राम मंदिर दान कथित गबन मामला: आठों आरोपी 29 जून तक न्यायिक हिरासत में, सियासी घमासान तेज
राजकुमार
- 26 Jun 2026, 11:16 PM
- Updated: 11:16 PM
अयोध्या/लखनऊ, 26 जून (भाषा) अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान के कथित गबन के मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को शुक्रवार को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इस बीच, उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
जांचकर्ता ने आरोपियों के पास से अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद करने का दावा किया है।
इस बीच, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के इस्तीफे की अटकलों के बीच विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने कहा कि उसे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। चंपत राय विहिप के उपाध्यक्ष भी हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस मामले को 'धर्मयुद्ध' करार देते हुए कथित 'चंदा चोरों' के सामाजिक बहिष्कार की अपील की और कहा कि इससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा का ''लंकाकांड'' अयोध्या से शुरू हो गया है। कांग्रेस ने मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराने और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह पूरा विवाद सपा और कांग्रेस की साजिश का हिस्सा है।
यह प्राथमिकी ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज की गई। इसे उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक रिपोर्ट की सिफारिशों के आधार पर दर्ज किया गया। सात जून को कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद एसआईटी का गठन किया गया था।
गिरफ्तार आठों आरोपी-- अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, राम शंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामाशंकर उर्फ टिन्नू यादव मंदिर में प्राप्त नकद दान और कीमती सामान की गणना की प्रक्रिया से जुड़े थे।
अयोध्या के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) गौरव ग्रोवर ने बताया कि आरोपियों को बृहस्पतिवार देर रात गिरफ्तार किया गया।
सरकारी वकील के अनुसार, उन्हें विशेष रिमांड मजिस्ट्रेट निवेदिता सिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां से 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
अभियोजन अधिकारी के सी वर्मा ने बताया कि जांच के दौरान अब तक 79.85 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर लोक सेवकों द्वारा विश्वास का आपराधिक उल्लंघन और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में पांच-छह बैंक कर्मचारी हैं, जिन्हें मंदिर में प्राप्त दान की गणना के लिए तैनात किया गया था। टिन्नू यादव चालक के रूप में कार्यरत था, जबकि सुभाष श्रीवास्तव नकदी गणना प्रक्रिया का प्रभारी था।
पुलिस सोमवार को आरोपियों को दोबारा अदालत में पेश किए जाने पर उनकी पुलिस रिमांड की मांग कर सकती है।
मामला भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की चोरी, चोरी की संपत्ति रखने, आपराधिक साजिश समेत विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
मुख्यमंत्री ने देवरिया में कहा कि एसआईटी की रिपोर्ट मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल अयोध्या को बदनाम करने और लोगों की आस्था से खिलवाड़ करने का प्रयास कर रहे हैं।
योगी ने जांच पूरी होने तक राजनीतिक बयानबाजी से बचने की अपील की और कहा कि सनातन धर्म की आस्था के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। उन्होंने केजरीवाल की टिप्पणियों पर भी निशाना साधा।
राम मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद केजरीवाल ने संवाददाताओं से बातचीत में इस मामले को ''धर्मयुद्ध'' बताते हुए आरोप लगाया कि भगवान राम के मंदिर में ''महाडकैती'' हुई है।
उन्होंने प्राथमिकी और एसआईटी जांच को ''फर्जी'' बताते हुए आरोप लगाया कि केवल ''छोटे कर्मचारियों'' को आरोपी बनाया गया है, जबकि प्रभावशाली लोगों को बचाया जा रहा है।
उन्होंने कथित आरोपियों के सामाजिक बहिष्कार की अपील करते हुए कहा कि जब तक दोषियों को ''सार्वजनिक रूप से फांसी'' नहीं दी जाती, तब तक वह शांत नहीं बैठेंगे।
उन्होंने मंदिर का प्रबंधन राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के बजाय संत-महात्माओं को सौंपने की भी मांग की।
केजरीवाल ने कहा, ''जो लोग भगवान राम के नाम पर सत्ता में आए हैं, अब भगवान राम ही उन्हें सत्ता से बाहर करेंगे।''
उन्होंने दावा किया कि इस पूरे प्रकरण से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं।
सपा अध्यक्ष ने 'एक्स' पर कई पोस्ट कर नकदी, आभूषण और दान की गणना में बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि भाजपा का ''लंकाकांड'' अयोध्या में ही होगा।
उन्होंने सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इस विवाद ने सत्ता पक्ष के भीतर भ्रष्टाचार को उजागर कर दिया है।
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी केवल 'दिखावा' है, क्योंकि इसमें चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा समेत ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं की गई है।
नयी दिल्ली में कांग्रेस ने कथित गबन की जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराने तथा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग करने की मांग की।
कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि प्राथमिकी में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों को नामजद किया गया है, जबकि शीर्ष पदों पर बैठे लोगों को बचाया गया है।
उन्होंने कहा कि केवल उच्चतम न्यायालय के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र जांच ही कथित 'मंदिर लूट' की पूरी सच्चाई सामने ला सकती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने भी ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग करते हुए कहा कि इसमें राजनीतिक व्यक्तियों के बजाय संतों और धार्मिक नेताओं को शामिल किया जाना चाहिए।
संभल में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्राथमिकी पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल नोट गिनने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, जबकि 'इतनी बड़ी चोरी' प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता के बिना संभव नहीं थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट का गठन धार्मिक नेताओं के बजाय राजनीतिक रूप से चुने गए लोगों से किया गया है । उन्होंने भाजपा के हिंदुत्व को ''फर्जी'' बताया।
मिर्जापुर में उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा सरकार भ्रष्टाचार के प्रति 'कतई न बर्दाश्त करने' की नीति पर काम कर रही है और पुलिस निष्पक्ष जांच करेगी।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बाबरी मस्जिद के लिए एकत्र किए गए चंदे का हिसाब कोई क्यों नहीं पूछता।
चंपत राय और अनिल मिश्रा के नैतिक आधार पर इस्तीफे की अटकलों के बीच विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि संगठन को ऐसे किसी इस्तीफे की जानकारी नहीं है।
विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार ने पुष्टि की कि संगठन के वरिष्ठ नेताओं की अयोध्या में बैठक हुई थी, लेकिन उन्होंने बैठक के विवरण की जानकारी होने से इनकार किया। ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव ने भी कहा कि उन्हें किसी इस्तीफे की जानकारी नहीं है।
लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर किया गया था। एसआईटी ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी।
वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट में ''गंभीर'' निष्कर्ष सामने आए हैं और अब जांच उसी के आधार पर आगे बढ़ाई जाएगी।
भाषा आनंद मनीष जफर किशोर चंदन रवि कांत राजकुमार
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