तेलंगाना उच्च न्यायालय ने खेड़ा की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित की
पवनेश
- 09 Apr 2026, 07:57 PM
- Updated: 07:57 PM
हैदराबाद, नौ अप्रैल (भाषा) तेलंगाना उच्च न्यायालय ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की पत्नी के खिलाफ आरोपों को लेकर दर्ज मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई शुक्रवार तक स्थगित कर दी।
खेड़ा की ओर से डिजिटल तरीके से पेश हुए कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने दलील देते हुए असम की हिमंत विश्व शर्मा सरकार द्वारा दर्ज मामले में राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया।
असम के महाधिवक्ता देवजीत सैकिया ने खेड़ा की याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि कोई राजनीतिक प्रतिशोध नहीं है और याचिका तेलंगाना उच्च न्यायालय में विचारणीय नहीं है।
खेड़ा के वकील पोन्नम अशोक गौड़ ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि शुक्रवार को आदेश सुनाया जा सकता है।
खेड़ा ने 7 अप्रैल को याचिका दायर की थी और अपना आवासीय पता हैदराबाद का बताया। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि अगर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, तो जमानत पर रिहा कर दिया जाए।
खेड़ा ने अपनी याचिका में गुवाहाटी अपराध शाखा थाने के पुलिस उपायुक्त और तेलंगाना सरकार को प्रतिवादी बनाया।
सिंघवी ने दलील के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा को ''संवैधानिक काउबॉय'' बताते हुए कहा कि जब गुवाहाटी पुलिस ने खेड़ा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी, तब वह हैदराबाद में थे और वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं, जो हैदराबाद की ही रहने वाली हैं। उनकी पत्नी ने तेलंगाना में चुनाव भी लड़ा था।
उन्होंने तर्क दिया कि यह मानहानि का दीवानी या फौजदारी मामला हो सकता है, लेकिन असम पुलिस आखिर ऐसी किसी बात के लिए किसी को गिरफ्तार क्यों करना चाहेगी? खेड़ा न तो आदतन अपराधी हैं और न ही उनके भाग जाने का कोई ख़तरा है। उन्होंने कहा, ''खेड़ा की समाज में गहरी जड़ें हैं और वह एक जाने-माने राजनेता हैं।''
सिंघवी ने कहा, ''हम 'संवैधानिक काउबॉय' के जमाने में नहीं जी रहे हैं। हम ऐसे जमाने में नहीं जी रहे हैं, जहां असम से 100 लोगों को निजामुद्दीन (खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए) भेज दिया जाए, सिर्फ इसलिए कि शिकायत में मानहानि होने की बात कही गई है।''
असम के महाधिवक्ता सैकिया ने कहा कि प्राथमिकी पढ़ते समय उनके मन में सबसे पहले अभिनेता अक्षय कुमार की फिल्म 'इंटरनेशनल खिलाड़ी' या 'डॉन' का ख्याल आया। उन्होंने कहा, ''तो यही वह शब्द है, जो मेरे हिसाब से आरोपी (खेड़ा) के लिए सबसे ज्यादा सही रहेगा।''
सैकिया ने तर्क दिया, ''प्राथमिकी में ऐसा एक भी संकेत नहीं है, जिससे यह लगे कि वह असम नहीं आ सकते। असम कोई 'बनाना रिपब्लिक' (जहां क़ानून-व्यवस्था न हो) नहीं है। यहां कानून का राज है। उनकी जान को कोई खतरा नहीं है।''
उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता एक महिला (शर्मा की पत्नी) हैं, न कि कोई राजनेता। उन्होंने कहा कि खेड़ा द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
सैकिया ने कांग्रेस नेता की उस याचिका की स्वीकार्यता पर ही आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने अग्रिम जमानत की गुहार लगाई थी।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने इस बारे में बहुत स्पष्ट दिशानिर्देश तय किए हैं कि अगर प्राथमिकी एक राज्य में दर्ज होती है, आरोपी दूसरे राज्य में रहता है, और अग्रिम जमानत किसी तीसरे राज्य के उच्च न्यायालय में मांगी जाती है, तो क्या होगा।
असम के एजी ने कहा, ''इस मामले में, ऐसा है कि प्राथमिकी असम में दर्ज हुई है। वह (खेड़ा) दिल्ली के स्थायी निवासी हैं। अब वह हैदराबाद में हैं और तेलंगाना में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दे रहे हैं; क्या ऐसा करना जायज है या नहीं?''
सैकिया ने यह भी आरोप लगाया कि खेड़ा ने अपना जाली आधार कार्ड बनवाया और तेलंगाना उच्च न्यायालय को भी गुमराह किया।
खेड़ा के खिलाफ गुवाहाटी अपराध शाखा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिनमें धारा 175 (चुनाव के संबंध में झूठा बयान देना), 35 (शरीर और संपत्ति की निजी सुरक्षा का अधिकार) और 318 (धोखाधड़ी) शामिल हैं।
कांग्रेस नेता ने 5 अप्रैल को आरोप लगाया था कि शर्मा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा के पास कई पासपोर्ट और विदेश में संपत्ति है, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री के चुनावी हलफनामे में नहीं किया गया था।
इससे पहले, असम पुलिस की एक टीम इस मामले के सिलसिले में पूछताछ करने के लिए खेड़ा के दिल्ली स्थित घर गई थी।
मंगलवार को शर्मा ने कांग्रेस पर इस बात के लिए जोरदार हमला किया कि उसने उन दस्तावेजों का 'सत्यापन नहीं किया' जिनके आधार पर उसने उन पर और उनके परिवार पर आरोप लगाए थे।
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि खेड़ा ''भागकर'' हैदराबाद चले गए हैं, लेकिन असम पुलिस उन्हें ''पाताल से भी ढूंढ निकालेगी''।
भाषा वैभव पवनेश
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