अन्नाद्रमुक विधायकों का इस्तीफा : मद्रास उच्च न्यायालय ने विस अध्यक्ष को नोटिस जारी करने को कहा
नेत्रपाल
- 17 Jun 2026, 08:43 PM
- Updated: 08:43 PM
चेन्नई, 17 जून (भाषा) मद्रास उच्च न्यायालय ने 'ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम' (अन्नाद्रमुक) के चार विधायकों का विधानसभा से इस्तीफा स्वीकार किए जाने के फैसले को चुनौती देने के लिए दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए विधानसभा अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।
मुख्य न्यायाधीश धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने विधानसभा सचिव, निर्वाचन आयोग, मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और अन्नाद्रमुक के पूर्व विधायकों - एस. जयकुमार, मरगथम कुमारवेल, पी. सत्यभामा और एसक्की सुबैया को भी नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
पीठ ने विधानसभा में अन्नाद्रमुक के सचेतक अग्री एसएस कृष्णमूर्ति की याचिका और 'देसिया मक्कल शक्ति काची' की एक अन्य जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए अगली तारीख 29 जून तय की है।
अदालत के समक्ष जब याचिकाएं सुनवाई के लिए आईं, तब कृष्णमूर्ति की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने दलील दी कि जब 13 मई को 'व्हिप' के निर्देशों का उल्लंघन करते अन्नाद्रमुक के 25 विधायकों ने मौजूदा सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की ओर से पेश विश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मत दिया।
गिरि ने कहा कि अन्नाद्रमुक महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने 25 विधायकों के खिलाफ शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि बाद में, उन 25 विधायकों में से 21 ने माफी मांग ली और अन्नाद्रमुक ने उनके व्यवहार को माफ़ कर दिया।
उन्होंने कहा कि बाकी चार विधायकों ने अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया।
गिरि ने कहा कि 25 मई, 2026 को तीन विधायकों ने अपना इस्तीफ़ा सौंपा जबकि एसक्की सुबैया ने 26 मई, 2026 को इस्तीफ़ा दिया और दल-बदल रोधी कार्यवाही जारी रहने के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने उन इस्तीफों को स्वीकार कर लिया।
वकील ने दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 190 (3) (बी) के अनुसार, इस्तीफ़ा स्वेच्छा से और वास्तविक होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को इस बात की पड़ताल करनी चाहिए कि क्या इस्तीफ़ा स्वेच्छा से दिया गया और क्या वह वास्तविक है।
वकील ने कहा कि इस मामले में विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफे जांच किए बिना स्वीकार कर लिए और चारों विधायकों की सीट रिक्त घोषित कर दी जबकि अयोग्यता की कार्यवाही जारी थी।
गिरि ने पीठ को बताया कि इस्तीफा स्वीकार होने के दिन ही चारों विधायक टीवीके में शामिल हो गए।
उन्होंने दलील दी कि दूसरे प्रलोभन भी दिए गए, इसलिए उनका इस्तीफ़ा अपनी मर्ज़ी से या वास्तविक नहीं था, और विधानसभा अध्यक्ष यह नहीं कह सकते कि जांच करने की कोई ज़रूरत नहीं थी।
गिरि ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष ने बिना किसी जांच के चारों विधायकों का इस्तीफ़ा स्वीकार कर लिया, इसलिए याचिकाकर्ता ने इस्तीफ़ा स्वीकार किए जाने पर सवाल उठाया है।
वहीं, महाधिवक्ता विजय नारायण ने दलील दी कि चारों विधायक विधानसभा अध्यक्ष के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हुए और अपना इस्तीफ़ा सौंपा। उन्होंने कहा कि इसलिए, उनका इस्तीफ़ा स्वेच्छा से और वास्तविक था।
भाषा धीरज नेत्रपाल
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