छत्तीसगढ़ के कांकेर में बाघ की खाल के साथ महाराष्ट्र के दो पुलिसकर्मी गिरफ्तार
रंजन
- 01 Jul 2026, 03:24 PM
- Updated: 03:24 PM
रायपुर, एक जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में वन विभाग ने बाघ के खाल की तस्करी करने के आरोप में बुधवार को महाराष्ट्र पुलिस के दो कर्मचारियों को गिरफ्तार किया और उनसे दो खाल जब्त किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के वनमंडल अधिकारी एस नवीनकुमार ने पीटीआई—भाषा को फोन पर बताया कि आरोपियों की पहचान बाबूराव मडावी और बिजेश्वर गेडम के तौर पर हुई है।
उन्हें सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ सीमा पर पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल के बांदे इलाके में पकड़ा गया। इस दौरान वह कथित तौर पर मोटरसाइकिल पर बाघ की खाल ले जा रहे थे।
उन्होंने बताया कि यह अभियान छत्तीसगढ़ में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग इकाई, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की केंद्रीय और पश्चिम क्षेत्र इकाई, राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वाड और पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल ने मिलकर चलाया था।
अधिकारियों ने बताया कि पश्चिम भानुप्रतापपुर वनमंडल की पश्चिम परलकोट प्रभाग में वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम से संबंधित प्रावधानों के तहत वन्यजीव अपराध का मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के अहेरी के रहने वाले गेडम से मिली जानकारी के आधार पर वन अधिकारियों ने उसके घर की तलाशी ली और बड़ी मात्रा में पैंगोलिन के शल्क बरामद किए। इससे पता चलता है कि आरोपी अनुसूची-एक के वन्यजीव प्रजातियों की संगठित तस्करी में कथित तौर पर शामिल था।
शुरुआती जांच से पता चला है कि दोनों आरोपी, जो महाराष्ट्र पुलिस में कार्यरत हैं, कथित तौर पर अंतर-राज्यीय अवैध शिकार नेटवर्क में बिचौलिये का काम कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि इसमें शामिल अवैध शिकारियों की पहचान करने और उन्हें पकड़ने की कोशिशें जारी हैं।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप निदेशक वरुण जैन ने कहा कि शुरुआती जांच से संकेत मिलता है कि बाघों का अवैध शिकार बस्तर क्षेत्र के इंद्रावती टाइगर रिजर्व-अबूझमाड़ इलाके से किया गया था, जो मध्य भारत में बाघों के सबसे महत्वपूर्ण आवासों में से एक है।
उन्होंने बताया कि यह अभियान 'ऑपरेशन सेफ पैसेज' का हिस्सा था। यह एक ऐसा पहल है जिसका मकसद लगभग चार सौ किलोमीटर लंबे उस वन्यजीव गलियारे को सुरक्षित करना है जो महाराष्ट्र के गढ़चिरौली के जंगलों को इंद्रावती टाइगर रिजर्व, अबूझमाड़, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और उड़ीसा के सुनाबेड़ा वन्यजीव अभयारण्य से जोड़ता है।
जैन ने कहा कि यह गलियारा महाराष्ट्र से छत्तीसगढ़ में बाघों के फैलने के लिए बहुत जरूरी है और यह एशियाई हाथियों, भारतीय गौर, जंगली भैंसों और कई अन्य जंगली जानवरों की प्रजातियों के बीच लंबे समय तक जेनेटिक कनेक्टिविटी बनाए रखने में भी मदद करता है।
उन्होंने बताया कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग इकाई ने 2023 में भी इसी तरह के अंतर-राज्यीय अभियान किए थे, जिनमें कई शिकारियों को गिरफ्तार किया गया और बाघ की दो खालें जब्त की गईं। साथ ही, इस साल अप्रैल में अबूझमाड़ इलाके में नौ भारतीय विशाल गिलहरियों (इंडियन जायंट स्क्विरल) के शिकार के आरोपी एक शिकारी को गिरफ्तार किया गया था।
जैन ने बताया कि यह अभियान संगठित वन्यजीव अपराध से निपटने और मध्य भारत के अहम वन्यजीव गलियारे की सुरक्षा में खुफिया जानकारी पर आधारित, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल की असरदार भूमिका को दिखाता है।
भाषा संजीव पवनेश रंजन
रंजन
0107 1524 रायपुर