जम्मू-कश्मीर में पुस्तक पर विवाद : भाजपा ने शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने, कांग्रेस ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की
प्रशांत
- 04 Jul 2026, 07:58 PM
- Updated: 07:58 PM
जम्मू, चार जुलाई (भाषा) जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में कथित तौर पर आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन करने वाली पुस्तक वितरित किए जाने को लेकर सियासत गरमा गई है। भाजपा ने पुस्तक पर तत्काल प्रतिबंध और शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू को बर्खास्त करने की मांग की है, जबकि कांग्रेस ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है।
कांग्रेस ने शनिवार को समग्र शिक्षा मिशन के तहत जम्मू कश्मीर के सरकारी स्कूलों में कथित तौर पर अलगाववादी नेताओं और आतंकवादियों का महिमामंडन करने वाली विवादित पुस्तक वितरित किए जाने के मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।
जम्मू कश्मीर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (जेकेपीसीसी) ने ''पर्सनैलिटीज एंड लेजेंड्स ऑफ जेएंडके'' शीर्षक वाली पुस्तक पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की।
जेकेपीसीसी के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा ने यहां जारी एक बयान में कहा, ''ऐसे कृत्य के लिए कोई जगह नहीं है…...यदि इस पुस्तक में, जैसा कि पता चल रहा है, आपत्तिजनक सामग्री है, तो यह पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच करायी जानी चाहिए कि किन लोगों ने इस पुस्तक को स्कूलों और सरकारी संस्थानों तक पहुंचाने की अनुमति दी।''
उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ''इस पुस्तक के प्रकाशन के पीछे की साजिश का पर्दाफाश होना चाहिए।''
अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारूक और शब्बीर शाह का उल्लेख करते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान का विरोध करने वालों का महिमामंडन नहीं किया जा सकता और न ही उन्हें नायक के रूप में प्रस्तुत करने की अनुमति दी जा सकती।
वहीं, भाजपा ने इस किताब पर तत्काल प्रतिबंध लगाने और जम्मू कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू को बर्खास्त करने की मांग की।
जम्मू कश्मीर विधानसभा में विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस मामले को केवल शैक्षणिक चूक नहीं, बल्कि आपराधिक मामला बताते हुए आरोप लगाया कि यह ''शैक्षणिक जिहाद'' का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था का इस्तेमाल कर पाकिस्तान प्रायोजित विमर्श को बढ़ावा देना और युवाओं के मन में अलगाववाद का जहर घोलना है।
उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि यह पुस्तक समग्र शिक्षा अभियान के तहत सरकारी स्कूलों के पुस्तकालयों में वितरित की गई है।
शर्मा ने आरोप लगाया कि पुस्तक में फांसी पाए जम्मू कश्मीर लिबरेश्न फ्रंट (जेकेएलएफ) संस्थापक मकबूल भट, लश्कर-ए-तैयबा प्रमुख हाफिज सईद तथा अलगाववादी नेताओं सैयद अली शाह गिलानी, शब्बीर शाह, मीरवाइज उमर फारूक और मसरत आलम भट को सकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने इस बात पर भी आपत्ति जताई कि पुस्तक में जम्मू कश्मीर को ''भारत के कब्जे वाला क्षेत्र'' जैसे शब्दों से संबोधित किया गया है।
भाजपा नेता ने कहा, ''जम्मू कश्मीर शिक्षा विभाग और जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा केंद्रशासित प्रदेश के अनेक पुस्तकालयों में वितरित इस पुस्तक में दोषियों, हत्यारों, आतंकवादियों, अलगाववादियों और पत्थरबाजों का महिमामंडन किया गया है।''
शर्मा ने सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस पर अलगाववादी विमर्श को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर शिक्षा विभाग की प्रभारी मंत्री को तत्काल पद से हटाया जाना चाहिए और इस मामले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए जाने चाहिए।
इस तरह के प्रकाशनों के खिलाफ भाजपा के पूर्व अभियानों का उल्लेख करते हुए शर्मा ने कहा कि उनकी पार्टी पहले भी भारत की संप्रभुता के खिलाफ कथित सामग्री वाली 25 पुस्तकों पर प्रतिबंध लगवाने में सफल रही थी। उन्होंने सरकार और जांच एजेंसियों से मौजूदा पुस्तक के खिलाफ भी तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
भाषा गोला प्रशांत
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0407 1958 जम्मू