छत्तीसगढ़: धमतरी के 250 किसानों ने 250 टन हल्दी उत्पादन का लक्ष्य रखा
संतोष
- 27 Jun 2026, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
रायपुर, 27 जून (भाषा) छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले का आदिवासी-बहुल नगरी इलाका, जो कभी माओवादी गतिविधियों से प्रभावित था, अब राज्य सरकार की फसल विविधीकरण पहल के तहत हल्दी की खेती के केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी और कहा कि इस पहल का मकसद किसानों की आय बढ़ाना है।
अधिकारियों ने बताया कि 'नगरी' विकासखंड में 250 किसानों ने आगामी मौसम तक 250 टन हल्दी उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने बताया कि धमतरी जिले का आदिवासी बहुल नगरी विकासखंड अब पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर हल्दी उत्पादन की ओर कदम बढ़ा चुका है।
कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने और वनांचल के किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए यहां हल्दी की वैज्ञानिक खेती की एक बड़ी और महत्वाकांक्षी शुरुआत की गई है।
इस मुहिम के तहत नगरी और मगरलोड क्षेत्र के 250 किसानों ने 10 टन उच्च गुणवत्तायुक्त हल्दी बीज (राइजोम) की बुवाई कर आगामी मौसम में 250 टन बंपर उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
अधिकारियों ने बताया कि जिला प्रशासन की इस पहल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि किसानों को सिर्फ फसल उगाने तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि 'उत्पादन–प्रसंस्करण–ब्रांडिंग–विपणन' की एक सशक्त मूल्य श्रृंखला से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कलेक्टर के मार्गदर्शन में जिला पंचायत धमतरी, जनपद पंचायत नगरी और 'प्रदान' संस्था के संयुक्त त्रिकोणीय सहयोग से ग्रामीण स्तर पर यह ढांचा तैयार किया गया है।
इसके तहत व्यवस्था को बेहद संगठित रूप दिया गया है। 'गट्टासिल्ली किसान उत्पादक कंपनी' (एफपीसी) के माध्यम से किसानों को उन्नत किस्म का बीज उपलब्ध कराया गया है।
कच्चे माल को सीधे औने-पौने दामों में बेचने के बजाय, जिला पंचायत द्वारा ग्राम कोर्रेमुडा में एक अत्याधुनिक हल्दी प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है।
यहां 'हरिभूमि किसान उत्पादक संगठन' के जरिए हल्दी का पाउडर और अन्य मूल्य संवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
तैयार हल्दी पाउडर को आकर्षक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के साथ 'गट्टासिल्ली एफपीसी' द्वारा सीधे बाजार में उतारा जाएगा, जिससे बिचौलियों का खात्मा होगा और किसानों को सीधा मुनाफा मिलेगा।
अधिकारियों ने बताया कि इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए ग्राम पंचायत झुझरकस्सा के आश्रित कोर्रेमुडा गांव में एक दिवसीय वृहद तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें नगरी और मगरलोड विकासखंड के कृषि मित्रों और पीआरपी (पीआरपी) ने हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया कि इस दौरान विशेषज्ञों ने भूमि सुधार, रोगमुक्त राइजोम चयन, बीज उपचार और संतुलित पोषण प्रबंधन की बारिकियां सिखाईं।
लगभग 270 दिनों की इस फसल के दौरान कृषि मित्र हर चरण में किसानों के खेतों में जाकर तकनीकी मार्गदर्शन देंगे, ताकि उत्पाद की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
अधिकारियों ने बताया कि नगरी विकासखंड का एक बड़ा हिस्सा पथरीली या ऊपरी भूमि के अंतर्गत आता है, जहां धान की खेती उतनी लाभदायक नहीं होती।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह भूमि हल्दी जैसी नकदी फसलों के लिए बेहद उपयुक्त है।
इस नई पहल से न केवल अनुपयोगी समझी जाने वाली जमीन का बेहतर उपयोग होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने बताया कि यह समन्वित प्रयास आने वाले वर्षों में धमतरी के नगरी क्षेत्र को राज्य के नक्शे पर हल्दी उत्पादन और मूल्य संवर्धन के एक बड़े कृषि-उद्यमिता केंद्र के रूप में स्थापित करने में मील का पत्थर साबित होगा।
भाषा संजीव
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