दिल्ली की रिहायशी इमारत में लगी आग में सेंट्रल लॉकिंग, लोहे की ग्रिल जानलेवा साबित हुई
सुरेश
- 03 May 2026, 07:49 PM
- Updated: 07:49 PM
(मानषी जगानी)
नयी दिल्ली, तीन मई (भाषा) दिल्ली में रविवार तड़के लगी भीषण आग में नौ लोगों के लिए सेंट्रल लॉक सिस्टम, लोहे की मोटी ग्रिल और एकमात्र आंतरिक निकास मार्ग के रूप में काम करने वाली सीढ़ी प्राणघातक साबित हुई।
विवेक विहार फेज-एक में स्थित चार मंजिला इमारत में रविवार तड़के करीब 3.48 बजे कथित तौर पर वातनुकूलन में धमाका होने से आग लग गई, जो तेजी से ऊपर की मंजिलों पर पीछे के फ्लैट में फैल गई। धुएं और आग की लपटों की वजह से निवासी अंदर फंस गए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि आग लगने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और इसकी वजह से 'सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम' से बंद दरवाजे खोलना मुश्किल हो गया था, जबकि लिफ्ट भी काम नहीं कर रही थी। उन्होंने बताया कि पीछे की ओर मोटी लोहे की ग्रिल और बंद बालकनियों ने निकासी और बचाव प्रक्रिया को और भी जटिल बना दिया था।
बचाव अभियान में शामिल एक अग्निशनकर्मी ने बताया, ''वहां एक सीढ़ी है जो प्रवेश और निकास दोनों के लिए इस्तेमाल होती है। पीछे के गेट पर ग्रिल लगा हुआ था, जिसे हमें औजारों की मदद से काटना पड़ा।''
उन्होंने बताया कि लगभग 15 लोगों को बचाने के लिए टीम ने अलग-अलग दिशाओं से सीढ़ियां लगाईं, साथ ही एक वाहन से जुड़ी वैसी सीढ़ी का इस्तेमाल किया, जो घूमती हो।
इमारत में भूतल पर पार्किंग की जगह थी, उसके ऊपर आठ फ्लैट थे, जिनमें से चार आगे और चार पीछे की तरफ थे, सीढ़ियों के बगल में एक लिफ्ट थी, घरेलू सहायकों के क्वार्टर थे, और एक संकरा पिछला गेट था, जो आसपास की इमारतों और ऊपर से गुजरने वाले तारों से घिरी एक तंग पिछली गली में खुलता था।
एक गैर-लाभकारी आपदा प्रबंधन दल के सदस्य संजीव राणा ने बचाव अभियान के बारे में कहा, ''हमें सुबह लगभग छह बजे फोन आया। जब हम अग्निशमन विभाग के कर्मियों के साथ ऊपर गए, तो हमने सबसे पहले दूसरी मंजिल पर एक जला हुआ शव देखा, फिर अगली मंजिल पर पांच शव देखे। उसके बाद, हम सबसे ऊपरी मंजिल पर गए।''
उन्होंने बताया कि सबसे ऊपरी मंजिल पर तीन लोगों ने खुद को बचाने की कोशिश की थी, लेकिन वे भाग नहीं सके, क्योंकि छत की ओर जाने वाले दरवाजे में 'सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम' लगी थी।
राणा ने कहा, ''वे बाहर नहीं निकल सके। मां और बेटे के शव छत की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर एक-दूसरे को पकड़े हुए मिले। यह दृश्य दिल दहला देने वाला था।''
पड़ोसियों ने बताया कि इलाके के कई घरों में चोरी से बचाव के लिए 'सेंट्रल लॉकिंग सिस्टम' लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रणाली अक्सर बिजली पर निर्भर होती हैं, और आपात स्थिति में बिजली गुल हो जाने पर, लोग अंदर फंस सकते हैं जब तक कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से खोला न जाए।
एक पड़ोसी ने सवाल किया, ''लोग ये सब इसलिए लगाते हैं ताकि वे चोरों से सुरक्षित रहें। लेकिन आपदा के दौरान उनकी अपनी सुरक्षा का क्या होगा?''
स्थानीय निवासियों ने कहा कि पीछे की तरफ लोहे की ग्रिल और जाली मुख्य रूप से चोरी रोकने और कबूतरों को दूर रखने के लिए लगाई गई थी।
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश
0305 1949 दिल्ली