केवल दिल्ली-वाराणसी हाईस्पीड कॉरिडोर को बरकरार रखा गया, छह डीपीआर में बदलाव किए गए: दस्तावेज
दिलीप
- 10 Apr 2026, 10:13 PM
- Updated: 10:13 PM
(जीवन प्रकाश शर्मा)
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) पिछले कुछ सालों में रेल मंत्रालय को सात हाई-स्पीड कॉरिडोर के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करके सौंपी गई हैं; हालांकि, हाल में केंद्रीय बजट में की गई घोषणा में सिर्फ दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर को ही रखा गया है, जबकि बाकी छह कॉरिडोर की मूल योजना में या तो संशोधन किया गया है या उनकी जगह नये कॉरिडोर का प्रस्ताव किया गया है। एक दस्तावेज से यह जानकारी मिली।
रेल अधिकारियों ने बताया कि इन कॉरिडोर में बदलाव करने का फैसला कई बातों को ध्यान में रखकर लिया गया, जिनमें इनकी व्यवहार्यता, यातायात सर्वेक्षण और परिचालन योजना शामिल हैं।
अवसंरचना विशेषज्ञों ने केंद्रीय बजट में हाई-स्पीड कॉरिडोर की घोषणाओं को आर्थिक विकास और व्यावसायिक कुशलता के लिए परिवर्तनकारी बताया है।
नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) और रेल मंत्रालय के बीच एक आंतरिक पत्राचार से पता चलता है कि एनएचएसआरसीएल ने 2021-22 में दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर (942 किलोमीटर, जिसमें लखनऊ से अयोध्या तक 124 किलोमीटर की एक लाइन भी शामिल है) और मुंबई-नागपुर कॉरिडोर (765 किलोमीटर) के लिए दो डीपीआर तैयार की थीं।
सरकार ने बजट में दिल्ली-वाराणसी परियोजना को तो बरकरार रखा, लेकिन मुंबई-नागपुर कॉरिडोर को बदलकर मुंबई-पुणे कर दिया।
साल 2022-23 में, एनएचएसआरसीएल ने 878 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए एक डीपीआर तैयार की और उसे मंत्रालय को सौंप दिया। हालांकि, यह परियोजना मौजूदा सूची में शामिल नहीं है; इसके बजाय, एक नए हैदराबाद-बेंगलुरु कॉरिडोर का प्रस्ताव रखा गया है।
चौथे कॉरिडोर के लिए मूल योजना 671 किलोमीटर लंबे मुंबई-हैदराबाद मार्ग की थी, जिसके लिए 2023-24 में डीपीआर सौंपी गई थी। अब इसे बदलकर पुणे-हैदराबाद कर दिया गया है।
दस्तावेज़ में बताया गया है कि डीपीआर को अंतिम रूप देते समय एनएचएसआरसीएल ने रेल मंत्रालय से मिले सुझावों और फ़ीडबैक को शामिल किया, और 300 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति के हिसाब से अलाइनमेंट डिज़ाइन तैयार किए।
दस्तावेज़ में कहा गया है, ''दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए दो डीपीआर सौंपी गई थीं, जिनमें परिचालन गति क्रमशः 300 किमी प्रति घंटा और 200 किमी प्रति घंटा रखी गई थी।''
दस्तावेज़ में आगे कहा गया है, ''सभी चारों डीपीआर आंतरिक रूप से तैयार की गई थीं और इनके अलाइनमेंट से जुड़ी अंतिम जानकारी लिडार डेटा पर आधारित थी; साथ ही, इनमें सामाजिक प्रभाव आकलन और पर्यावरणीय प्रभाव आकलन को भी शामिल किया गया था।''
पांचवें कॉरिडोर (475 किलोमीटर लंबे दिल्ली-अमृतसर मार्ग) की डीपीआर जुलाई 2024 में जमा की गई थी, लेकिन इसे अंतिम सूची में शामिल नहीं किया गया। इसके बजाय, एक नया हैदराबाद-चेन्नई कॉरिडोर शामिल किया गया है।
इसी तरह, 464 किलोमीटर लंबे चेन्नई-मैसूर कॉरिडोर, जिसकी डीपीआर सितंबर 2024 में जमा की गई थी, को अब बदलकर चेन्नई-बेंगलुरु कर दिया गया है।
सातवां कॉरिडोर, जिसकी मूल योजना 754 किलोमीटर लंबे वाराणसी-हावड़ा मार्ग के तौर पर बनाई गई थी, उसे अब बदलकर वाराणसी-सिलीगुड़ी कर दिया गया है।
इस दस्तावेज़ के अनुसार, दिल्ली-अमृतसर, चेन्नई-मैसूर और वाराणसी-हावड़ा कॉरिडोर के अलाइनमेंट डिज़ाइन 300 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति पर आधारित थे।
केंद्रीय बजट में घोषित सात कॉरिडोर के बारे में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाल में संसद में एक प्रश्न के लिखित जवाब में बताया कि ये परियोजनाएं राष्ट्रीय परिवहन अवसंरचना को मज़बूत करेंगी और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को बढ़ावा देंगी।
भाषा वैभव दिलीप
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