मणिपुर: भाजपा विधायक वाल्ते के अंतिम संस्कार में शामिल हुए मुख्यमंत्री खेमचंद
शोभना
- 04 Jul 2026, 02:23 PM
- Updated: 02:23 PM
इंफाल, चार जुलाई (भाषा) मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह शनिवार को चुराचांदपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व विधायक वुंगजागिन वाल्ते के अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें इस बात का अफसोस है कि जब राज्य की राजधानी में एक उग्र भीड़ ने नेता पर हमला किया था, तब वह उनके साथ नहीं थे।
मुख्यमंत्री कुकी संगठनों के विरोध के बीच हेलीकॉप्टर से कुकी-ज़ोमी बहुल जिले के दौरे पर पहुंचे थे। कम से कम छह कुकी संगठनों ने राज्य में जारी जातीय संघर्ष के स्थायी समाधान की मांग को लेकर सिंह के इस दौरे का बहिष्कार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा, "आज केंद्रीय गृह मंत्री के साथ मेरी एक (वर्चुअल) बैठक थी, इसी वजह से मैं सड़क मार्ग से नहीं आ सका।"
वाल्ते को एक "बेहद शांत स्वभाव का व्यक्ति" बताते हुए सिंह ने कहा, "जब मैं पहली बार (2017 में) विधायक चुना गया और विधानसभा अध्यक्ष बना, तब वे मेरे सबसे अच्छे दोस्तों में से एक थे।"
उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मुझे आज भी चार मई (2023) की वह घटना अच्छी तरह याद है। हम सभी एक साथ बैठकर हिंसा को नियंत्रित करने पर चर्चा कर रहे थे... अगर मैं उस शाम उनके साथ होता, तो वह घटना कभी नहीं होती।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन मई की शाम को "उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने कहा था कि वह कांगपोकपी वापस जाना चाहती हैं। मैंने भीड़ की हिंसा का हवाला देते हुए उन्हें रुकने के लिए मनाया। देर रात दो बजे उन्हें पूरी सुरक्षा के साथ वापस भेजा गया।"
सिंह ने कहा, "आज मैं यहां अपने मित्र पु वाल्ते को अंतिम विदाई देने आया हूं। इसमें शामिल होना मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात है। वाल्ते का परिवार मेरे परिवार जैसा है। उनके मित्र और करीबी मेरे भी मित्र हैं। मैं हमेशा उन सभी को हर संभव सहायता प्रदान करूंगा।"
ज़ोमी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले और थानलोन निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार विधायक रहे 61 वर्षीय भाजपा नेता वुंगजागिन वाल्ते मई 2023 में इम्फाल में एक उग्र भीड़ के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। लंबे इलाज के बाद इस वर्ष 20 फरवरी को गुरुग्राम के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया था।
समुदाय के सूत्रों के अनुसार, विधायक की मौत के बाद ज़ोमी समुदाय के विभिन्न अग्रणी संगठनों ने 'ज़ोमी कोऑर्डिनेशन कमेटी' का गठन किया। इस समिति को विधायक से जुड़े सभी मामलों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिसमें न्याय और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ संवाद करना भी शामिल था। इसी प्रक्रिया के कारण उनके अंतिम संस्कार में देरी हुई।
भाषा सुमित शोभना
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