आयकर विभाग ने सपा नेता आजम खान के जौहर ट्रस्ट का कर छूट वाला दर्जा रद्द किया
नरेश
- 25 Jun 2026, 06:59 PM
- Updated: 06:59 PM
(नीलाभ श्रीवास्तव)
लखनऊ/नयी दिल्ली, 25 जून (भाषा) आयकर विभाग ने समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आजम खान के मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को दी गई आयकर छूट का दर्जा रद्द करते हुए कहा है कि इसकी गतिविधियां ''वास्तविक नहीं'' हैं और वे किसी धर्मार्थ संस्था के घोषित उद्देश्यों एवं लक्ष्यों के अनुरूप नहीं हैं।
लखनऊ मुख्यालय वाले इस ट्रस्ट के प्रमुख न्यासी आजम खान हैं, जो वर्तमान में जेल में हैं। ट्रस्ट के अन्य न्यासियों में खान के परिवार के कुछ सदस्य और सहयोगी भी शामिल हैं। यह ट्रस्ट उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और एक पब्लिक स्कूल संचालित करता है।
लखनऊ में आयकर विभाग ने 23 जून को ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द करने का 140 पन्ने का आदेश जारी किया। इसमें कहा गया है कि ''ट्रस्ट की ओर से की जा रही कई गैर-वास्तविक गतिविधियां ट्रस्ट के मुख्य उद्देश्यों के खिलाफ हैं...इससे ट्रस्ट की विश्वसनीयता तथा उसे प्राप्त कर-मुक्त दर्जे की वैधता प्रभावित होती है।''
आदेश में कहा गया कि ''आयकर अधिनियम की धारा 12ए, 12एए अथवा 12एबी के तहत इस ट्रस्ट को प्रदान किया गया पंजीकरण आकलन वर्ष 2020-21, 2021-22, 2022-23 और 2023-24 से संबंधित पूर्ववर्ती वर्षों के लिए तथा इसके बाद के सभी वर्षों के लिए आयकर अधिनियम की धारा 12एबी(4) के प्रावधानों के अनुसार रद्द किया जाता है।''
ट्रस्ट की मुश्किलें सितंबर 2023 में शुरू हुईं, जब आयकर विभाग की लखनऊ जांच शाखा ने ट्रस्ट के साथ-साथ आजम खान और अन्य संबंधित लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी।
आदेश के अनुसार यह स्पष्ट है कि करदाता (ट्रस्ट) की गतिविधियां ''गैर-वास्तविक'' पाई गईं और उसे उन घोषित उद्देश्यों, लक्ष्यों तथा शर्तों के अनुरूप संचालित नहीं किया जा रहा था, जिनके आधार पर आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 12ए 12एए और 12एबी के तहत उसे पंजीकरण प्रदान किया गया था।
ये धाराएं (12ए, 12एए और 12एबी) धर्मार्थ ट्रस्टों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), तथा धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों को दी जाने वाली आयकर छूट से संबंधित हैं।
आदेश में कहा गया है कि पंजीकरण रद्द किए जाने के परिणामस्वरूप अब ट्रस्ट को आयकर अधिनियम के तहत ''एसोसिएशन ऑफ पर्सन्स'' के रूप में माना जाएगा और उस पर अधिनियम के सभी संबंधित प्रावधान लागू होंगे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि अब ट्रस्ट की आय पर सामान्य कर दरों के अनुसार कर लगाया जाएगा और उसे पहले की तरह कर-छूट का लाभ नहीं मिलेगा। अधिकारियों ने कहा कि अब आयकर विभाग अंतिम कर निर्धारण के आधार पर ट्रस्ट पर बड़ी कर देनदारी, ब्याज और जुर्माना लगा सकता है।
भाषा आशीष नरेश
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