हमारे बच्चों को दबाती व कुचलती है देश की शिक्षा प्रणाली: राहुल गांधी
सुरभि
- 17 Jun 2026, 09:41 PM
- Updated: 09:41 PM
(फोटो के साथ)
कोटा, 17 जून (भाषा) कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को देश की शिक्षा प्रणाली की प्रासंगकिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह हमारे बच्चों को दबाती और कुचलती है जो देश के लिए सही नहीं है।
गांधी ने 'कोचिंग हब' के रूप में विख्यात कोटा शहर में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम 'छात्रों की गूंज' में देश की शिक्षा प्रणाली को बदलने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा, ''हिंदुस्तान की शिक्षा प्रणाली अपने बच्चों को 'प्रेशराइज' (दबाव में) करता है। यह उन्हें 'स्ट्रेस' (तनाव) देता है। यह बच्चों को दबाता और कुचलता है, जो देश के भविष्य के लिए बिल्कुल सही नहीं है।''
उन्होंने कहा, ''मैं चाहता हूं कि हम सब मिलकर इसके खिलाफ लड़ाई लड़ें, ताकि आगे से किसी भी बच्चे को 'आत्मघाती' कदम न उठाना पड़े।''
इससे पहले राहुल गांधी ने कहा कि उनकी छात्रों युवाओं के साथ इस संवाद का मकसद राजनीतिक नहीं है। उन्होंने कहा, ''यह कोई राजनीतिक बैठक नहीं है। इसमें भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा होगी कि इसमें क्या कमियां हैं और क्या सुधार करने की जरूरत है।''
उन्होंने कहा, ''यह बैठक आपके बारे में है, उन युवाओं के बारे में है जो अपना भविष्य बनाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह शाम आपके बारे में है, उन चुनौतियों के बारे में जिनका आप हर दिन सामना कर रहे हैं।"
उन्होंने विभिन्न प्रतियोगी परीक्षा की तैयार कर रहे पांच छात्रों को मंच पर बुलाया और उनसे बात की। उन्होंने एक छात्रा व उसके अभिभावकों से भी मंच पर बात की।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ''हम अभी आज राजनीतिक बात नहीं कर रहे हैं। मैं हिंदुस्तान के भविष्य की बात कर रहा हूं, आपके भविष्य की बात कर रहा हूं, देश के भविष्य की बात कर रहा हूं। हमें इस (शिक्षा) प्रणाली को बदलना होगा और इस प्रणाली को ठीक करना होगा।''
उन्होंने कहा कि हम ऐसी शिक्षा प्रणाली चाहते हैं जो हर भारतीय को बड़ा सपना देखने का मौका दे व उसे पूरा करे। सबसे बड़ी बात आपका यह सपना न्यूनतम लागत पर, बिना आपकी जेब से लाखों करोड़ रुपये छीने करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''देश की शिक्षा प्रणाली हिंदुस्तान के सबसे गरीब मध्यम वर्ग के लोगों से एक परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितना शिक्षा का बजट है और पांच बड़ी परीक्षा के लिए उतना पैसा छीनता है जितने पांच बड़े मंत्रालयों को बजट मिलता है। ये शर्मनाक है। हमें इसे बदलना होगा।''
उन्होंने कहा, ''भारत की शिक्षा प्रणाली शोषण (एक्सटोर्शन) मशीन है। ये आपसे पैसे लेने का 'सिस्टम' है। ये सिर्फ शिक्षा देने का 'सिस्टम' नहीं है। ये परीक्षा के आधार पर आपसे लाखों करोड़ रुपये छीनने का 'सिस्टम' है।''
कांग्रेस नेता ने कहा कि यह कार्यक्रम इस आंदोलन की शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से इससे जुड़ने व अपने सुझाव देने की अपील की कि हम इस प्रणाली को कैसे बदलें।
भाषा अविनाश पृथ्वी सुरभि
सुरभि
1706 2141 कोटा