भारत-जापान संबंधों का निशाना कोई तीसरा पक्ष नहीं होना चाहिए: चीन
माधव
- 03 Jul 2026, 05:44 PM
- Updated: 05:44 PM
(केजीएम वर्मा)
बीजिंग, तीन जुलाई (भाषा) चीन ने शुक्रवार को कहा कि देशों के बीच आपसी सहयोग का मकसद किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाना या किसी दूसरे देश के हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए।
यह बयान जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के दिल्ली दौरे के दौरान भारत और जापान द्वारा कई अहम पहल शुरू किए जाने के एक दिन बाद आया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ''देशों के बीच सहयोग ऐसा होना चाहिए जिससे क्षेत्रीय देशों के बीच समझ और भरोसा बढ़े और क्षेत्र में शांति व स्थिरता बनी रहे।''
वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री के बीच बातचीत के बाद आपूर्ति शृंखला को मजबूत करने के लिए अहम खनिजों पर भारत और जापान के बीच सहयोग से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे।
गुओ ने कहा, ''इस तरह के सहयोग का मकसद किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाना या उसके हितों को नुकसान पहुंचाना नहीं होना चाहिए और न ही इसका इस्तेमाल खास छोटे समूह बनाने या बंटवारा और टकराव पैदा करने के बहाने के तौर पर किया जाना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''वैश्विक औद्योगिक और आपूर्ति शृंखला को सुरक्षित और स्थिर रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। सभी पक्षों को खुलेपन और सहयोग को बढ़ावा देना चाहिए और इस प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभानी चाहिए।''
मोदी और सनाए तकाइची के बीच शिखर वार्ता के बाद बृहस्पतिवार को भारत और जापान ने कई अहम पहल की घोषणा की। इनमें आर्थिक साझेदारी का एक प्रारूप, सैन्य हार्डवेयर का मिलकर विकास करने के लिए रक्षा समझौता और तेल की कीमतों में अचानक उछाल (ऑयल शॉक) से निपटने के लिए ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के कदम शामिल हैं।
एक संयुक्त बयान के अनुसार, उन्होंने पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर 'गहरी चिंता' भी जताई। उन्होंने आवाजाही की स्वतंत्रता को खतरे में डालने वाले एकतरफा कदमों और ताकत के दम पर यथास्थिति बदलने की कोशिशों का विरोध किया।
जापानी प्रधानमंत्री की भारत यात्रा पर बीजिंग की पैनी नजर थी, क्योंकि नवंबर 2025 में ताकाइची के उस बयान के बाद जापान और चीन के संबंध कई सालों में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो जापान जवाब दे सकता है।
चीन, ताइवान (एक स्वशासित द्वीप) को अपना एक प्रांत मानता है और जरूरत पड़ने पर उसे ताकत के दम पर अपने नियंत्रण में लाना चाहता है। उनके बयानों पर चीन ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
चीन ने अपने व्यापारिक हितों को बढ़ाने के लिए जापान, अमेरिका, भारत और कई अन्य देशों को 'रेयर अर्थ मिनरल्स' (दुर्लभ मृदा खनिज) के निर्यात को लेकर सख्ती बरत रहा है।
दुनिया भर में 'दुर्लभ मृदा तत्व' के खनन में चीन की हिस्सेदारी लगभग 70 प्रतिशत है और इसके प्रसंस्करण में उसकी हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है।
भाषा संतोष माधव
माधव
0307 1744 बीजिंग