सीबीआई ने वित्तीय धोखाधड़ी में एसटीसी के पूर्व सीएमडी व केएस ऑयल्स के खिलाफ मामला दर्ज किया
पवनेश
- 03 Jul 2026, 09:35 PM
- Updated: 09:35 PM
नयी दिल्ली, तीन जुलाई (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने वर्ष 2010 से 2014 के बीच सरसों तेल की खरीद के लिए 75 करोड़ रुपये का व्यापार वित्तपोषण उपलब्ध कराने में कथित अनियमितताओं के मामले में 'स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन' (एसटीसी) के पूर्व सीएमडी, छह पूर्व अधिकारियों और केएस ऑयल्स लिमिटेड (केएसओएल) के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
प्राथमिकी के अनुसार, सीबीआई का आरोप है कि एसटीसी ने उचित जांच-पड़ताल किए बिना केएसओएल को व्यापार वित्तपोषण उपलब्ध कराया। साथ ही, स्वीकृत सीमा से अधिक लेटर ऑफ क्रेडिट (एलसी) जारी किए गए। सरसों तेल के आपूर्तिकर्ताओं के रूप में फर्जी और मुखौटा कंपनियों का इस्तेमाल किया गया तथा एलसी से प्राप्त राशि वापस कंपनी तक पहुंचा दी गई।
एजेंसी ने एक साल से अधिक समय तक चली शुरुआती जांच के बाद दर्ज की गई प्राथमिकी में कहा कि भंडारण की गुणवत्ता से जुड़ा गलत प्रमाणपत्र जारी किया गया और समय पर वसूली की कार्रवाई नहीं की गई, जिससे एसटीसी को अनुचित वित्तीय नुकसान हुआ और आरोपी लोगों और कंपनियों को अनुचित लाभ मिला।
इसमें कहा गया है कि केएसओएल के अध्यक्ष रमेश चंद गर्ग और निदेशक दावेश अग्रवाल ने सरसों के तेल की खरीद के लिए व्यापारिक वित्त हासिल करने के वास्ते एसटीसी से संपर्क किया था।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है, ''इस व्यवस्था में केएसओएल कारोबारी भागीदार था, जिसे सरसों के तेल की आपूर्ति के लिए आपूर्तिकर्ता की पहचान/नाम तय करना था, एसटीसी को ऐसे आपूर्तिकर्ता के पक्ष में अवधि-आधारित 'लेटर ऑफ क्रेडिट' जारी करके व्यापार के लिए वित्त प्रदान करना था; आपूर्तिकर्ता को सरसों तेल की आपूर्ति करनी थी; और स्टार एग्री वेयरहाउस एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड को एसटीसी की ओर से सरसों तेल के खेप की प्राप्ति, भंडारण, गुणवत्ता प्रमाणपत्र और निगरानी के लिए गिरवी संपत्ति (कोलेटरल) प्रबंधन एजेंसी के तौर पर नियुक्त किया गया था।''
सीबीआई को व्यापारिक वित्त के प्रस्ताव को मंजूरी देने और उसे लागू करने की प्रक्रिया में कई गड़बड़ियां मिलीं।
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है, ''जांच में यह भी पता चला कि दोनों आपूर्तिकर्ता कंपनियां - चंबल वैली एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और ग्वालियर कमोडिटीज़ प्राइवेट लिमिटेड - मुखौटा कंपनियां थीं, जिन्हें रमेश चंद गर्ग और दावेश अग्रवाल नियंत्रित कर रहे थे।''
प्राथमिकी के मुताबिक, सीबीआई ने पाया कि अग्रवाल ने इन कंपनियों में निदेशक और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नियुक्त कराए और खाली चेक और कागजात पर हस्ताक्षर करवाए, जिससे एलसी से मिली रकम को केएसओएल तक पहुंचाने में आसानी हुई।
भाषा संतोष पवनेश
पवनेश
0307 2135 दिल्ली