महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने का समय आ गया है: प्रधानमंत्री मोदी
गोला
- 12 Apr 2026, 01:33 PM
- Updated: 01:33 PM
नयी दिल्ली, 12 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने का समय आ गया है और 2029 के लोकसभा चुनाव एवं विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाने चाहिए।
प्रधानमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे एकजुट होकर महिला आरक्षण कानून में संशोधन पारित करें।
संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र से पहले लोकसभा और राज्यसभा के सदन के नेताओं को लिखे पत्र में मोदी ने यह भी कहा कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है जब महिलाओं को प्रगति करने, निर्णय लेने और सबसे महत्वपूर्ण बात, नेतृत्व करने का अवसर मिलता है।
उन्होंने कहा कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनने के अपने सपने को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि महिलाएं इस यात्रा में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएं।
उन्होंने कहा, ''विस्तृत विचार-विमर्श के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अब नारी शक्ति वंदन अधिनियम को देश भर में उसके सच्चे स्वरूप में लागू करने का समय आ गया है।''
प्रधानमंत्री ने 11 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में कहा, ''यह अनिवार्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव महिलाओं के लिए आरक्षण के साथ कराए जाएं।''
मोदी ने कहा कि 2029 में महिला आरक्षण अधिनियम के लागू होने से भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं में नयी ऊर्जा का संचार होगा और जनता का विश्वास मजबूत होगा, साथ ही शासन में अधिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा, ''मैं यह पत्र इसलिए लिख रहा हूं ताकि हम सभी एक साथ मिलकर इस संशोधन को पारित करने के लिए एकजुट हो सकें।''
नारी शक्ति वंदन अधिनियम को आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है।
संसद के बजट सत्र की अवधि बढ़ा दी गई है और सदन का एक विशेष तीन दिवसीय सत्र 16 से 18 अप्रैल तक बुलाया गया है।
महिला आरक्षण अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों के पारित हो जाने से लोकसभा में सीट की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी जिनमें से 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान 2023 में संविधान में संशोधन करके लाया गया था।
हालांकि महिला आरक्षण 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू हो पाता।
इसका मतलब यह था कि यदि वर्तमान कानून यथावत रहता है तो आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता।
इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करने के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम में बदलाव की आवश्यकता थी; इसलिए सरकार कानून में संशोधन पारित करने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह यह पत्र इसलिए लिख रहे हैं ताकि सभी दल 16 अप्रैल से संसद में होने वाली ''ऐतिहासिक चर्चा'' के दौरान इस संशोधन को पारित करने के लिए एकमत होकर अपनी बात रखें।
उन्होंने कहा, ''यह विशेष बैठक हमारे लोकतंत्र को और मजबूत करने का अवसर है। यह एक ऐसा क्षण भी है जब हम सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहरा सकते हैं।'' उन्होंने कहा, ''मैं इसी भावना और उद्देश्य के साथ आपको यह पत्र लिख रहा हूं।''
मोदी ने आज कहा कि सार्वजनिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी सभी के सामने है।
उन्होंने कहा, ''अंतरिक्ष से लेकर खेल तक, सशस्त्र बलों से लेकर स्टार्टअप तक, भारत की बेटियां हर क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ रही हैं। अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प से वे अपनी क्षमताओं को साबित कर रही हैं।''
मोदी ने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा दशकों से चर्चा में है और 2023 में सभी दलों के सांसद संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन करने के लिए एकजुट हुए थे।
उन्होंने कहा, ''यह एक यादगार क्षण था जिसने हमारी एकता को दर्शाया। पूरी दुनिया ने देखा कि देश की महिलाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए सामूहिक रूप से एक महत्वपूर्ण निर्णय कैसे लिया गया।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाएं देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं और यह राजनीतिक क्षेत्र में उनकी भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत कदम है।
उन्होंने कहा, ''मैं उस दिन को भारत की संसदीय यात्रा में एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक मील का पत्थर मानता हूं। कई सांसदों ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर हुई चर्चा में योगदान दिया।''
मोदी ने कहा कि उन विचार-विमर्शों के दौरान इसके कार्यान्वयन के समय पर भी चर्चा हुई और इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि इस ऐतिहासिक कानून के प्रावधान जल्द से जल्द प्रभावी होने चाहिए।
उन्होंने कहा, ''कई दलों के नेताओं का यही मत था। हाल में हमने इस विषय पर विशेषज्ञों से परामर्श किया है। हमने संवैधानिक मामलों के जानकारों से सुझाव और मार्गदर्शन मांगा है। हमने राजनीतिक दलों के साथ भी संवाद किया है।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बहुत अच्छा होगा यदि कई सांसद संसद में इस विषय पर अपने विचार व्यक्त करें और यह क्षण किसी एक पार्टी या व्यक्ति से ऊपर है।
उन्होंने कहा, ''यह महिलाओं और हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी प्रदर्शित करने का क्षण है। चूंकि सभी राजनीतिक दलों ने लंबे समय से राजनीति में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की है, इसलिए अब उस आकांक्षा को वास्तविकता में बदलने का सही समय है।''
मोदी ने कहा कि यह देश की नारी शक्ति और 140 करोड़ भारतीयों के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
उन्होंने कहा, ''मुझे पूरा विश्वास है कि हम सब मिलकर संसद में इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करेंगे।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण लागू करने में योगदान देने वाले सांसद इस ऐतिहासिक प्रयास का हिस्सा होने पर हमेशा गर्व महसूस करेंगे।
उन्होंने कहा, ''इसलिए, हमें इस अवसर को हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लागू करने के लिए संशोधन को लेकर आपके समर्थन से हमारे देश की महिलाओं के प्रति एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का निर्वहन होगा।''
उन्होंने कहा, ''आइए हम अपनी महान लोकतांत्रिक परंपराओं को और मजबूत करें और एक ऐतिहासिक परिवर्तन की दिशा में निर्णायक कदम उठाएं।''
भाषा सुरभि गोला
गोला
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