टाटा स्टील चालू वित्त वर्ष में 20,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश करेगी
अजय
- 05 Jul 2026, 11:04 AM
- Updated: 11:04 AM
नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) टाटा स्टील ने वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 20,000 करोड़ रुपये के पूंजीगत निवेश की योजना बनाई है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 38 प्रतिशत अधिक है। कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष 14,559 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
कंपनी के प्रबंधन का कहना है कि यह निवेश देश में कारोबार के विस्तार पर किया जाएगा।
कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक टी. वी. नरेंद्रन तथा मुख्य वित्त अधिकारी (सीएफओ) कौशिक चटर्जी ने कहा, ''बीते वित्त वर्ष में हमने 14,559 करोड़ रुपये का पूंजीगत निवेश किया गया था। चालू वित्त वर्ष में इसे बढ़ाकर 20,000 करोड़ रुपये करने की योजना है। इस निवेश का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा भारत में खर्च किया जाएगा।''
कंपनी प्रबंधन ने टाटा स्टील की निवेश योजना और दीर्घावधि की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर यह जानकारी दी है।
यह राशि टिनप्लेट और वायर कारोबार के विस्तार, तारापुर में हॉट रोल्ड पिकलिंग एंड गैल्वनाइजिंग लाइन (एचआरपीजीएल), जमशेदपुर में कोक ओवन परियोजना, खनन, आपूर्ति श्रृंखला और हरित परिचालन को मजबूत करने पर खर्च की जाएगी।
वर्तमान में टाटा स्टील की कुल इस्पात उत्पादन क्षमता 3.6 करोड़ टन सालाना से अधिक है। कंपनी का लक्ष्य भविष्य में इसे बढ़ाकर पांच करोड़ टन सालाना से अधिक करने की है। भारत में कंपनी की उत्पादन क्षमता 2.73 करोड़ टन है। कंपनी इसमें 1.2 करोड़ टन की बढ़ोतरी करना चाहती है।
कंपनी के पास जमशेदपुर में 1.1 करोड़ टन सालाना क्षमता वाले संयंत्र का स्वामित्व एवं परिचालन है। इसके अलावा झारखंड के गमहरिया में भी कंपनी का 10 लाख टन क्षमता का संयंत्र है। ओडिशा के कलिंगनगर में कंपनी के पास 90 लाख टन की उत्पादन क्षमता है। इसमें नीलांचल इस्पात निगम लिमिटेड (एनआईएनएल) की क्षमता भी शामिल है। कंपनी ने एनआईएनएल का अधिग्रहण दिवाला प्रक्रिया के तहत किया था। टाटा स्टील ओडिशा के मेरामंडाली में 56 लाख टन सालाना क्षमता का संयंत्र भी संचालित करती है।
इसके अलावा कंपनी लॉयड मेटल्स एंड एनर्जी के साथ मिलकर गढ़चिरौली लौह अयस्क क्षेत्र के विकास और 60 लाख टन क्षमता वाले नए इस्पात संयंत्र की संभावनाओं पर भी काम कर रही है।
इस निवेश को कंपनी की भारत-केंद्रित विकास रणनीति, बढ़ती इस्पात मांग और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भाषा अजय अजय
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