राष्ट्रपति मुर्मू ने कूनो में 'चीता मित्रों' से की बातचीत
धीरज
- 22 Jun 2026, 06:38 PM
- Updated: 06:38 PM
श्योपुर, 22 जून (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में 'चीता मित्रों' से बातचीत कर दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले स्थलीय जीव चीते के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी ली।
एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति को चीता संरक्षण, उनके व्यवहार और चीतों के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के प्रयासों की जानकारी दी गई। इस दौरान उन्होंने 'प्रोजेक्ट चीता' में चीता मित्रों की स्वैच्छिक भूमिका की सराहना की।
चीता मित्र विशेष रूप से प्रशिक्षित स्थानीय स्वयंसेवक हैं, जिनमें मुख्य रूप से सहरिया जनजाति के सदस्य शामिल हैं। वे कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दोबारा बसाए गए चीतों के संरक्षण और समुदाय के साथ समन्वय का कार्य करते हैं।
अधिकारी ने बताया कि स्वयंसेवकों ने राष्ट्रपति को बताया कि केएनपी से लगे सभी गांवों में चीता मित्र मौजूद हैं और वे लोगों को चीता संरक्षण तथा उनके व्यवहार के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों को यह भी समझाया जाता है कि चीते स्वाभाविक रूप से मनुष्यों को नुकसान नहीं पहुंचाते। यदि किसी आबादी वाले क्षेत्र या खेत में चीता दिखाई दे तो उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग को तुरंत सूचना दी जानी चाहिए।
अधिकारी ने कहा कि भारत में चीतों को दोबारा बसाने के लिए यह परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर सिलोरी, हथेड़ी, सेसईपुरा, पालपुर, पारा, कराहल और मोरावन गांवों के चीता मित्र मौजूद थे।
इस दौरान वन विभाग के प्रमुख सचिव संदीप यादव, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) शुभरंजन सेन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
राष्ट्रपति ने रविवार को कूनो राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया। उन्होंने चीता कमान एवं नियंत्रण केंद्र का निरीक्षण किया और चीतों की निगरानी तथा ट्रैकिंग व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने 'प्रोजेक्ट चीता' की प्रगति को दर्शाने वाली प्रदर्शनी भी देखी।
चीता मित्रों से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से ग्वालियर रवाना हुईं, जहां से वह भारतीय वायुसेना के विमान से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गईं।
अधिकारियों ने बताया कि 'प्रोजेक्ट चीता' की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को भारत में विलुप्त हो चुके चीतों को दोबारा बसाने के साथ उद्देश्य से हुई। यह परियोजना जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक पुनर्स्थापन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
उन्होंने बताया कि पर्याप्त शिकार आधार, अनुकूल आवास और मानवीय हस्तक्षेप अपेक्षाकृत कम होने के कारण कूनो राष्ट्रीय उद्यान को देश के पहले चीता पुनर्स्थापन स्थल के रूप में विकसित किया गया है।
परियोजना के तहत चीतों का पहला दल सितंबर 2022 में नामीबिया से कूनो लाया गया था। दूसरा दल फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से आया था, जबकि तीसरा दल फरवरी 2026 में बोत्सवाना से लाया गया।
राष्ट्रपति मुर्मू नवंबर 2025 में बोत्सवाना की अपनी राजकीय यात्रा के दौरान आठ चीतों के सांकेतिक हस्तांतरण कार्यक्रम में भी शामिल हुई थीं। उक्त चीतों को इस साल फरवरी में कूनो लाया गया।
अधिकारियों ने बताया कि भारत में अब तक 32 चीता शावकों का जन्म हो चुका है।
भाषा सं दिमो
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2206 1838 श्योपुर