एक अंतर-राज्यीय गिरोह का कथित तौर पर भंडाफोड़ किया और दो लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
दिल्ली पुलिस की 'इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशन्स' (आईएफएसओ) इकाई के अनुसार, आरोपियों की पहचान दमन और दीव के रहने वाले विदेशी साव और बिहार में पटना के निवासी संतोष कुमार के तौर पर हुई है।
आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) विनीत कुमार ने एक बयान में कहा कि दोनों आरोपी एक वेबसाइट का संचालन करते थे जिस पर ऑनलाइन पैसे का भुगतान करने के बाद व्यक्ति जाली आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, पैन से जुड़े दस्तावेज़, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज़ बनवा सकता था।
उन्होंने कहा कि ये फर्जी दस्तावेज़ असली सरकारी दस्तावेज़ों जैसे ही दिखते थे और इनका इस्तेमाल धोखाधड़ी करने, ठगी करने, अन्य की पहचान का इस्तेमाल करने और यहां तक कि असली सरकारी दस्तावेज़ हासिल करने के लिए भी किया जाता था।
डीसीपी ने कहा कि यह मामला सोशल मीडिया की निगरानी के दौरान सामने आया है।
अधिकारी ने बताया कि जानकारी की पुष्टि करने के लिए आईएफएसओ टीम ने मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल करके इस वेबसाइट पर एक अकाउंट बनाया। इस पर सेवा लेने से पहले व्यक्ति द्वारा 'डिजिटल वॉलेट' में पैसे डालना जरूरी था तो जांचकर्ताओं ने यूपीआई के माध्यम से 100 रुपये स्थानांतरित किए।
पुलिस ने बताया कि 'वॉलेट' में पैसे डालने के बाद पुलिस ने फर्जी जानकारी और फोटो अपलोड करके नकली आधार और वोटर आईडी कार्ड बना लिए।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि वेबसाइट पर भुगतान प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया गया मोबाइल नंबर और यूपीआई अकाउंट साव से जुड़ा हुआ था।
कुमार ने बताया कि इसके बाद एक टीम बनाई गई और लंबी तकनीकी जांच और डिजिटल विश्लेषण के बाद, टीम ने दमन और दीव से साव को पकड़ा।
लगातार पूछताछ के दौरान, साव ने बताया कि वह ऑनलाइन पैसे के बदले 'बीकेप्रिंट.इन' के ज़रिए नकली दस्तावेज़ बनवाने में मदद कर रहा था। उसने यह भी बताया कि वेबसाइट का संचालन पटना का संतोष कुमार संभाल रहा था और तकनीकी सबूतों के आधार पर, पुलिस ने कुमार को भी पकड़ लिया।
पुलिस ने बताया कि आरोपी इसी नाम से मिलती जुलती एक और वेबसाइट का संचालन कर रहे थे।
डीसीपी के मुताबिक, आरोपी कथित तौर पर ऐसे क्यूआर कोड तैयार करता था, जिनमें सिर्फ ग्राहकों की ओर से दर्ज की गई जानकारी ही होती थी और इससे फर्जी दस्तावेज देखने में सरकारी पहचान पत्र जैसे असली लगते थे, जबकि उनका सरकार के आधिकारिक डेटाबेस से कोई संबंध नहीं था।
पुलिस ने साव के पास से दो मोबाइल फोन, एक लैपटॉप और एक क्यूआर कोड साउंड बॉक्स बरामद किया। कुमार के पास से एक लैपटॉप बरामद किया गया जिसमें वेबसाइटों से संबंधित तकनीकी जानकारी शामिल है। साथ में एक मोबाइल भी मिला है जिसमें साव के साथ बातचीत व वेबसाइटों से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, वेबसाइट उपयोग करने वाले लोगों को डेटाबेस आदि है।
पुलिस ने कहा कि इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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