अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को समाप्त होगी
सुभाष
- 12 Apr 2026, 06:41 PM
- Updated: 06:41 PM
जम्मू, 12 अप्रैल (भाषा) जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को कहा दक्षिण कश्मीर स्थित अमरनाथ गुफा मंदिर की तीर्थयात्रा तीन जुलाई से शुरू होकर 57 दिन बाद 28 अगस्त को संपन्न होगी।
उपराज्यपाल ने यहां लोक भवन में संवाददाताओं को बताया कि 13 से 70 वर्ष की आयु के श्रद्धालु यात्रा कर सकेंगे और पंजीकरण 15 अप्रैल से शुरू होगा।
यात्रा की तिथियों पर निर्णय सिन्हा की अध्यक्षता में श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड (एसएएसबी) की बैठक में लिया गया।
सिन्हा ने कहा, ''अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को समाप्त होगी। इस बार यात्रा की अवधि पिछले वर्षों की तुलना में कुछ अधिक, करीब 57 दिन की होगी।''
उन्होंने बताया कि यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य होगा और यह 15 अप्रैल से शुरू किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए न्यूनतम आयु 13 वर्ष और अधिकतम आयु 70 वर्ष निर्धारित की गई है।
सिन्हा ने कहा, ''देशभर में करीब 556 निर्दिष्ट बैंक शाखाओं के माध्यम से अग्रिम पंजीकरण कराया जा सकेगा, जबकि श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन पंजीकरण की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।''
उन्होंने बताया कि यस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक और एक्सिस बैंक अपनी शाखाओं के माध्यम से पंजीकरण की सुविधा प्रदान करेंगे।
उपराज्यपाल ने कहा कि पहली पूजा 19 जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर की जाएगी।
उन्होंने बताया कि यात्रा दो मार्गों से संचालित होगी। पहला - अनंतनाग जिले का पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबा नुनवान-पहलगाम मार्ग और दूसरा - गांदरबल जिले का अपेक्षाकृत छोटा 14 किलोमीटर लंबा लेकिन अधिक खड़ी चढ़ाई वाला बालटाल मार्ग।
सिन्हा ने कहा कि अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को सुगम बनाने के लिए पिछले चार वर्षों में कई नयी पहल शुरू की गई हैं, जिनमें अनिवार्य रेडियो फ्रीक्वेंसी पहचान (आरएफआईडी) कार्ड और बीमा कवरेज शामिल हैं।
उन्होंने कहा, "आरएफआईडी कार्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं और 100 प्रतिशत तीर्थयात्रियों को ये कार्ड जारी किए जा रहे हैं। सामूहिक दुर्घटना बीमा राशि को पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दिया गया है, साथ ही टट्टू से श्रद्धालुओं की यात्रा कराने वालों की तीर्थयात्रा के दौरान मृत्यु होने पर 50,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता का प्रावधान किया गया है।"
बुनियादी ढांचे में सुधार का उल्लेख करते हुए सिन्हा ने कहा कि तीर्थयात्रियों की सुगम आवाजाही के लिए दोनों यात्रा मार्गों को काफी चौड़ा किया गया है।
उन्होंने कहा, "बालटाल और नुनवान मार्गों को कई स्थानों पर लगभग 12 फुट तक चौड़ा किया गया है तथा सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने संवेदनशील हिस्सों और पुलों में उल्लेखनीय सुधार किया है। संगठन ने वर्षों से सराहनीय रखरखाव कार्य किया है।"
सिन्हा ने कहा कि मार्ग के संवेदनशील स्थानों पर सख्त सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं और यात्रा के लिए बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की गई है।
उन्होंने कहा, "जम्मू कश्मीर पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है, जबकि सेना सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अग्रिम रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात रहती है।"
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