मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेतृत्व के बीच बैठक के नतीजे का इंतजार रहेगा : रामलिंगा रेड्डी
नेत्रपाल
- 06 Jun 2026, 02:02 PM
- Updated: 02:02 PM
बेंगलुरु, छह जून (भाषा) कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने शनिवार को संकेत दिया कि वह अपने इस्तीफे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच होने वाली चर्चा के नतीजे का इंतजार करने को तैयार हैं।
रेड्डी ने कहा कि उन्होंने कभी किसी विशेष विभाग की मांग नहीं की, बल्कि उन्हें केवल इस बात से निराशा हुई कि जो आश्वासन उन्हें दिया गया था, वह पूरा नहीं किया गया।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता रेड्डी ने शुक्रवार को इस्तीफे की घोषणा की थी, क्योंकि उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग के बजाय बड़े और मध्यम सिंचाई विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शिवकुमार और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के महासचिव रणदीप सुरजेवाला समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता इस मुद्दे का समाधान निकालने के प्रयास में लगे हुए हैं।
रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा, ''सुरजेवाला ने मुझसे अपना इस्तीफा वापस लेने की अपील की है।'' साथ ही उन्होंने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने उन्हें यह भी कहा है कि उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि शुक्रवार को एक होटल में उनकी शिवकुमार के साथ विस्तृत चर्चा हुई थी और इस संबंध में आगे भी बातचीत जारी है।
रेड्डी ने कहा, ''कल शिवकुमार ने कहा था कि वह मेरे घर आएंगे, लेकिन मैं घर पर नहीं था। बाद में हम एक होटल में मिले। हमने सभी मुद्दों पर चर्चा की। आज भी मैंने सुरजेवाला से उन सभी विषयों पर बात की, जिन पर कल चर्चा हुई थी।''
उन्होंने कहा, ''अब मुख्यमंत्री और सुरजेवाला बैठक करेंगे। वे कल हमारी बातचीत के सभी मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उसके बाद वे क्या फैसला लेते हैं, देखते हैं।''
यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें कोई वैकल्पिक प्रस्ताव दिया गया है, उन्होंने कहा कि वह पहले ही पार्टी नेतृत्व के सामने अपना पक्ष रख चुके हैं।
उन्होंने कहा, ''जब कल हमारी बातचीत हुई, तब मैंने अपनी राय स्पष्ट कर दी थी। मैं कभी कुछ मांगने नहीं गया। प्रस्ताव उन्होंने स्वयं दिया था। बाद में कुछ अपरिहार्य कारणों से स्थिति बदल गई।''
वरिष्ठ नेता ने दोहराया कि उन्होंने कभी मंत्री पद या किसी विशेष विभाग के लिए पैरवी नहीं की।
उन्होंने कहा, ''मैंने कभी इसकी मांग नहीं की। प्रस्ताव उन्होंने खुद दिया था। सिर्फ अभी नहीं, बल्कि 1993 में जब मैं पहली बार मंत्री बना था, तब भी मैंने कोई पैरवी नहीं की थी। मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री से किसी विशेष विभाग की मांग नहीं की।''
जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें शिवकुमार और सुरजेवाला के बीच होने वाली चर्चा से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है, तो उन्होंने कहा, ''मुझे नहीं पता। मैं फोन करके पता करूंगा।''
उन्होंने यह भी पुष्टि की कि दोनों नेताओं ने उनसे इस्तीफे पर अड़े न रहने का आग्रह किया है।
रेड्डी ने कहा, ''दोनों ने मुझसे साफ कहा है कि वे मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकते। मैंने अपनी राय उन्हें बता दी है और वापस आ गया हूं।''
हालांकि, उन्होंने उन खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार किया जिनमें कहा जा रहा है कि सिंचाई विभाग के साथ उन्हें कोई अतिरिक्त विभाग भी दिया जा सकता है।
उन्होंने बार-बार पूछे जाने पर कहा, ''मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।''
इस सवाल पर कि क्या वह अब भी अपने इस्तीफे के फैसले पर कायम हैं, उन्होंने सीधा जवाब देने से बचते हुए कहा कि वरिष्ठ नेताओं के बीच चर्चा जारी है।
उन्होंने कहा, ''सिद्धरमैया और मुख्यमंत्री की मुलाकात हो चुकी है। कल मुख्यमंत्री के साथ जिन मुद्दों पर चर्चा हुई थी, उन्हें उनके सामने रखा जाएगा। इसके बाद वे निर्णय लेंगे।''
पार्टी नेतृत्व की समस्या सुलझाने की क्षमता पर भरोसा जताते हुए रेड्डी ने इस प्रश्न का सकारात्मक जवाब दिया कि क्या वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्धरमैया इस विवाद का समाधान निकाल सकते हैं।
उन्होंने कहा, ''हां। उनकी अगली बैठक के बाद मैं आपको बताऊंगा। पहले सुरजेवाला और मुख्यमंत्री अपनी चर्चा पूरी कर लें।''
यह इस्तीफा विवाद तीन दिन पुरानी शिवकुमार सरकार के सामने पहली बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। कांग्रेस नेतृत्व बेंगलुरु के वरिष्ठ नेता रेड्डी को मंत्रिमंडल में बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
भाषा गोला नेत्रपाल
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