स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में अमेरिका, ईरान 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते के लिए रूपरेखा पर सहमत
मनीषा
- 22 Jun 2026, 05:03 PM
- Updated: 05:03 PM
(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद/ज्यूरिख, 22 जून (भाषा) मध्यस्थता करने वाले देशों कतर और पाकिस्तान ने सोमवार को बताया कि स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में घंटों चली बातचीत के बाद अमेरिका व ईरान एक रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। इस रूपरेखा का मकसद 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते पर पहुंचना है। उन्होंने इस प्रगति को "उत्साहजनक" बताया।
मध्यस्थों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि बातचीत "सकारात्मक और रचनात्मक" माहौल में हुई।
संयुक्त बयान में कहा गया, "आगे की तकनीकी बातचीत के लिए एक तंत्र बनाने सहित उत्साहजनक प्रगति हुई है।"
रविवार और सोमवार को स्विट्जरलैंड में 'लेक ल्यूसर्न समिट' में हुई उच्च-स्तरीय बातचीत, उस इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत हुई, जिस पर बृहस्पतिवार को अमेरिका और ईरान ने क्षेत्रीय सुरक्षा और अन्य विवादित मुद्दों पर बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए हस्ताक्षर किए थे।
अमेरिकी दल का नेतृत्व जहां उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, वहीं ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबाफ ने किया।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने भी बातचीत में हिस्सा लिया और चर्चा को आगे बढ़ाने में मदद की।
एमओयू पर हस्ताक्षर के बाद पहली उच्च स्तरीय समिति बैठक, यानि 'लेक ल्यूसर्न समिट' के समापन पर जारी संयुक्त बयान में मध्यस्थों ने कहा कि ईरान, अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों ने समझौते के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की।
इसमें कहा गया है कि एमओयू के आधार पर, पक्ष एक उच्च स्तरीय समिति बनाने पर सहमत हुए हैं, जो मध्यस्थता पर राजनीतिक निगरानी रखेगी।
समिति मुख्य वार्ताकारों से नियमित रिपोर्ट प्राप्त करेगी और एमओयू के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने तथा कार्यढांचा के अंतर्गत शामिल मुद्दों पर प्रगति की निगरानी करने के लिए परमाणु, प्रतिबंध और विवाद समाधान तंत्र पर केंद्रित विशेष कार्य समूहों की देखरेख करेगी।
संयुक्त बयान में कहा गया है, "उच्च स्तरीय समिति 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रूपरेखा पर सहमत हो गई है, जिससे आगे की तकनीकी बातचीत तुरंत शुरू करने की नींव पड़ी है।"
इसमें यह भी कहा गया है कि एमओयू में बताई गई अवधि के दौरान, घटनाओं और गलतफहमी को रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को आसान बनाने के लिए दोनों पक्षों के बीच एक खास संपर्क माध्यम बनाया गया है।
भाषा प्रशांत मनीषा
मनीषा
2206 1703 इस्लामाबाद