कांग्रेस ने प्रस्तावित परिसीमन को 'असंवैधानिक' बताया, अगले सप्ताह विपक्षी नेताओं के साथ करेगी बैठक
धीरज
- 10 Apr 2026, 09:17 PM
- Updated: 09:17 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 10 अप्रैल (भाषा) कांग्रेस ने महिला आरक्षण अधिनियम को लागू करने के साथ प्रस्तावित परिसीमन की कवायद को ''असंवैधानिक'' करार देते हुए शुक्रवार को कहा कि इसके गंभीर परिणाम होंगे और ऐसे में वर्तमान विधानसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद परिसीमन के मुद्दे पर गहन विचार-विमर्श की जरूरत है।
पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे अगले हफ्ते संसद की तीन दिवसीय बैठक से पहले विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक बुलाएंगे, जिसमें महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन और परिसीमन के मुद्दे पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। यह बैठक संभवत: 15 अप्रैल को होगी।
कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में इन विषयों और पश्चिम एशिया संकट पर मंथन किया गया।
मुख्य विपक्षी दल ने यह स्पष्ट किया कि वह महिला आरक्षण को लागू करने के समर्थन में है, लेकिन परिसीमन के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की समानुपातिक वृद्धि के खिलाफ है क्योंकि इससे दक्षिण भारत के प्रदेशों और छोटे राज्यों का नुकसान होगा।
बैठक में खरगे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और कई नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार विधानसभा चुनावों के बीच राजनीतिक लाभ लेने के लिए आनन-फानन में यह कदम उठा रही है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने कहा कि परिसीमन के तहत लोकसभा की सीटों में 50 प्रतिशत की समानुपातिक वृद्धि से दक्षिण भारत राज्यों का नुकसान होगा।
सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने और लोकसभा सीट की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने के लिए एक विधेयक लाने वाली है, जिसमें 273 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। संसद की तीन दिवसीय बैठक 16, 17 और 18 अप्रैल को होगी।
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को उन मसौदा विधेयकों को मंजूरी दी थी, जिनका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला आरक्षण से संबंधित नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन करना और लोकसभा सीट की संख्या बढ़ाना है।
कांग्रेस मुख्यालय 'इंदिरा भवन' में आयोजित बैठक में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, जयराम रमेश और कई अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से इस बैठक में शामिल हुईं।
खरगे ने बैठक में दिए अपने शुरुआती संबोधन में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में राजनीतिक लाभ लेने के लिये महिला आरक्षण कानून में संशोधन करने के लिए संसद की तीन दिवसीय बैठक बुलाई है, जो आचार संहिता का उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि लोकसभा और विधानसभाओं की सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत के अनुपात में वृद्धि को लेकर जिस परिसीमन की बात हो रही है, उसके गंभीर परिणाम होंगे, ऐसे में परिसीमन को लेकर गहन विचार-विमर्श की जरूरत है।
खरगे ने निर्वाचन आयोग पर ''गृह मंत्रालय के अधीनस्थ कार्यालय'' की तरह काम काम करने का आरोप लगाया और कहा कि उससे यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह आचार संहिता के उल्लंघन के इस मामले पर गौर करेगा।
खरगे ने कहा, ''हमने और विपक्षी दलों के सदन के नेताओं ने संसदीय कार्य मंत्री को तीन बार लिख कर कहा था कि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए मतदान के आखिरी दिन के बाद सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाए और गंभीरता से चर्चा की जाये। हम सबके अनुरोध के बाद भी सरकार ने केवल विमर्श बदलने और चुनावी लाभ के लिए हमारी बातों को नहीं माना।''
कार्य समिति की बैठक के बाद जयराम रमेश ने संवाददाताओं से कहा, ''अगले कुछ दिनों में कांग्रेस अध्यक्ष विपक्षी नेताओं की एक बैठक बुलाएंगे, जिसमें सभी विपक्षी दलों के नेता शामिल होंगे। इसके बाद दोनों सदनों के विपक्षी दलों के नेताओं की बैठक भी होगी।''
उनका कहना है, ''हम चाहते हैं कि 2023 में सर्वसम्मति से पारित हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम और संविधान में शामिल 334(ए) को सही ढंग से लागू किया जाए।''
रमेश ने दावा किया कि मोदी सरकार जल्दबाजी में परिसीमन का कदम उठाकर यह प्रयास कर रही है कि कैसे जातिगत जनगणना को लगातार टाला जाए और महिला आरक्षण के नाम पर असल मुद्दों से ध्यान भटकाया जाए।
उनका कहना था कि मुद्दा महिला आरक्षण का नहीं है, बल्कि असल मुद्दा परिसीमन है।
रमेश ने कहा, ''हमारी मांग है कि 29 अप्रैल के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाइए, सरकार की तरफ जो भी औपचारिक प्रस्ताव हैं, उस पर पार्टियों के साथ चर्चा कीजिए। सर्वदलीय बैठक विधानसभा चुनावों के बाद की जाए। देश में महिला आरक्षण लागू होना चाहिए, लेकिन सरकार जिस तरह जल्दबाजी में परिसीमन करना चाहती है, वो तरीका असंवैधानिक है।''
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