नेपाल के पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने 32वीं बार माउंट एवरेस्ट को फतह किया, अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा
नरेश
- 17 May 2026, 07:32 PM
- Updated: 07:32 PM
(शिरीष बी. प्रधान)
काठमांडू, 17 मई (भाषा) नेपाल के पर्वतारोही कामी रीता शेरपा ने रविवार को दुनिया की सबसे ऊंची पर्वत चोटी 'माउंट एवरेस्ट' को 32वीं बार फतह करके इतिहास रच दिया।
शेरपा ने एवरेस्ट पर सबसे अधिक बार सफलतापूर्वक चढ़ाई करने का अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पर्यटन विभाग के अनुसार, 56 वर्षीय अनुभवी पर्वतारोही रविवार पूर्वाह्न 10 बजकर 12 मिनट पर 8,849 मीटर ऊंचे शिखर पर पहुंचे।
विभाग ने बताया कि शेरपा '14 पीक्स एक्सपेडिशन' द्वारा संचालित एक अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
काठमांडू पोस्ट की खबर के अनुसार, एवरेस्ट आधार शिविर स्थित पर्यटन विभाग के फील्ड कार्यालय ने सफलतापूर्वक चढ़ाई करने की पुष्टि की।
जनवरी 1970 में कोशी प्रांत के सोलुखुम्बु जिले के एक गांव में जन्मे कामी रीता ने 1992 में एक पेशेवर पर्वतारोही के रूप में अपना करियर शुरू किया था।
पर्यटन विभाग ने शेरपा को बधाई देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि नेपाल के पर्वतारोहण क्षेत्र और देश की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाती है।
कामी रीता ने सागरमाथा (नेपाली में इस चोटी का नाम) पर 2023 और 2024 में दो-दो बार चढ़ाई की थी। उन्होंने 27 मई 2025 को 31वीं बार इस पर चढ़ाई की।
वर्ष 1994 और 2025 के बीच कामी रीता ने के2 और माउंट ल्होत्से पर एक-एक बार, मनास्लू पर तीन बार और छो ओयू पर आठ बार चढ़ाई की। ये सभी चोटियां 8,000 मीटर से अधिक ऊंचाई की हैं।
शेरपा ने पहली बार 1994 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की थी। उन्होंने 27 मई, 2025 को एवरेस्ट पर 31वीं बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की।
इसी से संबंधित एक अन्य घटना में रविवार को 'पर्वत रानी' नाम से मशहूर और माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वालीं नेपाल की पहली महिला ल्हाकपा शेरपा ने शिखर पर11वीं बार सफल चढ़ाई पूरी करके अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पर्यटन विभाग ने बताया कि ल्हाकपा रविवार सुबह साढ़े नौ बजे शिखर पर पहुंचीं।
प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने उन्हें बधाई दी और कहा, "ऐसी ऐतिहासिक सफलता केवल अटूट साहस, कठोर आत्म-अनुशासन और अपने काम के प्रति ईमानदार समर्पण के माध्यम से ही प्राप्त की जा सकती है।"
शाह ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, "माउंट एवरेस्ट महज एक भौगोलिक ऊंचाई नहीं है; यह नेपाल के आत्मसम्मान, साहस, धैर्य और हिमालयी सभ्यता का सर्वोच्च प्रतीक है। आज इस गौरवशाली पर्वत पर नेपाली पर्वतारोहियों ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।"
प्रधानमंत्री ने नेपाल के पर्वतारोहण इतिहास में शेरपा समुदाय के योगदान की सराहना करते हुए इसे "असाधारण और अद्वितीय" बताया।
शेरपाओं को "हिमालय के सच्चे गुमनाम नायक" बताते हुए उन्होंने कहा, "उनके साहस, ज्ञान और परिश्रम के बिना पहाड़ों की शान अधूरी रह जाती है। मुझे विश्वास है कि उनकी यह सर्वोच्च उपलब्धि नेपाल के पर्वतीय पर्यटन को और भी अधिक विश्वसनीय, प्रतिष्ठित और आकर्षक बनाएगी, साथ ही वैश्विक मंच पर नेपाल की पहचान को और भी रोशन करेगी।"
भाषा
शुभम नरेश
नरेश
1705 1932 काठमांडू