विधानसभा से लेकर संसद तक तृणमूल में बगावत, अलग हुए गुट ने 20 सांसदों के समर्थन का किया दावा
प्रशांत
- 08 Jun 2026, 10:27 PM
- Updated: 10:27 PM
नयी दिल्ली/कोलकाता, आठ जून (भाषा) अपने विधायकों के बीच फूट के बाद, तृणमूल कांग्रेस संसद में भी इसी तरह के संकट का सामना करती नजर आ रही है। अधिकांश सांसदों के समर्थन का दावा करने वाले पार्टी के एक गुट ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का समर्थन करने का फैसला किया है।
सोमवार को एक ओर जहां तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने नयी दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन की बैठक में भाग लिया, वहीं दूसरी ओर बागी गुट की अगुवाई कर रही लोकसभा सदस्य काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि उन्होंने राजग को अपने समर्थन की जानकारी देने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखने का फैसला किया है।
सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में गहराता संकट उस वक्त और बढ़ गया जब दस्तीदार ने दावा किया कि पार्टी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखने का फैसला किया है।
दस्तीदार ने 'पीटीआई-भाषा' को फोन पर बताया, ''मेरे समेत टीएमसी के लगभग बीस सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर राजग को औपचारिक रूप से समर्थन देने का फैसला किया है।''
सूत्रों के अनुसार, बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष यह तर्क देने का इरादा रखते हैं कि दस्तीदार लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक बनी रहेंगी।
दस्तीदार ने कहा, ''हमने जनता के फैसले को स्वीकार कर लिया है और हमारा मानना है कि भविष्य का हमारा राजनीतिक मार्ग राजग के अनुरूप होना चाहिए।''
हालांकि, टीएमसी के एक नेता ने कहा कि पार्टी ने उन्हें मुख्य सचेतक पद से हटाने और कल्याण बनर्जी को नियुक्त करने की जानकारी तृणमूल कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष ममता बनर्जी द्वारा हस्ताक्षरित 20 मई के एक आधिकारिक पत्र के माध्यम से लोकसभा सचिवालय को दी थी।
पार्टी सूत्रों द्वारा साझा की गई पत्र की एक प्रति में यह नजर आ रहा कि लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय की 29 मई की पावती मुहर लगी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, बागी सांसदों ने टीएमसी से तुरंत इस्तीफा देने या भाजपा में शामिल होने का विकल्प नहीं चुना है। इसके बजाय, वे राजग का समर्थन करने वाले एक अलग गुट के रूप में काम करने का इरादा रखते हैं, जो दलबदल रोधी कानून से बचने के लिए बनाई गई एक रणनीति है।
टीएमसी के पास फिलहाल लोकसभा में 28 सांसद हैं, जिनमें से एक सीट बसीरहाट सांसद हाजी नुरुल इस्लाम के निधन के बाद रिक्त है। 20 सांसदों का समर्थन मिलने पर दलबदल रोधी कानून लागू होने से रोकने के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत आसानी से प्राप्त हो जाएगा।
हालांकि, टीएमसी नेता ने दोहराया कि इतनी संख्या में सांसद होने के बावजूद भी बागी गुट स्वतः ही एक अलग संसदीय समूह के रूप में कार्य नहीं कर सकेगा।
उन्होंने कहा, ''कानून के अनुसार, यदि दो-तिहाई सांसद भी पार्टी छोड़ना चाहें, तो उनके पास एकमात्र विकल्प यही है कि वे किसी अन्य राजनीतिक दल में विलय कर लें। अलग समूह बनाने का कोई प्रावधान नहीं है।''
इस बीच, एक सूत्र ने बताया कि बागी सांसदों के एक समूह ने दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की।
बैठक की एक कथित तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही है। इस तस्वीर में, राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय, सांसद अबू ताहिर, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद खेरवाल, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार और शताब्दी रॉय के साथ दिखाई दे रहे हैं।
पार्टी सूत्रों ने यह भी बताया कि रविवार देर रात राष्ट्रीय राजधानी में एक अज्ञात स्थान पर लगभग 20 सांसदों की अनौपचारिक बैठक हुई।
बैठक की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, सांसदों ने आगे की संभावित रणनीति पर चर्चा की और पार्टी की मौजूदा संसदीय नेतृत्व संरचना पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने पार्टी छोड़ने की अटकलों को खारिज कर दिया है।
उन्होंने कहा, ''मैंने सुना है कि कुछ सांसदों ने कल रात अलग से बैठक की थी। बैठक में क्या बात हुई, यह सिर्फ वही बता सकते हैं। उन्होंने मुझसे संपर्क नहीं किया।''
भाजपा द्वारा टीएमसी सांसदों से संपर्क साधने की कोशिशों की खबरों के बारे में पूछे जाने पर रॉय ने कहा कि उनसे संपर्क किया गया था, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव ठुकरा दिया।
रॉय (78) ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''मैंने उनसे कहा कि मैं टीएमसी के साथ ही रहूंगा। इस उम्र में मेरे लिए पाला बदलना संभव नहीं है।''
यादव के आवास पर हुई बैठक में शामिल हुए सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया।
राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
राय ने कहा, ''मैंने राज्यसभा के सभापति से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया है। मैंने ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिए पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले की जानकारी दे दी है।''
उन्होंने कहा, ''राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 तक था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक रूप से पार्टी से इस्तीफा दे दिया है क्योंकि मेरे लिए इसमें आगे बने रहना मुश्किल होगा।''
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल से अलग हुए गुट के नेता रिताब्रता बनर्जी ने राय के इस्तीफे को पार्टी में बढ़ते असंतोष का संकेत बताया और दावा किया कि आने वाले दिनों में और भी सांसद टीएमसी से खुद को अलग कर सकते हैं।
भाषा सुभाष प्रशांत
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