सुखेंदु के पार्टी छोड़ने से तृणमूल का संकट और गहराया, रिताब्रता ने और सांसदों के अलग होने की बात कही
नरेश
- 08 Jun 2026, 04:35 PM
- Updated: 04:35 PM
कोलकाता, आठ जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के अंदर जारी बगावत सोमवार को और तेज हो गई, जब बागी नेता रिताब्रता बनर्जी ने वरिष्ठ राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय के पार्टी और उच्च सदन से इस्तीफे को आधिकारिक नेतृत्व के खिलाफ गहराते असंतोष का संकेत बताया।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट के नेता रिताब्रता ने राय के पार्टी छोड़ने को सिर्फ एक व्यक्ति के विरोध से कहीं ज़्यादा पार्टी के अंदर नाखुश नेताओं के एक धड़े के बीच ''इच्छाशक्ति की एकता'' कहा।
तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 58 का समर्थन हासिल करने के बाद विधानसभा अध्यक्ष रतींद्र बोस ने रिताब्रता को सदन में विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता दी। रिताब्रता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी सांसद सार्वजनिक रूप से पार्टी से दूरी बना लेंगे।
तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और कई वरिष्ठ सांसद सोमवार को जहां विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के नेताओं की बैठक में शामिल हुए, वहीं ऐसी खबरें आईं कि करीब एक दर्जन असंतुष्ट तृणमूल कांग्रेस सांसद केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पश्चिम बंगाल चुनाव प्रभारी भूपेंद्र यादव के मोतीलाल नेहरू मार्ग स्थित आवास पर इकट्ठे हुए।
कई लोगों ने इस बैठक को इस बात का संकेत माना कि पार्टी के विधायकों में बगावत अब संसद तक पहुंच रही है, जिसमें राय भी शामिल हुए।
आधिकारिक काम से राष्ट्रीय राजधानी आए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब, जो हाल में हुए पश्चिम बंगाल चुनावों के लिए भाजपा के सह-प्रभारी थे, भी यादव के घर थोड़ी देर के लिए गए थे।
इस पृष्ठभूमि में, रिताब्रता ने कहा कि राय का इस्तीफा एक बड़े राजनीतिक फेरबदल की शुरुआत भर है।
उन्होंने विधानसभा परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''राय एक वरिष्ठ नेता हैं, और उनका इस्तीफा हमारे और पार्टी के उन नेताओं के एक बड़े हिस्से के बीच एकता दिखाता है जो राज्य विधानसभा से बाहर हैं। कोलकाता की दिल्ली से दूरी मुश्किल से 1,435 किलोमीटर है, और तृणमूल कांग्रेस के निराश सांसदों की संख्या बढ़ने की बहुत संभावना है। हर गुजरते घंटे के साथ यह घटनाक्रम आगे बढ़ सकता है।''
रिताब्रता ने कहा कि वह ऐसे कई अन्य सदस्यों के संपर्क में हैं जिन्हें ऐसी ही शिकायतें हैं।
हालांकि रिताब्रता बनर्जी ने कहा कि उन्होंने राय के इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला लेने से पहले उनसे बात नहीं की थी, लेकिन उन्होंने पार्टी के अंदरूनी कामकाज की आलोचना करने वाले वरिष्ठ सांसद से पूरी सहमति जताई।
उनके मुताबिक, अलग राय रखने वालों की आवाज़ों को नज़रअंदाज़ किए जाने की चिंता और राज्यसभा में पार्टी के बर्ताव को लेकर निराशा अलग-अलग भावनाएं नहीं हैं।
बनर्जी ने एक सांसद के तौर पर भी अपने अनुभव का भी ज़िक्र किया।
बागी तृणमूल विधायक ने कहा, ''मैं 15 महीने तक संसद में आखिरी बेंच पर बैठा और देखा कि जूनियर नेताओं और आरटीआई कार्यकर्ताओं को आगे की सीटें दी जा रही हैं। संसद में कामकाज का प्रदर्शन कभी भी निर्णय का पैमाना नहीं रहा। मुझे सुखेंदु दा के लिए बहुत बुरा लगा, उन्हें भी आखिरी पक्ति में सीट आवंटित की गई थी।''
इसके बाद उन्होंने राज्यसभा में पार्टी के नेतृत्व पर अपना हमला तेज कर दिया, और उच्च सदन में तृणमूल कांग्रेस नेता डेरेक ओ'ब्रायन पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने ओ'ब्रायन का नाम लिए बिना कहा, ''सांसदों के लिए सीट आवंटन सदन के नेता द्वारा किया जाता है, और इस मामले में प्रभारी व्यक्ति एक क्विजमास्टर हैं जिनका ध्यान डायमंड हार्बर फुटबॉल क्लब के मामलों के प्रबंधन पर अधिक है। इस तरह के तमाशे की अनुमति क्विज कॉन्टेस्ट और दूसरी जगहों पर दी जा सकती है, लेकिन संसद में नहीं।''
उनका इशारा ओ'ब्रायन की क्विज़मास्टर के तौर पर रही पृष्ठभूमि और डायमंड हार्बर फुटबॉल क्लब की ओर था, जो 2026-27 सीजन के दौरान इंडियन सुपर लीग में स्पर्धा के लिए तैयार है और जिसके अध्यक्ष अभिषेक बनर्जी हैं।
भाषा वैभव नरेश
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