अवैध गुर्दा प्रतिरोपण गिरोह : फरार ओटी तकनीशियन ने अदालत में आत्मसमर्पण किया
खारी
- 16 Apr 2026, 11:05 PM
- Updated: 11:05 PM
कानपुर (उप्र), 16 अप्रैल (भाषा) अवैध गुर्दा प्रतिरोपण गिरोह पर शिकंजा कसने की कवायद में बृहस्पतिवार को उस वक्त एक महत्वपूर्ण सफलता मिली जब फरार ओटी तकनीशियन मुदस्सर अली ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने यह जानकारी दी।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि आरोपी मुदस्सर अली अदालत में पेश हुआ और आत्मसमर्पण करने के बाद उसे हिरासत में ले लिया गया।
अली की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह नोएडा, गाजियाबाद तथा उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में पुलिस की तलाश के बावजूद दो सप्ताह से अधिक समय से फरार था।
उन्होंने बताया कि तलाशी अभियान के बावजूद वह गिरफ्तारी से बचता रहा और सीधे अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।
जांच से संकेत मिलता है कि अली अवैध गुर्दा प्रतिरोपण गिरोह में अहम भूमिका निभा रहा था। उस पर अवैध तरीके से गुर्दा प्रतिरोपण के दौरान चीरा लगाने, दाताओं से गुर्दा निकालने और प्रत्यारोपण में सहायता करने जैसी महत्वपूर्ण सर्जिकल प्रक्रियाएं को अंजाम देने का आरोप है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसकी सक्रिय संलिप्तता से कानपुर में अवैध तरीके से 30 से अधिक प्रतिरोपण किए जाने का अनुमान है।
एक अधिकारी ने बताया कि अली एक टीम के साथ काम करता था, जिसमें आमतौर पर एक अन्य डॉक्टर और दो सहायक शामिल होते थे। हर प्रक्रिया के बाद समूह पहचान से बचने के लिए लखनऊ, मेरठ और गाजियाबाद जैसे अलग-अलग शहरों में बंट जाता था।
इस बीच, गिरफ्तार आरोपियों में से एक राजेश कुमार ने जांचकर्ताओं को बताया है कि इस वर्ष जनवरी से अब तक कम से कम पांच प्रतिरोपण किए गए, जिनमें कथित तौर पर अली शामिल था।
पुलिस ने 30 मार्च को कानपुर में इस गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पांच डॉक्टर समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था। ये गिरफ्तारियां मुख्य चिकित्सा अधिकारी हरिदत्त नेमी के नेतृत्व में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा कल्याणपुर क्षेत्र स्थित 'मेड-लाइफ' अस्पताल, आहूजा अस्पताल और प्रिया अस्पताल में की गई छापेमारी के बाद हुई थीं।
आयुक्त ने बताया कि आहूजा अस्पताल की मालिक डॉ. प्रीति आहूजा (50), उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (54) तथा चिकित्सक राजेश कुमार (44), राम प्रकाश (40) और नरेंद्र सिंह को इस अवैध गतिविधि में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
पुलिस ने इस गिरोह के कथित सरगनाओं—रोहित और एंबुलेंस चालक शिवम अग्रवाल (32) को भी गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर चिकित्सक बनकर डॉक्टर, दाताओं और प्राप्तकर्ताओं के बीच कड़ी का काम करते थे। इसके अलावा ओटी तकनीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था।
अली के आत्मसमर्पण के साथ ही इस मामले में गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या 11 हो गई है।
यह गिरोह उस समय सामने आया जब बिहार निवासी एमबीए छात्र आयुष ने भुगतान विवाद को लेकर पुलिस से संपर्क किया। उसने आरोप लगाया कि गुर्दा देने के बदले तय 10 लाख रुपये में से उसे केवल 3.5 लाख रुपये ही मिले।
भाषा सं जफर खारी
खारी
1604 2305 कानपुर