ओडिशा कंकाल मामला: पटनायक ने सीतारमण से हस्तक्षेप का अनुरोध किया, भाजपा ने उठाया दाना माझी का मुद्दा
नेत्रपाल
- 02 May 2026, 09:45 PM
- Updated: 09:45 PM
भुवनेश्वर, दो मई (भाषा) बीजू जनता दल (बीजद) के प्रमुख नवीन पटनायक ने ओडिशा की एक घटना से जुड़े मामले में शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से "सहानुभूतिपूर्वक हस्तक्षेप" का अनुरोध किया है, जिसमें एक व्यक्ति ने पैसा निकालने के लिए अपनी बहन का कंकाल निकालकर सबूत के तौर पर ग्रामीण बैंक के सामने पेश किया था।
पटनायक ने एक पत्र में सीतारमण से हाल ही में क्योंझर जिले में हुई इस घटना में तत्काल स्पष्ट जवाबदेही तय करने का आग्रह भी किया।
उन्होंने कहा, "मैं आपसे इस स्तब्धकारी घटना के लिए तत्काल स्पष्ट जवाबदेही सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं। इससे सभी ग्रामीण बैंकों को यह संदेश जाएगा कि वे नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को सहानुभूति और संवेदनशीलता के साथ सुनिश्चित करें।"
पटनायक ने यह विश्वास भी जताया कि सीतारमण के ''संवेदनशील हस्तक्षेप'' से देश में कहीं भी लोगों के साथ इस तरह का अमानवीय व्यवहार दोबारा नहीं होगा।
बीजद प्रमुख ने कहा कि उन्होंने 27 अप्रैल को ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपोसी शाखा में हुई घटना के संबंध में गहरी पीड़ा के साथ यह पत्र लिखा है।
पटनायक के अनुसार, जीतू मुंडा नामक व्यक्ति को बैंक से पैसे निकालने के लिए अपनी बहन का शव कब्र से निकालकर बैंक तक ले जाने के लिए मजबूर किया गया, ताकि उसकी मृत्यु का प्रमाण प्रस्तुत किया जा सके।
आदिवासी व्यक्ति मुंडा ने अपनी बहन कालरा मुंडा (56) के कंकाल अवशेषों को कब्र से निकाला, जिसकी जनवरी में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद वह करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लिपोसी शाखा तक पहुंचा और अधिकारी के सामने अवशेषों को उसकी मृत्यु के प्रमाण के रूप में पेश किया।
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
पटनायक ने मामले में राज्य सरकार की जांच के निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी व्यक्ति को अपनी समस्या के समाधान के लिए कई बार बैंक के चक्कर लगाने पड़े, लेकिन अधिकारियों से न तो कोई सहायता मिली और न ही स्पष्टता। इसी के चलते उसे बहन का कंकाल साथ लेकर जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बीजद प्रमुख ने कहा, ''और भी चौंकाने वाली बात यह है कि बैंक ने इस अमानवीय व्यवहार को आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन बताकर सही ठहराने की कोशिश की। इससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक अधिकारियों ने लोगों की सेवा करने के अपने दायित्व को नजरअंदाज करने की मंशा जाहिर की।"
सीतारमण को लिखे पटयनाक के पत्र पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने बीजद अध्यक्ष पर निशाना साधा और एक दशक पुराने 'दाना माझी' मामले की याद दिलाई।
उन्होंने कहा, "दाना माझी मामले में क्या हुआ था? उस समय पटनायक ही मुख्यमंत्री थे। क्योंझर का मामला बैंकिंग प्रणाली से जुड़ा है, जिसमें बैंक अधिकारियों ने ठीक से काम नहीं किया। लेकिन दाना माझी का मामला राज्य सरकार से जुड़ा था।"
भाजपा की ओडिशा इकाई के नेताओं ने 16 अगस्त 2016 की उस घटना का जिक्र किया, जब कालाहांडी जिले में आदिवासी व्यक्ति दाना माझी को अस्पताल में एंबुलेंस नहीं मिलने पर अपनी पत्नी का शव कंधे पर उठाकर ले जाना पड़ा था।
पटनायक को "पत्र लिखने वाला नेता" बताते हुए हरिचंदन ने कहा, "बीजद नेता लोगों के लिए पत्र लिखने और सोशल मीडिया पर शोर मचाने से ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। हमारे मुख्यमंत्री ने सक्रिय कदम उठाते हुए जांच के आदेश दिए और तुरंत कार्रवाई की।"
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और उपमुख्यमंत्री प्रवाती परिदा ने भी 30 अप्रैल को राजनीति में महिला आरक्षण पर चर्चा के लिए विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाया था।
इस बीच, ओडिशा ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि यदि बैंक प्रबंधक के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई तो इसका कड़ा विरोध किया जाएगा।
एसोसिएशन के अध्यक्ष मानभंजन मिश्रा ने कहा, "बैंक प्रबंधक ने नियमों के अनुसार काम किया। मृत्यु प्रमाणपत्र और वैध उत्तराधिकार प्रमाणपत्र के बिना मृत व्यक्ति के खाते से पैसा कैसे निकाला जा सकता है? अगर कोई कार्रवाई हुई तो हम विरोध करेंगे।"
वहीं, ओडिशा के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने एसोसिएशन के इस रुख की आलोचना करते हुए पूरे मामले के लिए बैंक प्रबंधक को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा, "आरडीसी जांच रिपोर्ट आने दें, जिसमें शुरुआती तौर पर बैंक अधिकारियों को दोषी पाया गया है। राज्य सरकार संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सिफारिश करेगी।"
पुजारी ने यह भी कहा कि अगर बैंक राज्य सरकार के अधीन होता, तो संबंधित अधिकारी को अब तक निलंबित कर दिया गया होता।
इस बीच, पटनायक ने 'फिजिक्स वाला' के संस्थापक और सीईओ अलख पांडे की भी सराहना की, जिन्होंने जीतू मुंडा को 10 लाख रुपये दान किए।
पटनायक ने पांडे को लिखे पत्र में कहा, ''आपने जीतू मुंडा को 10 लाख रुपये दान देकर मानवता दिखाई, जिससे मैं बहुत से प्रभावित हूं। उसने अपनी बहन के अवशेषों को कब्र से निकालकर बैंक में मृत्यु के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करने जैसी दुखद परिस्थिति का सामना किया।''
उन्होंने कहा, ''यह दिल दहला देने वाली घटना हम सभी की अंतरात्मा को झकझोर देने वाली है। आपकी करुणा और उदारता का यह महान कार्य मानवता की एक मिसाल है, और मैं इसकी दिल से सराहना करता हूं।''
इस पर जवाब देते हुए पांडे ने लिखा, ''आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और आशीर्वाद के लिए धन्यवाद। आपकी सराहना से मैं अभिभूत हूं। कठिन समय में मानवता के साथ खड़ा होना ही हम सबका कर्तव्य है।''
भाषा जोहेब नेत्रपाल
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