आईपीएल में विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता पर हस्तक्षेप नहीं करेगा बीसीसीआई
मोना
- 13 Jun 2026, 05:20 PM
- Updated: 05:20 PM
धर्मशाला, 13 जून (भाषा) हाल में खत्म हुए इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) सत्र के दौरान फ्रेंचाइजी की चिंताओं के बावजूद भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) विदेशी खिलाड़ियों और उनकी टीम के बीच उनकी उपलब्धता को लेकर कोई मध्यस्थता नहीं करेगा।
बीसीसीआई ने उन विदेशी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है जो नीलामी में खरीदे जाने के बाद टूर्नामेंट से हट जाते हैं। लेकिन दो महीने तक चलने वाले आईपीएल में खिलाड़ियों की उपलब्धता अभी भी एक मुद्दा बनी हुई है।
जोश हेजलवुड, पैट कमिंस और मिचेल स्टार्क जैसे खिलाड़ी मामूली चोटों के कारण टूर्नामेंट के शुरूआती हिस्से में उपलब्ध नहीं थे। स्टार्क की अनुपस्थिति का दिल्ली कैपिटल्स पर प्रतिकूल असर पड़ा।
राजस्थान रॉयल्स के मुख्य कोच कुमार संगकारा ने प्लेऑफ अभियान के बाद सैम करन के चोट के कारण आईपीएल से हटने के बाद ब्रिटेन में टी20 खेलने पर निराशा व्यक्त की थी। पंजाब किंग्स के सह-मालिक मोहित बर्मन का कहना है कि बीसीसीआई और अन्य बोर्डों को विदेशी खिलाड़ियों की उपलब्धता पर बेहतर तालमेल बिठाने की जरूरत है।
संगकारा ने कहा था, ''हमें बताया गया था कि सैम करन को ऐसी चोट लगी है जिससे वह पूरे सत्र के लिए बाहर हो गए हैं। लेकिन मैंने उन्हें सरे के लिए दो-तीन मैच खेलते हुए देखा है। इसलिए यह निराशाजनक था। ''
हालांकि बीसीसीआई का मानना है कि इस विवादित मामले को खिलाड़ी और उनकी फ्रेंचाइजी के बीच ही सुलझाया जाना चाहिए क्योंकि ''वही खिलाड़ियों के संरक्षक होते हैं।''
बोर्ड का यह भी मानना है कि आखिरी समय में नाम वापस लेने पर लगने वाला दो साल का प्रतिबंध काफ़ी कड़ा है और खिलाड़ी फ्रेंचाइजी से सलाह मश्विरा करके अपना फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
आर्चर राजस्थान रॉयल्स के लिए खेलते हैं। इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड चाहता था कि आर्चर अपने कार्यभार को प्रबंधित करें लेकिन इसके बावजूद उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के लिए खुद को उपलब्ध कराया
मौजूदा नीलामी बजट 125 करोड़ रुपये है, लेकिन खिलाड़ियों के अनुबंधों की तुलना अब भी यूरोपीय फुटबॉल या एनएफएल के अनुबंधों से नहीं की जा सकती। बीसीसीआई आमतौर पर बजट में अचानक बड़ी बढ़ोतरी करने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ोतरी करता है।
सूत्र ने कहा, ''हम निश्चित रूप से इसमें बढ़ोतरी पर विचार कर सकते हैं, लेकिन हमें इसे समग्र रूप से देखना होगा। कई खिलाड़ी एक सत्र में भारी रकम कमाते हैं और अगले सत्र में कहीं नजर नहीं आते। साथ ही कुछ फ्रेंचाइजी खिलाड़ियों को उनके अनुबंध से कहीं ज्यादा भुगतान करती हैं। खिलाड़ियों को मैच फीस (प्रति मैच साढ़े सात लाख रुपये) भी मिलती है और टूर्नामेंट के दौरान अतिरिक्त प्रायोजन भी मिलता है। ''
बीसीसीआई की योजना 2028 सत्र से मैचों की संख्या 74 से बढ़ाकर 94 करने की है और इसके लिए एक बड़ी विंडो की जरूरत होगी।
बीसीसीआई सूत्रों के अनुसार सबसे अच्छी विंडो मार्च के पहले सप्ताह से मई के मध्य तक है। 2026 का चरण मार्च के अंत में शुरू हुआ और फाइनल 31 मई को खेला गया।
2027 के चक्र के बाद मीडिया अधिकारों का नवीकरण किया जाएगा और उस समय सभी हितधारकों को भविष्य में होने वाली द्विपक्षीय श्रृंखला की व्यवहार्यता पर विचार करना होगा।
ज्यादातर टेस्ट खेलने वाले देशों की अपनी टी20 लीग हैं और वे अब भारत के साथ सीरीज की मेजबानी करने पर पूरी तरह निर्भर नहीं हैं, जैसा कि पहले हुआ करता था।
प्रसारणकर्ता को पहले से ही कुछ द्विपक्षीय सीरीज में कोई खास फायदा नजर नहीं आ रहा है। हाल में भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला गया एकमात्र टेस्ट मैच लगभग खाली स्टेडियम में खेला गया था।
भाषा नमिता मोना
मोना
1306 1720 धर्मशाला