बरेली हिंसा मामले में तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज
राजेंद्र, रवि कांत रवि कांत
- 07 Jun 2026, 12:34 AM
- Updated: 12:34 AM
प्रयागराज, छह जून (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली हिंसा मामले में आरोपी तौकीर रजा खान की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा है कि उनके रिहा होने पर एक विशेष समुदाय को फिर से उकसाने और शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने का गंभीर खतरा है।
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने पांच जून को खान की जमानत याचिका खारिज करते हुए यह आदेश पारित किया।
अदालत ने कहा, ''इस मामले के संपूर्ण तथ्यों पर विचार करते हुए इस बात में कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता ने एक जनसभा में मुस्लिम समुदाय के कई युवकों को इस्लामिया इंटर कॉलेज में एकत्रित होने के लिए राजी किया।''
उच्च न्यायालय ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 163 लागू होने के बावजूद जब लोग इस्लामिया इंटर कॉलेज की ओर बढ़ रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोका। इसके बाद भीड़ ने आगजनी की, पथराव किया, पेट्रोल बम फेंके और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए।
अदालत ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और वीडियो फुटेज से यह स्पष्ट होता है कि तौकीर रजा खान ने भड़काऊ भाषण देकर लोगों को इस्लामिया इंटर कॉलेज में एकत्र होने के लिए प्रेरित किया था।
उच्च न्यायालय ने कहा, ''इसलिए भीड़ द्वारा किए गए अपराधों के लिए आवेदक मुख्य षड्यंत्रकारी के रूप में उत्तरदायी माना जाएगा।''
अदालत ने यह भी कहा कि ''गुस्ताख-ए-नबी की एक सजा, सर तन से जुदा, सर तन से जुदा'' जैसे नारे कानून के शासन के साथ-साथ भारत की संप्रभुता और अखंडता को चुनौती देते हैं, क्योंकि वे सशस्त्र विद्रोह का आह्वान करते हैं।
न्यायालय ने कहा कि ऐसा कृत्य न केवल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152 के तहत दंडनीय है, बल्कि इस्लाम की मूल शिक्षाओं के भी विपरीत है।
अदालत ने कहा, ''समान प्रकृति के मामलों में आवेदक के व्यापक आपराधिक इतिहास को देखते हुए यह आशंका प्रबल है कि रिहा होने पर वह फिर से किसी विशेष समुदाय को उकसा सकता है और शांति एवं सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। इसलिए न्यायालय उसे जमानत देने के पक्ष में नहीं है।''
पुलिस के अनुसार, 26 सितंबर को तौकीर रजा खान ने एक विशेष समुदाय के लोगों से बरेली के इस्लामिया इंटर कॉलेज में एकत्र होने का आह्वान किया था।
पुलिस ने बताया कि निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद लगभग 200 से 250 लोगों की भीड़ एकत्र हुई और मौलाना आजाद इंटर कॉलेज से श्यामगंज चौराहे की ओर बढ़ी।
प्राथमिकी के अनुसार, हाथों में तख्तियां लिए और भड़काऊ नारे लगाती भीड़ ने पुलिस की चेतावनियों और समझाइश की अनदेखी की। स्थिति तब बिगड़ गई जब आरोपी आगे बढ़ने पर अड़ गए।
पुलिस का आरोप है कि इस दौरान भीड़ ने पुलिस पर ईंट-पत्थर, पत्थर और तेजाब की बोतलें फेंकी तथा गोलीबारी भी की।
प्राथमिकी के अनुसार, हिंसा के दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दियां फट गईं और दो अधिकारी घायल हो गए।
भाषा
राजेंद्र, रवि कांत रवि कांत
0706 0034 प्रयागराज