एवरेस्ट से उतरते समय जान गंवाने वाले भारतीय पर्वतारोही बेहद जुनूनी थे: परिजन
संतोष
- 23 May 2026, 10:25 PM
- Updated: 10:25 PM
हैदराबाद, 23 मई (भाषा) दुनिया की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट से उतरते समय जान गंवाने वाले संदीप अरे और अरुण कुमार तिवारी पर्वतारोहण के प्रति बेहद जुनूनी थे। उनके मित्रों और परिजनों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अमेरिका में रहने वाले आईटी पेशेवर संदीप आंध्र प्रदेश के हिंदूपुर के मूल निवासी थे जबकि उत्तर प्रदेश के रहने वाले तिवारी हैदराबाद में रहते थे।
संदीप की पत्नी के भाई श्याम के अनुसार, उन्होंने 20 मई को एवरेस्ट पर्वत पर चढ़ाई की थी लेकिन 21 मई को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के कारण उनकी मौत हो गयी। उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, "हम उनके शव को वापस लाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि परिवार उनकी अंतिम झलक देख सके।"
श्याम ने बताया कि संदीप एक उत्साही पर्वतारोही थे, जिन्होंने किलिमंजारो सहित कई महाद्वीपों की चोटियों पर चढ़ाई की लेकिन उनके माता-पिता उनके साहसिक कृत्यों के खिलाफ थे।
तिवारी और संदीप को 'बूट्स एंड क्रैम्पॉन' नाम की एक भारतीय कंपनी ने प्रशिक्षित किया था, जो दुनिया भर में अभियान और ट्रेक आयोजित करती है।
एक आईटी कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे तिवारी (53) भी एक कुशल पर्वतारोही थे।
'बूट्स एंड क्रैम्पॉन' के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने कई चोटियों के अलावा माउंट एल्ब्रस (रूस), माउंट डेनाली (अमेरिका) और माउंट एकांकागुआ (अर्जेंटीना) पर चढ़ाई की थी।
सूत्रों ने बताया कि शवों को नीचे लाना एक चुनौती भरा काम है।
नेपाल अभियान संचालक संघ के महासचिव ऋषि भंडारी ने बताया कि तिवारी और संदीप शिखर से उतरते समय थक गए होंगे तथा उनके गाइडों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
भंडारी ने बताया कि ऐसा प्रतीत होता है कि संदीप ने बुधवार को और तिवारी ने बृहस्पतिवार को शाम करीब 5:30 बजे शिखर पर चढ़ाई की।
उन्होंने बताया कि गाइडों ने 'बहुत मेहनत की' लेकिन वे उन्हें बचा नहीं सके।
सूत्रों ने बताया कि तिवारी के साथ दो अनुभवी शेरपा गाइड (रिंजी व असीम) थे और वे साथ में नीचे उतरने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन हिलेरी स्टेप पर उन्हें ज्यादा थकान हो गई और गाइड उन्हें वापस नहीं ला सके।
उन्होंने बताया कि तिवारी ने 2025 में एवरेस्ट पर चढ़ाई का प्रयास किया था लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लगभग 7,200 मीटर चढ़ने के बाद रुक गये थे।
तिवारी के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष
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