उच्चतम न्यायालय ने एमएसपी से संबंधित याचिका पर केंद्र और अन्य को नोटिस भेजा
मनीषा
- 13 Apr 2026, 05:19 PM
- Updated: 05:19 PM
नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करते समय खेती की सटीक लागत पर राज्यों के प्रस्तावों को महत्व देने संबंधी याचिका पर सोमवार को केंद्र और अन्य से जवाब देने को कहा।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र, विदेश व्यापार महानिदेशालय और कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को नोटिस जारी कर याचिका पर उनका जवाब मांगा।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह याचिका देश के किसानों से जुड़े एक बहुत महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाती है।
याचिका में कहा गया, ''भारतीय किसान बहुत बड़ी आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं क्योंकि वे अपनी लागत पर भी अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं। इसकी वजह से कई किसानों ने आत्महत्या की है, पिछले 5 सालों में अकेले महाराष्ट्र में सत्रह हज़ार से ज़्यादा किसानों ने आत्महत्या की है।''
दलीलों के दौरान भूषण ने कहा कि अक्सर एमएसपी फसल की वास्तविक लागत से कम तय की जाती है।
पीठ ने कहा कि याचिका में अनेक गणितीय सूत्रों की बात कही गई है और भूमि की लागत और पूंजी को लेकर कठिनाई आ सकती है क्योंकि यह सब राज्यों में अलग-अलग है।
भूषण ने कहा कि गणना तो सरकार ने ही की है।
पीठ ने कहा, ''आप हमसे आर्थिक नीति दोबारा लिखने को कह रहे हैं।''
उसने कहा कि संभवत: सभी के लिए एक समान नीति नहीं हो सकती और बड़ी जोत वाले भी किसान हैं।
हालांकि, पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई और इस पर नोटिस जारी किया।
उसने कहा कि सरकार और उसके संस्थान अलग-अलग राज्यों में विभिन्न कृषि उत्पादों की लागत की गणना कर सकते हैं।
याचिका में अधिकारियों को निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वे खेती की वास्तविक लागत के आधार पर तय एमएसपी के तहत अधिसूचित सभी फसलों की पूरी खरीद सुनिश्चित करें।
याचिका में यह निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है कि जो किसान अपनी फसल एमएसपी पर बेचना चाहते हैं, उनकी फसलों की पूर्ण खरीद सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए जाएं।
याचिकाकर्ताओं ने यह अनुरोध भी किया है कि न्यायालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को किसानों के सभी बकाया खेती ऋण माफ करने का निर्देश दे, क्योंकि एमएसपी का ढांचा खेती की लागत वसूलने में लगातार फेल हो रहा है और इसके चलते खेती की मुश्किलें बढ़ रही हैं।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा
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