फारूक अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल में चुनाव संचालन को लेकर निर्वाचन आयोग की आलोचना की
मनीषा
- 29 Apr 2026, 05:11 PM
- Updated: 05:11 PM
(सुमीर कौल)
श्रीनगर, 29 अप्रैल (भाषा) जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान बड़ी संख्या केंद्रीय पुलिस बलों और नौकरशाहों की तैनाती किए जाने पर निर्वाचन आयोग की आलोचना करते हुए पूछा कि क्या बंगाली लोगों पर भरोसा नहीं किया जा रहा है?
सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ राष्ट्रीय नेताओं द्वारा दिए गए बयानों की निंदा करते हुए भाषा को ''असंसदीय और राष्ट्र के लिए अनुपयुक्त'' करार दिया।
इस बात पर जोर देते हुए कि एक मजबूत भारत के लिए अपने नागरिकों का सम्मान करना आवश्यक है, उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ''यदि आप एक मजबूत भारत चाहते हैं, तो बंगालियों को बिना किसी दबाव के अपना नेतृत्व चुनने का अधिकार है।''
अब्दुल्ला ने राज्य चुनावों और क्षेत्रीय पहचानों के प्रति सरकार के कुछ वर्गों के दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना की, विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि क्या पश्चिम बंगाल के लोगों के साथ उनके अपने देश के भीतर ''बाहरी लोगों की तरह व्यवहार किया जा रहा है''।
पश्चिम बंगाल में चुनाव के दौरान केंद्रीय पुलिस बलों की भारी तैनाती और नौकरशाहों के फेरबदल का जिक्र करते हुए अब्दुल्ला ने इसके पीछे के इरादे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, ''...जम्मू कश्मीर से भी बड़ी संख्या में बलों को यह कहकर भेजा गया है कि वे शांतिपूर्ण चुनाव चाहते हैं... अधिकारियों को राज्यों से स्थानांतरित किया गया है। किसलिए? क्या बंगाली लोगों पर भरोसा नहीं है? क्या वह (पश्चिम बंगाल) राष्ट्र का हिस्सा नहीं है?''
अब्दुल्ला ने पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रियाओं की संस्थागत निगरानी के संबंध में खुलकर अपनी बात रखी और चुनाव निकाय के प्रति निराशा व्यक्त की।
उन्होंने कहा, ''निर्वाचन आयोग ने जिस तरह से इस स्थिति को संभाला है, उस पर मुझे तरस आता है।''
भाजपा का नाम लिए बिना उन्होंने कहा, ''वे अब तक सफल नहीं हुए हैं। मुझे नहीं पता कि परिणाम क्या होंगे, लेकिन जो भी हो, हमें ऐसी चीजें नहीं करनी चाहिए।''
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए बुधवार को दूसरे और अंतिम दौर का मतदान हुआ। परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
वहीं, अलगाववादियों के घटते दायरे के बारे में अब्दुल्ला ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से मौजूद अलगाववाद का खतरा ''धीरे-धीरे घटकर न्यूनतम स्तर पर आ गया है''।
इसके विपरीत, अब्दुल्ला ने देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव को एक बड़ा खतरा बताया। उन्होंने कहा, ''आज हमें अलगाववाद की चिंता नहीं है... बल्कि हमें अपने देश में उभर रही सांप्रदायिक प्रवृत्ति की चिंता है, जहां राजनीतिक सत्ता के लिए समुदायों को धार्मिक आधार पर बांटा जा रहा है।''
तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला ने कहा कि यह प्रवृत्ति न केवल जम्मू कश्मीर के लिए बल्कि पूरे देश की स्थिरता के लिए भी खतरा है।
जम्मू कश्मीर से लेकर तमिलनाडु तक के क्षेत्रों में भाषा तथा संस्कृति में मौजूद व्यापक अंतर की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी ''विविधता में एकता'' में निहित है।
उन्होंने कहा, ''हम एकजुट हुए बिना कभी विश्वगुरु नहीं बन सकते। एकजुट न होना ही खतरा है।''
अब्दुल्ला ने इस बात पर जोर दिया कि देश को एकजुट रखने वाली एकमात्र चीज कठिन समय में एक-दूसरे की मदद करने की सामूहिक इच्छाशक्ति है।
उन्होंने कहा, ''इस कठिन समय में एक-दूसरे की मदद करके हम सब मिलकर एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।''
भाषा नेत्रपाल मनीषा
मनीषा
2904 1711 श्रीनगर