टीएमसी की काकोली दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र, कल्याण बनर्जी को निष्कासित करने की मांग की
दिलीप
- 15 Jun 2026, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
कोलकाता, 15 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की लोकसभा में बागी गुट की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर कल्याण बनर्जी को निष्कासित करने की मांग की है।
दस्तीदार ने आरोप लगाया है कि बनर्जी ने बार-बार मौखिक दुर्व्यवहार किया, महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां कीं और संसद परिसर में अनुचित आचरण किया।
दस्तीदार ने बनर्जी को निष्कासित करने की मांग वाला यह पत्र 28 मई को श्रीरामपुर के सांसद बनर्जी के खिलाफ की गई शिकायत के बाद लिखा है।
यह पत्र पार्टी में जारी उथल-पुथल के बीच लिखा गया है। बनर्जी ने बागी सांसदों की आलोचना करते हुए उन्हें चुनौती दी थी कि यदि उनमें हिम्मत है, तो वे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें।
हालांकि, बनर्जी ने दस्तीदार के आरोपों को खारिज करते हुए उन्हें "झूठा और मनगढ़ंत" बताया।
लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप के अनुरोध वाले पत्र में कहा गया है, "कई अवसरों पर बनर्जी ने सदन की बैठकों और कार्यवाही के दौरान मेरे तथा अन्य महिला सदस्यों के खिलाफ आपत्तिजनक, अपमानजनक और अनुचित भाषा का इस्तेमाल किया है। ऐसा आचरण किसी सांसद को शोभा नहीं देता।"
दस्तीदार ने आरोप लगाया कि यह "आपत्तिजनक आचरण" कोई अकेली घटना नहीं, बल्कि ऐसा कई बार किया गया है।
दस्तीदार ने बनर्जी पर उनके खिलाफ व्यक्तिगत हमले करने, डराने-धमकाने और महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणियां करने का आरोप लगाया।
दस जून को लिखे पत्र में पश्चिम बंगाल की बारासात सीट से सांसद दस्तीदार ने कहा, "ऐसा व्यवहार राजनीतिक मतभेद या संसदीय चर्चा की सीमाओं से आगे बढ़कर व्यक्तिगत दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के दायरे में आता है। इस आचरण से न केवल मुझे व्यक्तिगत पीड़ा हुई है, बल्कि ऐसा माहौल भी बना है, जो महिलाओं की संसदीय कार्यवाही में स्वतंत्र भागीदारी को हतोत्साहित करता है।"
दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष से बनर्जी द्वारा किए गए "बार-बार के मौखिक दुर्व्यवहार और अनुचित आचरण" का संज्ञान लेने का आग्रह किया और सदन द्वारा उचित समझे जाने वाले दंडात्मक या अनुशासनात्मक कदम उठाने की अपील की, जिसमें निष्कासन भी शामिल है।
रविवार को दस्तीदार ने लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के एक समूह का नेतृत्व किया और सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग को लेकर लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की।
साथ ही उन्होंने इस गुट के 'नेशनलिस्ट सिटीजंस पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) में विलय की घोषणा भी की।
बिरला से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए दस्तीदार ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को सौंपे गए पत्र पर तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं।
बनर्जी ने आरोपों को अस्पष्ट और उनकी राजनीतिक छवि खराब करने का प्रयास बताते हुए शिकायत दर्ज कराने के समय पर सवाल उठाया।
बनर्जी ने कहा, "मैंने आखिर कब उनका अपमान किया? उन्होंने मुझे 'बार-बार अपराध करने वाला' कहा है। इसलिए उन्हें यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या मैंने ऐसा 15वीं, 16वीं या 17वीं लोकसभा के कार्यकाल के दौरान किया था? या फिर 18वीं लोकसभा के दौरान?"
उन्होंने कहा, "आपराधिक मामलों को छोड़कर ऐसे आरोप एक निर्धारित समय-सीमा में लगाए जाने चाहिए। आपराधिक मामलों में किसी अपराध की जानकारी बाद में सामने आ सकती है। लेकिन इस तरह के आरोप के मामले में पहले शिकायत क्यों नहीं की गई?"
बनर्जी ने आरोप लगाया कि दस्तीदार ने छह मई से तृणमूल कांग्रेस से "दूरी बनानी" शुरू कर दी थी।
उसी दिन उन्हें लोकसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक पद से हटाकर उनकी जगह बनर्जी को नियुक्त किया गया था।
बनर्जी ने कहा, "जब वह तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थीं, तब उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा। उन्होंने मुझे राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए ऐसा किया है।"
यह पूछे जाने पर कि क्या वह लोकसभा अध्यक्ष को लिखित जवाब भेजेंगे तो बनर्जी ने इससे इनकार किया।
उन्होंने कहा, "मैं जवाब क्यों दूं, जब अध्यक्ष ने कोई जवाब नहीं मांगा है? यह उनका विशेषाधिकार है, और यदि वह कभी मुझसे जवाब मांगेंगे, तो मैं उस बारे में फैसला करूंगा। मैंने केवल आपके सवालों के जवाब दिए हैं, क्योंकि आपने वे सवाल पूछे थे।"
भाषा जोहेब दिलीप
दिलीप
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