साल 2025-26 में ट्रेन से पटरी से उतरने की 28 में 18 घटनाएं 'टर्नआउट' पर हुईं: रेलवे बोर्ड
मनीषा
- 06 May 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) रेलमार्ग के रखरखाव के लिए 'टर्नआउट' पर विशेष ध्यान दिये जाने का उल्लेख करते हुए रेलवे बोर्ड ने कहा है कि 2025-26 में ट्रेन के पटरी से उतरने की 28 घटनाओं में से 18 उन स्थानों पर पर हुईं जहां रेलगाड़ी एक पटरी से दूसरी पटरी पर जाती हैं।
पटरी बदलने के इस 'टर्नआउट' को पॉइंट्स और 'क्रॉसिंग्स' भी कहा जाता है। ये रेलमार्ग के ऐसे हिस्से हिस्से होते हैं जहां से ट्रेन एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर जाती हैं।
रेलवे बोर्ड ने अपने सभी मंडलों को भेजे पत्र में कहा है, '' 2025-26 के दौरान इंजीनियरिंग कारणों (ट्रैक से जुड़ी समस्याओं) से ट्रेन के पटरी से उतरने की 28 घटनाओं में से 18 मामले (लगभग 65 प्रतिशत) टर्नआउट पर हुए हैं। इसलिए, रेलमार्ग के रखरखाव में टर्नआउट पर मुख्य रूप से ध्यान देना जारी रखना चाहिए।''
बोर्ड ने मुख्य मार्ग अभियंताओं एवं सदस्यों (अवसंरचना) के बीच एक बैठक के दौरान हुई चर्चा का जिक्र करते हुए कहा, '' सिम्स (सुरक्षा सूचना प्रबंधन प्रणाली) में दर्ज पटरी से उतरने की घटनाओं के अंतिम कारणों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि फील्ड अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को पटरी से उतरने के कारणों की सही पहचान करने और उनका विश्लेषण करने के लिए बेहतर परामर्श और मार्गदर्शन की आवश्यकता है। ''
बैठक के दौरान, रेलवे बोर्ड के सदस्य (अवसंरचना) ने अधिकारियों से पटरियों के रखरखाव को उच्च गुणवत्ता के साथ सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा।
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अब नवीनीकरण-आधारित सोच से हटकर रखरखाव-आधारित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है, क्योंकि समय पर किया गया रखरखाव विश्वसनीयता को बढ़ाता है, पटरियों की सेवा-अवधि में सुधार करता है और समय से पहले नवीनीकरण की जरूरत को कम करता है।
मंडलों से कहा गया है कि वे फील्ड निरीक्षण बढ़ाएं, विशेष रूप से संवेदनशील स्थानों जैसे कि 'टर्नआउट', पुल, लेवल क्रॉसिंग (रेलवे फाटकों), ऊंचे तटबंध और तीखे मोड़ों पर—खासकर उन जगहों पर जहां एक से ज़्यादा कमज़ोरियां हैं।
पत्र में कहा गया है, ''रखरखाव की गुणवत्ता ऐसी होनी चाहिए जो टिकाऊपन सुनिश्चित करे, ताकि किसी जगह पर एक बार काम हो जाने के बाद, उस पर बार-बार ध्यान देने की ज़रूरत न पड़े। जिन जगहों पर बार-बार ध्यान देने की ज़रूरत पड़ती है, उनकी गहन जांच की जानी चाहिए और बार-बार आने वाली समस्याओं को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए वैकल्पिक तरीके अपनाए जाने चाहिए।''
मंडलों को निर्देश दिया गया है कि कि वे पटरी से जुड़े पुराने कामों की निगरानी करें और उन्हें तेज़ी से पूरा करें। बोर्ड ने कहा कि मौजूदा 141 कार्य 10 साल से भी ज़्यादा पुराने हैं और उन्हें पूरा करने के लिए 1,334 करोड़ रुपये की ज़रूरत है।
भाषा राजकुमार नरेश मनीषा
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