नोएडा में हिंसक प्रदर्शन के बाद राज्य सरकार ने सभी श्रेणियों के श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाई
जोहेब
- 14 Apr 2026, 09:26 PM
- Updated: 09:26 PM
नोएडा, 14 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद विभिन्न श्रेणियों के कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन में अंतरिम बढ़ोतरी का निर्देश दिया है, जिसके तहत संशोधित दरें एक अप्रैल से प्रभावी मानी जाएंगी। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि इस वेतन वृद्धि से सभी श्रेणियों में अधिकतम 3,000 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी, जबकि गौतम बुद्ध नगर और गाजियाबाद में कामगारों की मासिक आय में 21 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकेगी।
औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने बताया कि अंतिम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया जल्द गठित किए जाने वाले वेतन बोर्ड के माध्यम से की जाएगी और सरकार कामगारों के स्वास्थ्य, पेंशन तथा उनके बच्चों की शिक्षा से जुड़े अतिरिक्त कल्याणकारी उपायों पर भी विचार कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार सोमवार को नोएडा में फैक्टरी कामगारों के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद श्रम मुद्दों की समीक्षा के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति ने वेतन वृद्धि का फैसला लिया।
गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा, "इस निर्णय को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार देर रात मंजूरी दी।"
एक बयान के अनुसार, समिति संवाद और समन्वय के जरिए औद्योगिक विवाद को सुलझाने की दिशा में काम कर रही है, साथ ही कामगारों की चिंताओं के समाधान के लिए विस्तृत उपायों पर भी विचार कर रही है।
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियोक्ताओं से समय पर वेतन भुगतान, उचित ओवरटाइम भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने की अपील की है, साथ ही विशेषकर महिला कामगारों के लिए सुरक्षित कार्य परिस्थितियां बनाए रखने पर जोर दिया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद में अब अकुशल कामगारों को 13,690 रुपये प्रति माह (पहले 11,313 रुपये) मिलेंगे, जबकि अर्धकुशल कामगारों को 15,059 रुपये और कुशल कामगारों को 16,868 रुपये मिलेंगे।
बयान में कहा गया है कि अन्य नगर निगम क्षेत्रों के लिए संशोधित मासिक वेतन दरें अकुशल कामगारों के लिए 13,006 रुपये, अर्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल कामगारों के लिए 16,025 रुपये तय की गई हैं।
बयान के अनुसार शेष जिलों में अकुशल कामगारों को 12,356 रुपये प्रति माह, अर्धकुशल को 13,591 रुपये और कुशल कामगारों को 15,224 रुपये मिलेंगे और यह निर्णय नियोक्ता संगठनों और श्रमिक संगठनों के साथ परामर्श के बाद लिया गया है।
सरकार ने कहा कि सुझावों और आपत्तियों की समीक्षा करके "संतुलित व व्यावहारिक" परिणाम सुनिश्चित किया गया है।
बयान में कहा गया है कि उद्योग वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिनमें उत्पादन लागत में वृद्धि और निर्यात में गिरावट शामिल है, वहीं वेतन, ओवरटाइम, सुरक्षा और कार्य परिस्थितियों को लेकर कामगारों की मांगें "प्रासंगिक व महत्वपूर्ण" हैं।
सरकार ने कहा, "ऐसी स्थिति में उद्योग और श्रम के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है और नयी श्रम संहिताओं के प्रावधानों का उद्देश्य उचित वेतन सुनिश्चित करना तथा कामगारों के हितों की रक्षा करना है।
सरकार ने कहा कि वह सूचकांक आधारित अंतरिम वेतन वृद्धि पर विचार कर रही है और जल्द गठित किए जाने वाले वेतन बोर्ड की सिफारिशों के आधार पर अंतिम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगी।
इस बीच, सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन खबरों को "फर्जी व भ्रामक" बताया है, जिनमें दावा किया गया था कि कामगारों के लिए 20,000 रुपये प्रति माह का एक समान न्यूनतम वेतन तय कर दिया गया है।
सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि नयी श्रम संहिताओं के तहत राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन तय करने की प्रक्रिया केंद्र स्तर पर जारी है और इस संबंध में अभी कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार ने कहा कि वेतन वृद्धि का निर्णय हालिया घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा के बाद लिया गया है और इसका उद्देश्य कामगारों को तत्काल वित्तीय राहत प्रदान करना और संतुलित दृष्टिकोण बनाए रखना है।
उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने न्यूनतम वेतन में अंतरिम वृद्धि लागू करने का निर्णय लिया है। सबसे अधिक बढ़ोतरी कुशल श्रेणी में की गई है और गौतम बुद्ध नगर तथा गाजियाबाद में यह वृद्धि 21 प्रतिशत तक है। ये संशोधित दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी मानी जाएंगी।"
नोएडा में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद वहां का दौरा करने वाली समिति ने कहा कि कामगार प्रतिनिधियों ने अपनी आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया और कहा कि यह वेतन वृद्धि, साप्ताहिक अवकाश, दोगुना ओवरटाइम भुगतान, सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियों जैसी मांगों पर केंद्रित था।
समिति ने कहा कि हिंसा में "बाहरी तत्वों" की संभावित भूमिका के भी संकेत मिले, जिसमें खुद कामगारों ने आशंका जताई कि हिंसा भड़काने में बाहरी लोग शामिल हो सकते हैं।
शिकायतों के समाधान और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने जिला स्तर पर एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित किया है। कामगार हेल्पलाइन नंबर 120-2978231, 120-2978232, 120-2978862 और 120-2978702 पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं और सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
राज्य सरकार ने हिंसा में शामिल असामाजिक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश भी जारी किए हैं और ऐसे लोगों की पहचान के लिए तकनीकी निगरानी, खुफिया सूचनाओं और स्थानीय स्तर पर जानकारी जुटाने के आधार पर विशेष अभियान चलाया गया है।
अधिकारियों ने कहा कि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमे शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि शांति और कानून-व्यवस्था को बाधित करने के प्रयास बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने मंगलवार को बताया कि सोमवार की हिंसा के सिलसिले में अब तक 300 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है और विभिन्न थानों में सात प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं।
भाषा सं जोहेब
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