चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री मोदी का 'झालमुरी' खरीदने के लिए रुकना 'नौटंकी' : ममता
रंजन
- 20 Apr 2026, 10:58 PM
- Updated: 10:58 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, 20 अप्रैल (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को आरोप लगाया कि झाड़ग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का अचानक "झालमुरी" खरीदने के लिए रुकना सिर्फ एक "नौटंकी" था।
बीरभूम जिले के मुरारई विधानसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री बिना किसी पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अचानक झालमुरी खरीदने के लिए रुके थे, तो उस समय वहां कैमरे कैसे मौजूद थे? पूरा घटनाक्रम पहले से तय था।"
तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ने इस घटनाक्रम का लाभ उठाते हुए प्रधानमंत्री पर आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) लोगों की खानपान की आदतों पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने सवाल किया, "आपको (मोदी) अचानक झालमुरी पसंद आने लगी है। लेकिन भाजपा शासित राज्यों में लोगों को मछली और मटन खाने से क्यों रोका जा रहा है?"
प्रधानमंत्री ने रविवार को अपने आधिकारिक 'एक्स' अकाउंट पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह झाड़ग्राम की एक साधारण-सी दुकान से 'झालमुरी' खरीदते दिखाई दे रहे थे। इस दौरान उनके सुरक्षाकर्मी भी साथ थे।
वीडियो में देखा जा सकता है कि मोदी 'झालमुरी' के लिए दुकानदार को भुगतान करते हैं और जब दुकानदार रुपये लेने से इनकार करता है, तो वह जोर देकर कहते हैं कि उसे रुपये स्वीकार करने चाहिए।
पूरे घटनाक्रम की सहजता पर सवाल उठाते हुए ममता ने कहा, "वहां कैमरे पहले से ही लगा दिए गए थे। एसपीजी (प्रधानमंत्री को सुरक्षा प्रदान करने वाला बल) ने पूरी व्यवस्था की थी।"
उन्होंने दावा किया, "प्रधानमंत्री को अपनी जेब में 10 रुपये का नोट रखे देखा गया था। क्या यह विश्वास करने लायक है? यह सब नौटंकी है।"
खारदाहा विधानसभा क्षेत्र में एक अन्य रैली को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "हर किसी को अपनी पसंद का खाना खाने का अधिकार है। मुझे लिट्टी और ढोकला, सब कुछ पसंद है। तो आपको मांसाहारी खाना क्यों बंद कर देना चाहिए?"
उन्होंने कहा, "हम कभी किसी की खानपान की आदतों को नियंत्रित करने की कोशिश नहीं करते। (पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव) जीतने के बाद मैं बंगाल आने वाले हर भाजपा नेता को तिलेर नारू (तिल के लड्डू) और खीरेर नारू (मावे के लड्डू) भेजूंगी।"
कोलकाता में एक चुनावी सभा में ममता ने दावा किया कि प्रधानमंत्री अपनी चुनावी सभाओं का कार्यक्रम इस तरह से बनाते हैं कि वह राज्य के एक हिस्से में रैली को संबोधित करते हैं, लेकिन उसी दिन दूसरे हिस्से में मतदान करने वाले लोगों को प्रभावित कर सकें, जो "नियमों के खिलाफ" है।
उन्होंने आरोप लगाया, "चूंकि, निर्वाचन आयोग उनके नियंत्रण में है, इसलिए वे जो चाहें कर सकते हैं।"
तृणमूल सुप्रीमो ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभ्यास का जिक्र करते हुए निर्वाचन आयोग पर "भाजपा के इशारे पर पहले लाखों नाम हटाने और फिर ऐसे लोगों को घुसपैठिया करार देने" का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "लेकिन उच्चतम न्यायालय के निर्देश के मद्देनजर और मेरे संघर्ष के कारण, तार्किक विसंगति की श्रेणी में शामिल किए गए 60 लाख मतदाताओं में से 32 लाख के नाम मतदाता सूची में बरकरार रखे गए हैं।"
ममता ने कहा, "देर-सवेर, सभी वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में फिर से दर्ज हो जाएंगे। भाजपा को याद रखना चाहिए कि शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि लंबित मामलों का निपटारा न्यायाधिकरण करेंगे।"
ममता ने भाजपा पर "विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में अल्पसंख्यक समुदाय से निर्दलीय उम्मीदवारों को मैदान में उतारने में कुछ गद्दारों की गुप्त रूप से मदद करने" का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा, "मेरे इलाके भवानीपुर में भी ऐसा ही हुआ है। वे मुर्शिदाबाद और मालदा से आए हैं।"
ममता ने कहा, "उन्होंने (भाजपा नेताओं) धर्म का व्यवसायीकरण कर दिया है। मैं मानवता का सम्मान करती हूं। मैं धर्मनिरपेक्षता में विश्वास रखती हूं। मैं हर धर्म, जाति, पंथ और भाषा का सम्मान करती हूं। लेकिन जिन्होंने अपने ही लोगों के साथ विश्वासघात किया है, हमारी पार्टी के साथ विश्वासघात किया है, उन्हें जनता अस्वीकार कर देगी।"
विधायिका में 2029 से महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू करने वाले संविधान संशोधन विधेयक के लोकसभा में गिर जाने के बारे में ममता ने कहा, "हमने हमेशा महिलाओं के लिए आरक्षण की खातिर लड़ाई लड़ी है। हमें महिलाओं को सीटें देने के लिए किसी विधेयक की जरूरत नहीं है। पंचायतों और नगरपालिकाओं में महिलाओं के लिए पहले से ही 50 फीसदी आरक्षण है।"
तृणमूल सुप्रीमो ने कहा, "लोकसभा में हमारी पार्टी की 37 फीसदी महिला सदस्य हैं। राज्यसभा में हमारी पार्टी की महिला सदस्यों की संख्या 46 प्रतिशत है। प्रधानमंत्री मोदी को हमसे सबक लेना चाहिए। उन्हें महिलाओं का अपमान करने का कोई अधिकार नहीं है। हम 1998 से इसके लिए लड़ रहे हैं। मैंने लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक के लिए लड़ाई लड़ी थी।"
उन्होंने आरोप लगाया, "महिला आरक्षण विधेयक के नाम पर वे देश को बांटना चाहते थे। वे बंगाल को भी बांटना चाहते थे।"
ममता ने विधेयक को लोकसभा में पारित कराने में भाजपा की विफलता को "प्रधानमंत्री मोदी के पतन की शुरुआत" करार दिया। उन्होंने कहा, "बंगाल में जीत के बाद हम केंद्र में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर देंगे।"
ममता ने आरोप लगाया कि "निर्वाचन आयोग ने कुछ तृणमूल नेताओं की सूची तैयार की है, जिन्हें मतदान से एक दिन पहले झूठे आधार पर गिरफ्तार करने या हिरासत में लेने की योजना है।"
तृणमूल सुप्रीमो ने कहा, "उन्होंने (निर्वाचन आयोग) राज्य से वाकिफ अधिकांश प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया है तथा उनकी जगह हरियाणा, ओडिशा, त्रिपुरा और बिहार जैसे राज्यों से अपने लोगों को लाकर नियुक्त किया है, ताकि दिल्ली में अपने आकाओं की ओर से जारी आदेशों को यहां लागू कर सकें।"
ममता ने कहा, "ये अधिकारी सबको धमका रहे हैं। हमारी पार्टी के दफ्तरों पर अभी भी छापे पड़ रहे हैं। आयकर विभाग को हमारे उम्मीदवारों के दफ्तरों पर छापा मारने के लिए भेजा जा रहा है। अगर उनमें हिम्मत है, तो वे मुझसे सीधे मुकाबला करें।"
चुनाव के लिए बंगाल में केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के बारे में उन्होंने कहा, "आप (पिछले साल) पहलगाम आतंकवादी हमले को रोकने में नाकाम रहे। लेकिन आप (भाजपा) बंगाल में चुनाव कराने के लिए बख्तरबंद गाड़ियां ला रहे हैं। क्या इसका मकसद लोगों को डराना और उनमें दहशत पैदा करना है?"
ममता ने कहा, "उन्होंने हेरफेर करके महाराष्ट्र और बिहार में जीत हासिल की। बिहार चुनावों को प्रभावित करने के लिए वे बाहर से भारी संख्या में लोगों को ट्रेन में भरकर ले गए।"
उन्होंने लोगों से "सतर्क रहने और बंगाल में भाजपा की रणनीति को विफल करने" का आग्रह किया।
मोदी पर हमला करते हुए ममता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने "स्टेडियम और स्कूलों का नाम अपने नाम पर रखा है। यहां तक कि कोविड टीकाकरण प्रमाण पत्रों पर भी उनका नाम है।"
उन्होंने भाजपा को एलपीजी संकट को और गंभीर बनाने का आरोप लगाया और कहा, "मैंने लोगों के लिए संघर्ष किया, जिसके बाद संकट थोड़ा कम हुआ है, इसलिए बंगाल के लोगों को अब एलपीजी मिल रही है। चुनाव के बाद वे फिर एलपीजी की किल्लत पैदा करेंगे।"
भाषा पारुल रंजन
रंजन
2004 2258 कोलकाता