बंगाल सरकार पुलिसकर्मियों, लोकसेवकों पर हमलों से निपटने के लिए दो विधेयक लाएगी
नेत्रपाल
- 21 Jun 2026, 03:29 PM
- Updated: 03:29 PM
कोलकाता, 21 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार सार्वजनिक अव्यवस्था, तोड़फोड़ और पुलिसकर्मियों तथा लोकसेवकों पर हमलों के मामलों से सख्ती से निपटने के लिए विधानसभा में दो विधेयक पेश करने जा रही है। यह जानकारी रविवार को एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी।
उन्होंने कहा कि गृह विभाग प्रस्तावित विधेयक को मंजूरी के लिए राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष सोमवार को प्रस्तुत कर सकता है।
राज्य सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन विधेयकों को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान प्रस्तुत किए जाने की संभावना है।
अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, ''इन विधेयकों का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जब पुलिसकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों और यहां तक कि केंद्रीय बलों पर भी अपने कर्तव्यों का पालन करते समय हमले हुए हैं।''
उन्होंने कहा कि इन विधेयकों में से एक पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था संरक्षण अधिनियम, 1972 में संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है, जो दंगे, आगजनी, लूटपाट, विस्फोटकों के इस्तेमाल और सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा पहुंचाने वाली अन्य गतिविधियों से संबंधित है।
अधिकारी ने कहा कि संशोधन से मौजूदा कानून के दायरे को बढ़ाने और ऐसे अपराधों से निपटने के लिए प्रशासन तथा पुलिस को अतिरिक्त शक्तियां प्रदान करने का प्रस्ताव किए जाने की संभावना है।
उन्होंने कहा, ''दूसरा प्रस्ताव एक नए विधेयक से संबंधित है, जिसका नाम सार्वजनिक सुरक्षा नियंत्रण एवं असामाजिक गतिविधि रोधी विधेयक है।''
अधिकारी ने बताया कि मौजूदा कानून मुख्य रूप से कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर केंद्रित है जबकि इसके विपरीत इस नए विधेयक में सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने और असामाजिक गतिविधियों से अधिक व्यापक रूप से निपटने का प्रस्ताव किया गया है।
पश्चिम बंगाल में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिस थानों और सरकारी कार्यालयों को असामाजिक तत्वों द्वारा निशाना बनाया गया।
वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''ऐसे मामलों में, दोषी पाए जाने वालों की संपत्तियों को बेचकर हिंसा या तोड़फोड़ के दौरान हुए नुकसान की भरपाई की जा सकती है।''
उन्होंने कहा कि गृह विभाग विधेयक के प्रारूप को अंतिम रूप दे रहा है।
भाषा
देवेंद्र नेत्रपाल
नेत्रपाल
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