मुसलमानों को हाशिये पर धकेलने के खिलाफ धर्मनिरपेक्ष दलों ने साधी 'आपराधिक चुप्पी': पर्सनल लॉ बोर्ड
नरेश
- 22 Jun 2026, 04:40 PM
- Updated: 04:40 PM
नयी दिल्ली, 22 जून (भाषा) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसला किया है कि ''मुसलमानों को सामाजिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने तथा मस्जिदों और मदरसों के ध्वंस'' के खिलाफ जल्द ही वह एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करेगा।
बोर्ड ने आरोप लगाया कि धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल ''आपराधिक चुप्पी'' साधे हुए हैं और उनके लिए मुसलमान केवल वोट बैंक बनकर रह गया है। बोर्ड ने कांग्रेस समेत सभी ऐसे दलों के रवैये को लेकर नाराजगी जताई है।
पर्सनल लॉ बोर्ड की रविवार को हुई कार्यकारिणी की बैठक में यह भी तय किया गया कि मुस्लिम समुदाय की बिगड़ती स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर एक व्यापक दस्तावेज़ तैयार कर प्रकाशित किया जाएगा ताकि देश के जागरूक, न्यायप्रिय और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले वर्गों के ज़मीर को झकझोरा जा सके।
राहुल गांधी के एक बयान का बारे में पूछे जाने पर बोर्ड के प्रवक्ता सैयद कासिम रसूल इलियास ने संवाददाताओं से कहा, ''हम हर कांग्रेसी समेत हर राजनीतिक पार्टी से नाराज हैं...कोई भी पार्टी मुसलमानों से जुड़े मुद्दे उस तरह से नहीं उठा रही है जिस तरह से उठाना चाहिए।"
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी ने पिछले दिनों कांग्रेस के अल्पसंख्यक विभाग की बैठक में कहा था कि मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाते समय उन्हें अल्पसंख्यक नहीं बल्कि मुसलमान कहकर ही संबोधित किया जाए।
इलियास ने कहा, ''बोर्ड ने स्पष्ट किया कि देश के दूसरे सबसे बड़े समुदाय के अधिकारों का हनन केवल एक वर्ग की समस्या नहीं है बल्कि इसका सीधा प्रभाव देश की लोकतांत्रिक संरचना, सामाजिक सौहार्द और विकास प्रक्रिया पर पड़ता है; इस दृष्टि से यह पूरे देश का नुकसान है।''
उनके मुताबिक, पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी ने वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने की कोशिशों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के विरुद्ध बताया और स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार इस संबंध में कोई ऐसा कदम उठाती है जिसके परिणामस्वरूप संसद के माध्यम से सभी नागरिकों या छात्रों के लिए वंदे मातरम् पढ़ना अनिवार्य किया जाता है, तो बोर्ड इसके खिलाफ अदालत का दरवाज़ा खटखटाएगा।
बोर्ड की कार्यकारिणी ने भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता के नाम पर जारी विधायी प्रयासों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की और कहा कि जिस प्रकार बोर्ड ने उत्तराखंड सरकार के यूसीसी कानून को उच्च न्यायालय में चुनौती दी है, उसी प्रकार अन्य राज्यों में भी ऐसे कानूनों के खिलाफ कानूनी कदम उठाया जाएगा।
इलियास ने बताया, ''कार्यकारिणी ने यह भी तय किया कि मुसलमानों को सामाजिक और राजनीतिक रूप से हाशिये पर धकेलने, संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन, नफ़रत और दुश्मनी के प्रसार, सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचाने, मुसलमानों की जान-माल, इज़्ज़त आबरू पर हमलों, तथा मस्जिदों और मदरसों के ध्वंस के खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश के न्यायप्रिय, लोकतंत्र-समर्थक और अमन-पसंद तबकों को साथ लेकर एक देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा। इस उद्देश्य के लिए एक समिति का गठन किया गया है।''
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