धार की भोजशाला में वाग्देवी की अष्टधातु मूर्ति रखने और 'हटाने' को लेकर विवाद
राजकुमार
- 08 Jun 2026, 05:00 PM
- Updated: 05:00 PM
(फाइल फोटो के साथ)
इंदौर, आठ जून (भाषा) धार की भोजशाला को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा मंदिर घोषित किए जाने के 22 दिन बाद इस परिसर में वाग्देवी (देवी सरस्वती) की अष्टधातु मूर्ति रखे जाने और उसे कथित तौर पर हटाए जाने को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है।
हिंदू पक्ष के एक याचिकाकर्ता ने भोजशाला से यह मूर्ति हटाने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि मुस्लिम पक्ष के एक प्रतिनिधि ने मध्यकालीन स्मारक में इस मूर्ति की स्थापना पर आपत्ति जताई है।
मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने हिंदू पक्ष की दो जनहित याचिकाएं स्वीकार करते हुए भोजशाला को 15 मई को वाग्देवी का मंदिर घोषित किया था। अदालत ने अपने फैसले में यह भी कहा था कि एएसआई को इस परिसर में धार्मिक पहुंच के संरक्षण और विनियमन पर 'पूर्ण पर्यवेक्षी नियंत्रण' प्राप्त होगा।
भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं में शामिल कुलदीप तिवारी ने सोमवार को एक बयान में कहा कि पिछले शनिवार (छह जून) को कुछ श्रद्धालुओं ने इस परिसर में अष्टधातु की एक मूर्ति स्थापित कर विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना की थी।
तिवारी के अनुसार श्रद्धालुओं ने शनिवार को पूरे दिन मूर्ति की पूजा की, लेकिन शाम को एएसआई ने इसे भोजशाला से कथित तौर पर हटा दिया।
उन्होंने कहा,''मां वाग्देवी की अष्टधातु मूर्ति को एएसआई द्वारा हटाया जाना बेहद आपत्तिजनक है। यह कदम न्यायालय के आदेश की अवमानना और श्रद्धालुओं की आस्था का अपमान है।''
तिवारी ने कहा कि भोजशाला परिसर में वाग्देवी की मूर्ति की प्रतिकृति अपने स्थान पर यथावत है, जबकि अष्टधातु की मूर्ति एएसआई ने कथित तौर पर हटा दी है।
उन्होंने कहा कि वाग्देवी की मूल मूर्ति लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी है और जब तक यह मूर्ति वापस भारत नहीं आ जाती, तब तक वैकल्पिक रूप से अष्टधातु की मूर्ति मंदिर में स्थापित की जाए।
तिवारी ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि पिछले हफ्ते भोजशाला परिसर में किन श्रद्धालुओं ने अष्टधातु की मूर्ति स्थापित की थी।
भोजशाला परिसर से यह मूर्ति हटाए जाने के आरोप पर एएसआई की प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी है। इस विवाद के बारे में पूछे जाने पर धार क्षेत्र के एएसआई अधिकारी प्रशांत पाटनकर ने कहा कि वह मीडिया को बयान देने के लिए अधिकृत नहीं हैं।
धार के पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने कहा कि भोजशाला को लेकर उच्च न्यायालय के 15 मई के आदेश और तमाम नियम-कायदों का पुलिस-प्रशासन द्वारा पूरी तरह पालन किया जा रहा है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में जनहित याचिका दायर करके मुकदमा जीतने वाले हिंदू पक्ष के दोनों याचिकाकर्ता लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम में रखी वाग्देवी की मूल मूर्ति को भारत वापस लाकर भोजशाला में पुनर्स्थापित करने की मांग पर जोर दे रहे हैं।
हिंदू पक्ष की याचिकाओं में वाग्देवी की मूल मूर्ति भारत वापस लाने और उसे भोजशाला परिसर के भीतर फिर से स्थापित करने की गुहार भी शामिल थी। इस गुहार पर अदालत ने 15 मई के फैसले में कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने भारत सरकार के समक्ष पहले ही इस बारे में कई अभ्यावेदन प्रस्तुत किए हैं और सरकार इन पर विचार कर सकती है।
धार की कमाल मौला मस्जिद नमाज इंतजामिया कमेटी के सदर (प्रमुख) जुल्फिकार पठान ने कहा,"उच्च न्यायालय की इस टिप्पणी के मद्देनजर भोजशाला परिसर में कोई भी अन्य मूर्ति कानूनन नहीं रखी जा सकती।"
पठान ने यह मांग की कि भोजशाला परिसर की दीवारों पर अंकित इस्लामी शिलालेखों को 'पूरी तरह सुरक्षित' किया जाना चाहिए।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने 15 मई को अपने फैसले में भोजशाला परिसर की धार्मिक प्रकृति वाग्देवी (देवी सरस्वती) मंदिर के रूप में निर्धारित की थी।
अदालत ने एएसआई के सात अप्रैल 2003 के उस आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसमें मुस्लिमों को हर शुक्रवार इस परिसर में नमाज अदा करने की इजाजत दी गई थी। इस आदेश में हिंदुओं को केवल मंगलवार को स्मारक में पूजा-अर्चना की अनुमति दी गई थी।
उच्च न्यायालय द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित करने के फैसले के बाद इस परिसर में हिंदुओं की पूजा-अर्चना लगातार जारी है।
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