महबूबा मुफ्ती ने पाकिस्तान के साथ संपर्क के मुद्दे पर होसबाले का समर्थन किया
संतोष
- 17 May 2026, 06:47 PM
- Updated: 06:47 PM
श्रीनगर, 17 मई (भाषा) पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (आरएसएस) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने रविवार को राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) के पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबाले के हालिया बयान का समर्थन किया।
होसबाले ने एक बयान में कहा था कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध को दूर करने के लिए दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है और संवाद के लिए हमेशा गुंजाइश रहनी चाहिए।
महबूबा ने यहां पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में कहा, "कश्मीर समस्या का समाधान संवाद में निहित है और वह भी संविधान के दायरे में। हमें जो भी हासिल करना है, वह दिल्ली और यहां (जम्मू और कश्मीर) से ही संभव है। हम संवाद और बातचीत में विश्वास रखते हैं। हम गरिमापूर्ण शांति चाहते हैं।"
जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री ने पाकिस्तान के साथ संवाद और लोगों के बीच संपर्क की आवश्यकता पर होसबाले के बयान का स्वागत किया।
इस बयान का पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे ने भी समर्थन किया था।
संघ के महासचिव ने हाल ही में 'पीटीआई-वीडियो' सेवा को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान के सैन्य व राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब समय आ गया है कि नागरिक समाज आगे बढ़कर नेतृत्व करे, "क्योंकि हमारे बीच सांस्कृतिक संबंध हैं और हम एक राष्ट्र रहे हैं।"
महबूबा ने कहा, "होसबाले ने जो कहा है, वही बात (पीडीपी के संस्थापक) मुफ्ती मोहम्मद सईद ने अपनी अंतिम सांस तक कही थी। कश्मीर के दूसरी ओर पाकिस्तान, चीन और मध्य एशिया की ओर जाने वाले हमारे रास्ते खोले जाएं । अगर (नरेन्द्र) मोदी जी अपना नाम रोशन करना चाहते हैं, तो उन्हें कश्मीर मुद्दे का समाधान करना चाहिए और इस प्रक्रिया में पाकिस्तान को शामिल करना चाहिए।"
उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए प्रधानमंत्री को जम्मू-कश्मीर के लोगों से बातचीत शुरू करनी चाहिए और इस प्रक्रिया में पाकिस्तान को भी शामिल करना चाहिए।
महबूबा ने कहा, "मैं यह नहीं कह रही कि नरेन्द्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने 2016 में लाहौर का दौरा किया था लेकिन उसके बाद पठानकोट हमला हुआ। भारत की ओर से पाकिस्तान को किसी भी तरह की पहल का सकारात्मक जवाब देना होगा।"
उन्होंने कहा कि दिल्ली को कश्मीरियों की आवाज सुननी होगी।
भाषा जितेंद्र संतोष
संतोष
1705 1847 श्रीनगर