बाघ संरक्षण से वन, जलस्रोत और जैव विविधता भी सुरक्षित होती है: भूपेंद्र यादव
खारी
- 28 Jun 2026, 07:52 PM
- Updated: 07:52 PM
जयपुर, 28 जून (भाषा) केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे वन, जलस्रोत और समृद्ध जैव विविधता का भी संरक्षण होता है।
यादव ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है।
यादव ने अलवर में 'बाघों के पुनर्वास : अवसर और चुनौतियां' विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने बाघ संरक्षण तथा 'प्रोजेक्ट चीता' से संबंधित तीन प्रकाशनों का भी विमोचन किया।
उन्होंने कहा कि बाघों का संरक्षण उन प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा से भी जुड़ा है, जिनमें वन, जलस्रोत और समृद्ध जैव विविधता शामिल हैं।
केंद्रीय मंत्री ने सरिस्का बाघ पुनर्वास कार्यक्रम को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह दुनिया का पहला सफल वैज्ञानिक बाघ पुनर्वास कार्यक्रम है, जिसके तहत उस क्षेत्र में बाघों को फिर से बसाया गया, जहां यह प्रजाति स्थानीय स्तर पर विलुप्त हो चुकी थी।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक प्रबंधन, समर्पित संरक्षण प्रयासों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी के कारण यह कार्यक्रम वैश्विक स्तर पर प्रजातियों के पुनर्वास का सफल उदाहरण बन गया है।
यादव ने कहा कि 2005 में स्थानीय स्तर पर बाघों के विलुप्त हो जाने के बाद सरिस्का ने उल्लेखनीय पुनरुत्थान किया है और आज वहां 56 बाघ हैं।
देश में बाघ संरक्षण की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में बाघ अभ्यारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने 2022 तक जंगलों में बाघों की संख्या दोगुनी करने के सेंट पीटर्सबर्ग घोषणा के लक्ष्य को सफलतापूर्वक हासिल कर लिया है।
यादव ने कहा कि पन्ना और सरिस्का में बाघों का सफल पुनर्वास स्थानीय समुदायों के सहयोग और सक्रिय भागीदारी के कारण संभव हो सका।
उन्होंने कहा कि ओडिशा के सतकोसिया बाघ अभयारण्य में सामुदायिक सहयोग का अपेक्षित स्तर नहीं मिलने के कारण ऐसी सफलता नहीं मिल सकी।
उन्होंने 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता में भी स्थानीय समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख किया।
आधिकारिक बयान के अनुसार, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) ने पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय तथा राजस्थान सरकार के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें देश के विभिन्न बाघ अभ्यारण्यों के क्षेत्रीय निदेशक, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यशाला में बाघों के पुनर्वास और सक्रिय प्रबंधन के लिए विज्ञान-आधारित रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।
यह कार्यशाला सरिस्का बाघ अभयारण्य में बाघों के पुनर्वास के 18 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित की गई।
इस अवसर पर यादव ने 'भारत में बाघों के सक्रिय प्रबंधन का रोडमैप', 'भारत में बाघ संरक्षण एवं पुनर्वास' विषयक पुस्तिका तथा 'प्रोजेक्ट चीता' की वार्षिक रिपोर्ट (सितंबर 2024-दिसंबर 2025) का विमोचन किया।
भाषा पृथ्वी खारी
खारी
2806 1952 जयपुर