समझते हैं कि भारत में कैसे तय होती है नागरिकता
अविनाश
- 25 Jun 2026, 09:08 PM
- Updated: 09:08 PM
नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) पासपोर्ट के नागरिकता का सबूत नहीं होने संबंधी विदेश मंत्रालय के स्पष्टीकरण ने नागरिकों को यह साबित करने के लिए एक ही दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले कानूनी ढांचे की जरूरत को एक बार फिर सामने ला दिया है कि वे भारतीय हैं।
अभी तक ऐसा कोई एक दस्तावेज नहीं है, चाहे वह आधार हो, मतदाता पहचान पत्र हो या पासपोर्ट, जो भारत में नागरिकता के पुख्ता कानूनी प्रमाण के तौर पर काम करे।
सरकारी सूत्रों ने बृहस्पतिवार को कहा कि पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का सबूत नहीं रहा है और नरेन्द्र मोदी सरकार ने पिछले 12 सालों में इस दस्तावेज को लेकर कोई नया फैसला नहीं लिया है।
मीडिया में विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण कि पासपोर्ट यात्रा का दस्तावेज है, न कि नागरिकता का सबूत पर सूत्रों ने कहा कि बुधवार को यह तय नहीं किया गया था कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है।
ऐसे में जानते हैं कि भारत में नागरिकता कैसे तय होती है।
1) नागरिकता क्या है?
नागरिकता एक कानूनी दर्जा है जो किसी व्यक्ति के जन्म के समय, माता-पिता की स्थिति और समय-समय पर सरकार द्वारा जारी किए गए नागरिक रिकॉर्ड के आधार पर साबित होता है।
2)आम सरकारी पहचान पत्र क्यों मान्य नहीं होते?
न्यायिक नजीरें यह स्पष्ट करती हैं कि भारत के सबसे आम पहचान-पत्रों को नागरिकता के अकेले सबूत के तौर पर कानूनी रूप से मान्यता नहीं दी गई है।
अ) पासपोर्ट
पासपोर्ट हालांकि मुख्य रूप से नागरिकों को जारी किए जाते हैं और इनकी कड़ी जांच-पड़ताल होती है, फिर भी पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 सरकार को खास मामलों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी करने की इजाजत देती है। इसलिए, अदालतें इसे एक मजबूत सबूत तो मानती हैं, लेकिन कानूनी तौर पर पुख्ता सबूत नहीं।
ब) आधार कार्ड
उच्चतम न्यायालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) का साफ तौर पर कहना है कि आधार निवास और पहचान का सबूत है, न कि नागरिकता का, क्योंकि जो लोग नागरिक नहीं हैं, वे भी तय प्रक्रियाओं का पालन कर इसे कानूनी रूप से हासिल कर सकते हैं।
स) मतदाता पहचान पत्र और पैन कार्ड
पैन कार्ड पूरी तरह से करदाता की पहचान बताने वाला एक दस्तावेज है। मतदाता पहचान पत्र इस बात का सबूत है कि आपका नाम मतदाता सूची में है, लेकिन इन सूची की समय-समय पर दोबारा जांच की जा सकती है।
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने हाल ही में कहा था कि जो लोग मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची में शामिल होते हैं, उन्हें 'पुख्ता तौर पर''भारत का नागरिक माना जा सकता है। हालांकि, सिर्फ़ कार्ड होने से ही मौजूदा कानूनों के तहत नागरिकता से जुड़ा कानूनी विवाद अपने-आप हल नहीं हो जाता।
3) कैसे नागरिकता साबित होती है?
भारत में कोई एक, सार्वभौमिक राष्ट्रीय नागरिकता कार्ड नहीं है। कानूनी तौर पर, नागरिकता कई तरह के दस्तावेजों से तय होती है, जो इस बात पर निर्भर करते हैं कि आप नागरिकता का दावा कैसे करते हैं।
किसी भी व्यक्ति के भारत का नागरिक बनने के पांच तरीके हैं, जन्म से नागरिकता, वंश के आधार पर नागरिकता, पंजीकरण द्वारा नागरिकता, नैसर्गिक रूप से नागरिकता और क्षेत्र के विलय द्वारा नागरिकता।
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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