वकील, गवाह व न्यायाधीश सभी केजरीवाल तो न्यायिक व्यवस्था की जरूरत क्या है: रेखा गुप्
वैभव
- 27 Apr 2026, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कथित शराब घोटाले से संबंधित मामले में उच्च न्यायालय में अपनी पैरवी नहीं करने की 'आप' प्रमुख अरविंद केजरीवाल की घोषणा को सोमवार को 'घटिया मजाक' बताया और कहा कि बेगुनाही शोर मचाने से नहीं बल्कि अदालत के फैसले से साबित होगी।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा को पत्र लिखकर कहा है कि आबकारी मामले में न तो वह व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के माध्यम से उनके समक्ष पेश होंगे।
'आप' नेता ने न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा से मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने की अपील की थी, लेकिन उन्होंने केजरीवाल की याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद केजरीवाल ने चार पन्नों के एक पत्र में ''न्याय नहीं मिलने'' की ओर इशारा करते हुए कहा कि इस मामले को लेकर उनकी ''गंभीर'' चिंताएं हैं।
उन्होंने कहा, "अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनते हुए, गांधी जी के सिद्धांतो को मानते हुए और सत्याग्रह की भावना के साथ, मैंने फ़ैसला किया है कि मैं इस मामले में उनके सामने पेश नहीं होऊंगा और कोई दलील भी नहीं रखूंगा।"
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए गुप्ता ने यहां पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया कि हमेशा न्याय व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न लगाना और संवैधानिक संस्थाओं को "गाली" देना, यही केजरीवाल की कार्यशैली है और यही उनकी मानसिकता बन गई है।
गुप्ता ने कहा कि अदालत में पेश न होने की बात करना और किसी न्यायाधीश पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था की गरिमा को भी ठेस पहुंचाता है।
उन्होंने कहा कि केजरीवाल का पूरा रवैया 'न खाता न बही, केजरीवाल जो कहे वह सही' जैसा हो गया है।
गुप्ता ने दावा किया कि पूर्व मुख्यमंत्री शराब घोटाले में लिप्त हैं और उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर है और वह न्यायपालिका पर सवाल उठाकर न्यायाधीश और अदालत बदलवाना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें आशंका है कि अदालत का फैसला उनके खिलाफ आ सकता है।
उन्होंने पूछा कि अदालत में अपनी पैरवी नहीं करने का केजरीवाल का व्यवहार और न्यायमूर्ति पर इल्जाम लगाना क्या उन्हें शोभा देता है?
गुप्ता ने कहा, "केजरीवाल साहब कहते हैं कि वकील भी हम हैं, गवाह भी हम हैं और न्यायाधीश भी हम हैं। सबकुछ वही हैं तो इस न्यायिक व्यवस्था की जरूरत क्या है।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "एक चोर, ऊपर से मचाए शोर। शोर मचा मचा कर यह दिखाना चाहते है कि वह (केजरीवाल) बेगुनाह हैं। बेगुनाही के तो सबूत और बेगुनाही की परीक्षा तो अदालतों में देनी पड़ेगी।"
गुप्ता ने कहा कि केजरीवाल द्वारा अदालत में अपनी पैरवी नहीं करना और सत्याग्रह की बात करना 'एक घटिया मजाक' है जिसे मजाक न तो दिल्ली की जनता पसंद करती है और न ही न्यायिक व्यवस्था इसकी इजाजत देती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा, " ('आप' प्रमुख द्वारा) स्वयं की तुलना महात्मा गांधी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों से करना अत्यंत आपत्तिजनक और शर्मनाक है। देश के इन महान नायकों के नाम का इस प्रकार उपयोग करना उनकी गरिमा का अपमान है।"
वहीं राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रहित में जो भी ईमानदार लोग आगे आकर देश निर्माण में योगदान देना चाहते हैं, उनका स्वागत किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने 'आप' छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सात राज्यसभा सदस्यों का भी स्वागत किया।
लोकसभा में महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक पारित नहीं होने के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने के लिए मंगलवार को बुलाए गए विधानसभा के विशेष सत्र को लेकर गुप्ता ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने पूरे महिला समाज के साथ विश्वासघात किया है।
उन्होंने कहा कि इसी की निंदा करने के लिए यह विशेष सत्र बुलाया गया है, और इसमें विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया जाएगा।
इस बीच दिल्ली भाजपा प्रमुख वीरेंद्र सचदेवा ने केजरीवाल द्वारा उच्च न्यायालय की न्यायाधीश को पत्र लिखने की निंदा करते हुए कहा कि 'आप' नेता के इस कृत्य से पता चलता है कि उनमें न्यायपालिका के प्रति कोई सम्मान या विश्वास नहीं है।
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