पटनायक के सहयोगी वीके पांडियन की पत्नी सुजाता बीजद में शामिल
देवेंद्र
- 25 Jun 2026, 03:58 PM
- Updated: 03:58 PM
भुवनेश्वर, 25 जून (भाषा) ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के सहयोगी वीके पांडियन की पत्नी एवं पूर्व नौकरशाह सुजाता राउत कार्तिकेयन बृहस्पतिवार को औपचारिक रूप से बीजू जनता दल (बीजद) में शामिल हो गईं।
पटनायक ने यहां बीजद के मुख्यालय 'शंख भवन' में हुई एक बैठक के बाद उनके पार्टी में शामिल होने की घोषणा की।
पटनायक ने कहा, ''मैं सुजाता राउत का बीजद में स्वागत करता हूं। वह पार्टी की एक सामान्य सदस्य के रूप में शामिल हो रही हैं। वह भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी रही हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। अपने अंतिम दायित्व में उन्होंने बड़ी संख्या में राज्य की महिलाओं से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभाली थी।''
उन्होंने कहा, ''मुझे विश्वास है कि समय के साथ वह अपनी नयी भूमिका में सहज हो जाएंगी। वह लोगों विशेषकर महिलाओं का नेतृत्व करना सीखेंगी।'
इस बीच, सुजाता के भविष्य में पार्टी की कमान संभालने संबंधी अटकलों के बीच पटनायक ने स्पष्ट किया कि अगले चुनावों में बीजद का नेतृत्व वह खुद करेंगे।
उन्होंने कहा, ''मैं मीडिया और सभी लोगों की जानकारी के लिए एक बार फिर दोहराना चाहता हूं कि अगले चुनावों में बीजद का नेतृत्व मैं ही करूंगा। मैं इसे पूरी तरह स्पष्ट कर देना चाहता हूं।''
केंद्रपाड़ा जिले की निवासी सुजाता ने कहा कि वह राज्य के लोगों की सेवा के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगी।
पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ''मुझे नवीन पटनायक के नेतृत्व में 24 वर्षों तक ओडिशा के लोगों की सेवा करने का अवसर मिला। आज उनके नेतृत्व में मुझे एक बार फिर राज्य के लोगों की सेवा करने का अवसर प्राप्त हुआ है।''
उन्होंने कहा, ''भगवान जगन्नाथ, पार्टी नेतृत्व और बीजद के लाखों कार्यकर्ताओं के आशीर्वाद से मैं पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ ओडिशा के लोगों के लिए काम करूंगी।''
साल 2000 बैच की आईएएस अधिकारी सुजाता ने 13 मार्च 2025 को सिविल सेवा से इस्तीफा दे दिया था। उन्हें पूर्ववर्ती बीजद सरकार के महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम 'मिशन शक्ति' के विस्तार का बड़ा श्रेय दिया जाता है।
सक्रिय राजनीति में उनका प्रवेश ऐसे समय हुआ है, जब नौकरशाह से नेता बने वी.के. पांडियन ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजद की हार के बाद सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा कर दी थी।
चुनावी पराजय के बाद पांडियन राजनीति से अलग हो गए, जबकि सुजाता नौकरशाही में बनी रहीं। ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के लगभग नौ महीने बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया।
बीजद के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पहले सुजाता के पार्टी में प्रवेश का विरोध किया था। उनका मानना था कि 2024 के चुनावों में बीजद के कमजोर प्रदर्शन के लिए पांडियन काफी हद तक जिम्मेदार थे।
भाषा
खारी देवेंद्र
देवेंद्र
2506 1558 भुवनेश्वर