प्रियंक खरगे ने आरएसएस से पंजीकरण कराने और वित्तीय जानकारी देने को कहा
सुरेश
- 15 Jun 2026, 09:40 PM
- Updated: 09:40 PM
बेंगलुरु, 15 जून (भाषा) कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कहा कि वह अपना पंजीकरण कराए, अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे तथा वित्तपोषण के स्रोत, आय, खर्च और संपत्ति का खुलासा करे। उन्होंने कहा कि आरएसएस को पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही बनाए रखनी चाहिए।
आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर बधाई देते हुए मंत्री ने इसके प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर आरएसएस की संगठनात्मक स्थिति के बारे में कानूनी स्पष्टीकरण का अनुरोध किया।
प्रियंक खरगे ने भागवत को लिखा अपना पत्र सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर साझा करते हुए कहा कि जिस संगठन का देश-विदेश में 60,000 से अधिक शाखाएं और करोड़ों स्वयंसेवक होने का दावा है, उसे पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक अनुपालन भी करना चाहिए।
प्रियंक खरगे ने आरएसएस से कहा कि वह अपने शताब्दी वर्ष का इस्तेमाल सिर्फ जश्न मनाने के लिए नहीं, बल्कि संविधान के नजरिये से आत्म-मंथन के लिए करे। उन्होंने कहा, "वह (संघ) अपने 100वें साल में भारत को जो सबसे अच्छा सम्मान दे सकता है, वह यह होगा कि संघ अपना पंजीकरण कराए, अपनी गतिविधियों और आर्थिक लेनदेन की जानकारी दे, सभी लागू टैक्स चुकाए और भारतीय कानून के दायरे में रहकर एक पारदर्शी और जवाबदेह संगठन के तौर पर काम करे।''
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे एवं मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि आरएसएस की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की 2025-26 की कर्नाटक रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में संगठन की 4,127 रोजाना शाखाएं, 1,389 साप्ताहिक मिलन और 60 मासिक मंडलियां हैं।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि आरएसएस ने पूरे कर्नाटक में 2,194 समाजोत्सव आयोजित किए, जिनमें 19.61 लाख लोग शामिल हुए और 562 पथ संचलन किए। इस पथ संचलन में 2.21 लाखों ने हिस्सा लिया।
मंत्री ने कहा कि आरएसएस की संगठनात्मक मौजूदगी व्यापक है, खासकर तब, जब इसमें नियमित रूप से लोगों को जुटाना, पोशाक पहनकर मार्च करना और बड़े पैमाने पर सामाजिक संपर्क जैसे काम शामिल हों, तो इसे कोई निजी या अनौपचारिक व्यवस्था नहीं माना जा सकता।
उन्होंने कहा कि आरएसएस की गतिविधियां कानूनी स्थिति, जवाबदेही, वित्तीय पारदर्शिता, सार्वजनिक व्यवस्था, अनुमतियों, वित्तपोषण के स्रोतों और भारत के संविधान एवं कानूनों के पालन को लेकर सवाल उठाती हैं।
सोमवार को मीडिया के साथ साझा किए गए 13 जून के पत्र में कहा गया, ''हम आरएसएस से अनुरोध करते हैं कि वह अपने पदाधिकारियों को अधिकृत करे, ताकि वे उन कानूनी आधारों को समझा सकें, जिनके तहत इतना बड़ा संगठन लागू कानूनों के तहत विधिक इकाई या 'व्यक्तियों के समूह' के तौर पर औपचारिक रूप से पंजीकृत हुए बिना गोपनीयता में कार्य करता है।"
उन्होंने पूछा कि जब नागरिकों, मजदूर संगठनों, गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), न्यास, मंदिरों और कंपनियों से पंजीकरण कराने, जानकारी देने और कानून का पालन करने की उम्मीद की जाती है तो आरएसएस को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए।
पत्र में कहा गया है, "इस संदर्भ में यह उचित और जरूरी है कि आरएसएस भी आगे आए और अपनी कानूनी स्थिति, संगठनात्मक ढांचा, अपने पदाधिकारियों और अधिकृत प्रतिनिधियों का विवरण, दान, योगदान और आय एवं व्यय तथा संपत्ति का विवरण साझा करे।"
उन्होंने आरएसएस प्रमुख से यह बताने को कहा कि क्या कानून के मुताबिक लागू कर चुकाए जा रहे हैं, बिना औपचारिक पंजीकरण के उनकी गतिविधियां किस कानूनी आधार पर चलाई जा रही हैं और वे किस संवैधानिक और कानूनी ढांचे के तहत बिना किसी सार्वजनिक जवाबदेही के इतने बड़े पैमाने पर काम करने का अधिकार होने का दावा करते हैं।
उन्होंने भागवत से अपने पत्र का औपचारिक जवाब देने का आग्रह किया।
इस बीच सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक भाजपा ने प्रियंक खरगे की आलोचना की और कहा कि पहली बार गृह मंत्री बनने के अति उत्साह में वह अपने नेता राहुल गांधी को खुश करने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं।
भाजपा ने आरोप लगाया, "ऐसा प्रतीत होता है कि गृह मंत्री प्रियंक खरगे आरएसएस की चर्चा किए बिना सो नहीं सकते। यह वास्तव में हास्यास्पद है कि जिस कांग्रेस पर 'कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी' (केएफडी) और पीएफआई जैसे कथित राष्ट्र-विरोधी संगठनों को परोक्ष रूप से समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं, वह पार्टी आज देशभक्त संगठन आरएसएस के पंजीकरण की बात कर रही है।"
भाजपा ने दावा किया कि अपनी स्थापना से लेकर अब तक आरएसएस के लाखों स्वयंसेवकों ने राष्ट्रसेवा में अपने प्राणों तक की बाजी लगाई है।
पार्टी ने कहा, "संविधान के विभिन्न प्रावधान स्पष्ट करते हैं कि संघों और संगठनों का पंजीकरण अनिवार्य नहीं है। यह सोचना मूर्खता की पराकाष्ठा है कि जिस संगठन ने अपने अस्तित्व के सौ साल पूरे कर लिये हों, उसे राजनीतिक सत्ता के जरिये नियंत्रित किया जा सकता है।"
भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्य ने पत्रकारों से बातचीत में भी प्रियंक खरगे की आलोचना करते हुए कहा कि आरएसएस के पंजीकरण या उसके ऑडिट पर सवाल उठाने वाले वह (प्रियंक) कोई पहले व्यक्ति नहीं हैं।
उन्होंने कहा, "भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को संगठन और संघ बनाने का अधिकार देता है। यह अधिकार प्रियंक खरगे ने नहीं दिया, बल्कि बाबासाहेब आंबेडकर ने दिया था।"
भाषा शुभम सुरेश
सुरेश
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