केरल में भारी बारिश का दौर जारी, 11 ज़िलों में 'येलो अलर्ट'
दिलीप
- 04 Jul 2026, 10:07 PM
- Updated: 10:07 PM
तिरुवनंतपुरम, चार जुलाई (भाषा) केरल के कई हिस्सों में शनिवार को तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हुई, जिससे नदियों और बांधों में जलस्तर बढ़ गया, निचले इलाकों में पानी भर गया और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। इसके कारण अधिकारियों को पूरे राज्य में अलर्ट जारी कर एहतियाती कदम उठाने पड़े।
पलक्कड जिले में भारी बारिश के कारण दो घरों की चारदीवारी गिर गईं, जबकि कोझिकोड के उत्तरी हिस्सों, खासकर ऊंचे पहाड़ी इलाकों में जोरदार बारिश हुई।
अधिकारियों ने बताया कि इडुक्की जिले में, डूब क्षेत्र में भारी बारिश के कारण जलाशय का जलस्तर बढ़ने पर एहतियात के तौर पर पाम्बला बांध के शटर खोल दिए गए।
पेरियार नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई, जबकि अधिकारियों को सभी जरूरी सुरक्षा उपाय करने के निर्देश दिए गए।
इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने शनिवार को पत्तनमथिट्टा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्णाकुलम, त्रिशूर, पलक्कड, मलप्पुरम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया, जिसमें गरज के साथ अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
आईएमडी के अनुसार, अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश का मतलब है 24 घंटे की अवधि में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी के बीच बारिश होना।
भारतीय राष्ट्रीय महासागर सूचना सेवा केंद्र (आईएनसीओआईएस) ने कोझिकोड, कन्नूर और कासरगोड जिलों के तटीय इलाकों के लिए रविवार रात 11:30 बजे तक ऊंची लहरों और समुद्र के कटाव की चेतावनी भी जारी की।
एजेंसी ने कहा कि 2.9 मीटर से 3.5 मीटर ऊंची लहरों के तट से टकराने की आशंका है। उसने मछुआरों तथा तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को बहुत सावधानी बरतने की सलाह दी।
अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि अगर निर्देश मिले, तो वे समुद्र के किनारे वाले जोखिम भरे इलाकों से हट जाएं, समुद्र में छोटी नावें न उतारें, तटों पर जाने और समुद्र से जुड़ी अनावश्यक गतिविधियों से बचें, और यह सुनिश्चित करें कि चेतावनी हटने तक मछली पकड़ने वाली नावें बंदरगाहों पर सुरक्षित रूप से बंधी हों।
केरल राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (केएसडीएमए) ने चेतावनी दी है कि भारी बारिश के कारण मुख्य सड़कों पर जल-जमाव हो सकता है, कम दृश्यता से यातायात प्रभावित हो सकता है, निचले इलाकों और नदी के किनारों पर बाढ़ आ सकती है, पेड़ उखड़ने से बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है, घरों और झोपड़ियों को आंशिक नुकसान हो सकता है, और भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
प्राधिकरण ने यह भी चेतावनी दी कि खराब मौसम का असर तट के पास रहने वाले लोगों, मवेशियों और असुरक्षित ढांचों पर पड़ सकता है।
केएसडीएमए ने भूस्खलन और अचानक बाढ़ की आशंका वाले इलाकों में रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे स्थानीय अधिकारियों के निर्देशानुसार सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। नदियों के किनारे और बांधों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने और निर्देश मिलने पर राहत शिविरों में जाने की सलाह दी गई है।
भाषा प्रशांत दिलीप
दिलीप
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