यह जनादेश का अपमान: शिवसेना (उबाठा) में टूट की खबरों पर कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड
नेत्रपाल
- 17 Jun 2026, 06:46 PM
- Updated: 06:46 PM
मुंबई, 17 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) में टूट की अटकलें तेज होने के बीच कांग्रेस ने बुधवार को कहा कि यह घटनाक्रम जनादेश का अपमान और विपक्ष के महा विकास अघाडी (एमवीए) गठबंधन के साथ विश्वासघात है।
कांग्रेस की मुंबई इकाई की अध्यक्ष वर्षा गायकवाड ने कहा कि विपक्ष ने ''संविधान की रक्षा'' के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ एकजुट होकर 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन इस भाजपा-विरोधी मंच से चुने गए कुछ सांसद अब सत्ताधारी दल का साथ देने का विकल्प चुन रहे हैं।
वहीं, कांग्रेस की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि ''छह बागी सांसद'' कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के पूरे एमवीए गठबंधन के साथ धोखा कर रहे हैं।
शिवसेना (उबाठा) के नौ लोकसभा सदस्यों में से कई के पार्टी छोड़ने की अटकलों का जिक्र करते हुए मुंबई उत्तर-मध्य सीट से सांसद गायकवाड ने कहा, ''जनता ने भाजपा के खिलाफ मतदान किया था, लेकिन इन सांसदों ने उस जनादेश की अनदेखी की और भाजपा की गोद में जा बैठे।''
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा की राजनीतिक रणनीति विपक्षी नेताओं को तोड़ने की है, और यदि वह विफल रहती है, तो पूरी पार्टियों को तोड़ना और चुने हुए प्रतिनिधियों को अपने पाले में करने की रहती है।
गायकवाड ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) में हो रहे ये घटनाक्रम लोकतंत्र और मतदाताओं का ''घोर अपमान'' हैं।
उन्होंने ''लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा'' बनने वालों और भाजपा की निंदा करते हुए कहा, ''जिनके लिए हमने दिन-रात चुनाव प्रचार किया, उन्होंने उस भरोसे को धोखा दिया है जो जनता ने उन पर जताया था।''
गायकवाड ने पाला बदलने वाले सांसदों से जनता की भावनाओं का सम्मान करने और अपनी अंतरात्मा की आवाज के अनुसार काम करने की भी अपील की।
दूसरी ओर, सपकाल ने एक बयान में कहा, ''जनता ने सत्ताधारी महायुति के खिलाफ मतदान कर इन सांसदों को चुना था, और यह कदम उस भरोसे को तोड़ने जैसा है। ऐसे गद्दारों को जनता सबक सिखाएगी।''
उन्होंने कहा कि इन छह सांसदों ने विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवारों के रूप में 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ा था और उन्हें कांग्रेस, शिवसेना (उबाठा) तथा राकांपा (शप) के कार्यकर्ताओं का पूरा समर्थन मिला था।
सपकाल ने कहा, ''कांग्रेस, राकांपा (शप) और शिवसेना (उबाठा) के कार्यकर्ताओं ने धमकियों तथा प्रलोभनों के बावजूद उनके लिए प्रचार किया और उनके साथ खड़े रहे। उनका यह विद्रोह उन सभी कार्यकर्ताओं और मतदाताओं का अपमान है जिन्होंने उन पर अपना भरोसा जताया था।''
भाषा सुमित नेत्रपाल
नेत्रपाल
1706 1846 मुंबई